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मूवी रिव्यूः घोस्ट

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2012, 04:33 PM IST

फिल्म की कहानी पूरी तरह से सिटी हॉस्पिटल के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां एक के बाद एक दिल दहला देने वाली हत्याएं होती हैं।

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एक हॉरर फिल्म में हमेशा से ही बदला लेने की कहानी को दिखाया जाता है और फिल्म घोस्ट भी इससे कुछ अलग नहीं है। यह फिल्म जहां अच्छी बन सकती थी इसमें बहुत ज्यादा प्रयोग करने के कारण यह मूल कहानी से भचकी हुई लगती है। पहला हाफ फिल्म की कहानी व एक्टर्स को कनेक्ट करने में ही सफल नहीं हो पाता है। हां, सेकंड हाफ में जरूर कुछ थ्रिलिंग मोमेंट्स दिखते हैं लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और दर्शक सिनेमाहॉल से निकल चुका होता है।





फिल्म की कहानी पूरी तरह से सिटी हॉस्पिटल के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां एक के बाद एक दिल दहला देने वाली हत्याएं होती हैं। डॉक्टर सुहानी(सयाली भगत) हॉस्पिटल में हो रही अलौकिक घटनाओं का सामना करतीं हैं। रात के समय हो रहीं इन हत्याओं के पीछे राक्षसी शक्तियों का हाथ है और इस बात की गवाह डॉ. सुहानी बनतीं हैं। मामले की जांच एक डिटेक्टिव एजेंसी को सौंपी जाती है और इसका एक ऑफिसर विजय सिंह(शाइनी आहूजा) यहां आता है। क्या वह कातिल को पकड़ पाता है या फिर इन हत्याओं का सिलसिला चलता रहता है। यही फिल्म में दिखाया गया है।





स्टार कास्टः फिल्म घोस्ट से शाइनी आहूजा एक बार फिर से बॉलीवुड में वापसी कर रहे हैं लेकिन यह फिल्म उन्हें कहीं से भी सहायता करती हुई नहीं दिख रही है। सयाली भगत की एक्टिंग में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके लिए डायरेक्टर्स उन्हें अपनी फिल्मों में लेने की हिम्मत करें। सयाली और शाइनी के बीच भी कोई कैमिस्ट्री नहीं नजर आती है। जूलिया ब्लिस के कैरेक्टर को अगर स्पेशल इफेक्ट्स के सहारा नहीं मिलता तो वे कहीं से भी भूत ही नहीं नजर आतीं।





डायरेक्टरः पूजा जतिंदर बेदी ने हॉरर फिल्म में बॉलीवुड मसाला डालने के चक्कर में इसकी आत्मा को ही मार दिया है। कई हॉरर सीन तो ऐसे हैं कि दर्शकों को डर की हंसी आने लगती है। इसके साथ ही वे फिल्म में कंटीन्यूटी बनाए रखने में भी नाकामयाब रहीं हैं।





डायलॉग/ सिनेमैटोग्राफी/म्यूजिकः डायलॉग्स तो ऐसे हैं कि सुनकर नींद आने लगे। सिनेमैटोग्राफी ठीकठाक है लेकिन खराब एडिटिंग के कारण यह कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाया। फिल्म का म्यूजिक ऐसा नहीं जिसे याद रखा जा सके, हां बैकग्राउंड स्कोर जरूर लाजवाब है जो हॉरर सीन को और भी डरावना बनाता है।





क्यों देखें: घर पर खाली बैठें हों और वक्त काटे न कट रहा हो तो अपने पैसों को यह फिल्म देखकर बर्बाद कर सकते हैं।





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