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आई एम 24

एक व्यंक्ति इंटरनेट पर चैट कर रहा है। अधेड़, अधगंजा। वीडियो-चैट पर वह जिस लड़की से बतिया रहा है, वह 24 साल की है।

Dainik Bhaskar

Sep 01, 2012, 05:53 PM IST
24एक व्यक्ति इंटरनेट पर चैट कर रहा है। अधेड़, अधगंजा। वीडियो-चैट पर वह जिस लड़की से बतिया रहा है, वह 24 साल की है। वह उसे देख सकता है, लेकिन वह उसे नहीं देख सकती। व्यक्ति कहता है कि वह भी 24 का ही है : पांच फीट, साढ़े छह इंच लंबा, काले-घुंघराले बाल। आप सोच सकते हैं कि क्याह अनजान लोगों से चैट करने के एक दूसरे पहलू के बारे में हमें चेताया जा रहा है? नहीं। यह एक रोमैंटिक कॉमेडी है। वह व्यक्ति दिखने में बहुत अच्छा नहीं है (चूंकि इस फिल्म में हर बात का संबंध अच्छा दिखने से ही है), लेकिन वीडियो चैट वाली उस लड़की की नासमझी के बावजूद मुझे नहीं लगता कि वह उसके लायक है। वास्तीव में उसका हुलिया इतना बुरा भी नहीं है। यदि वह अपने सिर के बचे-खुचे बालों को भी मुंडवा ले तो वह अच्छा-भला दिखने लगेगा। वह लंबा है, छरहरा है, ठीक-ठाक बोल भी लेता है (यह ब्योरा इसलिए दिया जा रहा है, ताकि आपको यह अंदाजा हो जाए कि लीड रोल के लिए कितनी वाहियात कास्टिंग की गई है।) तो उस लड़की के बारे में क्याई? वह इस गप को बड़ी आसानी से मान लेती है कि वह जिस व्यक्ति से चैट कर रही है, वह गदर, लगान और दिल चाहता है जैसी फिल्मों का लेखक है। इस तथ्यस की पुष्टि एक सेकंड में की जा सकती है, बशर्ते उसका इंटरनेट कनेक्शफन केवल वीडियो चैट की ही अनुमति न देता हो। वह फुटबॉल खिलाडि़यों के नाम गिनाता है और दावा करता है कि मेराडोना उसका फैमिली फ्रेंड है। आखिर वह लड़की कुल-जमा 24 साल की ही है और फुटबॉल खिलाड़ी उसे आकर्षित कर सकते हैं। लेकिन लगता नहीं कि उन दोनों के बीच किसी तरह का कोई रिश्तार हो सकता है। व्येक्ति लड़की की खूबसूरती पर फिदा है। लड़की की दिलचस्पीो व्यशक्ति की शोहरत में है। वह उससे मिलना चाहती है। अब उस व्यक्ति को कुछ न कुछ करना ही होगा। इस कहानी को इससे ज्याहदा खींच पाना मुमकिन नहीं है। अगर मुख्यह कहानी कारगर साबित नहीं हो रही हो तो हमेशा कुछ नई कहानियां गढ़ी जा सकती हैं। कोई न कोई तो ऐसा निर्माता मिल ही जाएगा, जिसकी पूरी फिल्मू को स्पॉकन्सदर करने में रुचि हो। शायद बॉलीवुड इसी तरह काम करता है। फिल्म के हीरो को यह पता होना चाहिए। वह स्ट्रगलिंग स्क्रिप्ट राइटर है। उसका सबसे अच्छा दोस्त (रनवीर शौरी) हीरो बनना चाहता है। तब यह फिल्म बॉलीवुड फिल्मों के बनने के बारे में एक और बॉलीवुड फिल्मो बनकर रह जाती है, जो कतई मजेदार नहीं है। या शायद यह केवल उन्हींे लोगों के लिए मजेदार है, जो फिल्में बनाते हैं। हम बेसब्री के साथ फिल्मो के अभिनेताओं का काम देखते हैं। सभी उत्साही कलाकार : नेहा धूपिया, रनवीर शौरी, रजत कपूर, सौरभ शुक्ला्… वे अपने आप में छोटी बजट की फिल्मों की एक विधा बन चुके हैं। मैं अब गिनती भूल चुका हूं कि इन कलाकारों को मैंने कितनी फिल्मों में साथ काम करते हुए देखा है। निश्चित ही, इन दोस्तों के लिए फिल्म की शूटिंग के दौरान साथ बिताया जाने वाला समय बड़ा दिलचस्प होता होगा। काश यही बात उनकी फिल्मों के ऊबे हुए दर्शकों के बारे में भी कही जा सकती।
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