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MOVIE REVIEW: 'आई, मी और मैं'

“हू इज़ द बेस्‍ट, हू इज़ द बेस्‍ट, इशान इज़ द बेस्‍ट, हफ्फ-हफ्फ,” यह व्‍यक्ति पूरी फिल्‍म में बस यही कहता रहता है,

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2013, 09:42 AM IST
movie review: i me aur main

“हू इज़ द बेस्‍ट, हू इज़ द बेस्‍ट, इशान इज़ द बेस्‍ट, हफ्फ-हफ्फ,” यह व्‍यक्ति पूरी फिल्‍म में बस यही कहता रहता है, खासतौर पर तब, जब वह आईने के सामने किसी बॉक्‍सर की तरह अपनी कलाइयां घुमाता रहता है।

जब उसकी प्रेमिका उसके सामने यह कबूल करती है कि वह उसे चाहती है तो वह जवाब में कहता है “आई लव मी,” और फिर वे दोनों प्‍यार करने लग जाते हैं। जब उसकी गर्लफ्रेंड एक बार फिर उसके प्रति अपने प्‍यार का इजहार करती है तो वह कहता है “मैं हूं ही इतना अच्‍छा।” समझ से परे है कि यह इंसान दिमागी रूप से बीमार है या फिर यह अभिनेता लो आईक्‍यू वाले एक ऐसे डफर की भूमिका रहा है, जो हीनता बोध से बुरी तरह ग्रस्‍त है।

खैर, मनोविज्ञान कहता है कि हमारे मूल व्‍यक्तित्‍व का निर्माण तब होता है, जब हम सात वर्ष के होते हैं। इस फिल्‍म के शुरुआती शॉट में ही हम देखते हैं कि नन्‍हा इशान अपनी मां के साथ है और मां उसे बता रही है कि वह बेस्‍ट है। पता नहीं बेस्‍ट से उनका क्‍या आशय रहा होगा। हो सकता है कि उसकी मां के दिमाग के पुर्जे भी सही-सलामत न हों।

वैसे देखा जाए तो यह लड़का अपनी पेशेवर जिंदगी में बहुत बुरा प्रदर्शन नहीं करता है। हालांकि, मैं श्‍योर नहीं हूं कि आखिर वह क्या करता है, सिवाय अपनी बॉस (राइमा सेन) को एट्टीट्यूड दिखाने के। शायद वह कोई म्‍यूजिक लेबल एग्‍जीक्‍यूटिव है। वह कहता है कि वह सिंगिंग टैलेंट्स की खोज करता है और उन्‍हें अपना एल्बम बनाने का मौका देता है। सहसा इन अनजान चेहरों से शहर के बिलबोर्ड पट जाते हैं और हर म्‍यूजिक स्‍टोर में उनके पोस्‍टर नजर आने लगते हैं। यह भारत की कहानी है, जहां वास्‍तविक सिंगिंग स्‍टार्स तो बॉलीवुड प्‍लेबैक आर्टिस्‍ट ही होते हैं। ऐसे में इस हीरो के करियर ग्राफ को समझ पाना कठिन है।

यह एक रोमांटिक कॉमेडी है। ओके, लेकिन चूंकि मुझे इसमें कहीं कुछ भी कॉमिक नजर नहीं आया, लिहाजा मान लेते हैं कि यह एक लड़के और दो लड़कियों की रोमांटिक फिल्‍म है। वास्‍तव में मैं तो रोमांटिक फिल्‍मों को बहुत पसंद करता हूं, लेकिन लगता है कि शायद इस तरह की फिल्‍मों को पसंद करना जितना आसान है, उन्‍हें बनाना उतना ही कठिन है।

शायद इस तरह की फिल्‍में पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती हैं कि स्‍क्रीन पर मुख्‍य भूमिकाएं निभाने वाले कलाकार कौन हैं। दर्शक इसे केमिस्‍ट्री कहते हैं। हमें इन कलाकारों से इतनी जल्‍दी प्‍यार हो जाता है, जितनी जल्‍दी उन्‍हें फिल्‍म में एक-दूसरे से भी नहीं होता होगा।

हिंदी रोमांटिक फिल्‍मों के जादुई असर में बैकग्राउंड स्‍कोर की भी अहम भूमिका होती है। लेकिन इस फिल्‍म का एक गाना तो फिल्‍म ‘जाने तू या जाने ना’ के रहमान के संगीत में सजे गीत ‘कहीं तो होगी वो’ की एक बेहद खराब नकल जान पड़ता है।

वास्‍तव में हम कोई भी अपनी पसंदीदा रोमांटिक कॉमेडी उठाकर देख लें, चाहे वह डीडीएलजे हो, जेरी मैकगिरे हो, हॉलिडे हो या कोई और, हम पाएंगे कि उसका हीरो एक बेहूदा किस्‍म का शख्‍स है, लेकिन इसके बावजूद हम उसे पसंद करते हैं, क्‍योंकि हम जानते हैं कि उसके भीतर इंसानियत के गुण हैं और उसमें दिलचस्‍पी ली जा सकती है।

लेकिन इस फिल्‍म में हमें दिखाई देने वाला बॉक्सिंग चैम्पियन तो पूरी तरह बोर है। यह भूमिका जॉन अब्राहम ने निभाई है। चूंकि इंडस्‍ट्री में और भी चॉकलेटी चेहरे मौजूद हैं, लिहाजा उन्‍हें खुद को एक्‍शन फिल्‍मों या कॉमेडी तक ही सीमित रखना चाहिए, जैसा कि उनसे पहले सुनील शेट्टी ने किया था।

चित्रांगदा सिंह ने हीरो की गर्लफ्रेंड की भूमिका निभाई है और इस फिल्‍म में उनका मुंह न जाने क्‍यों हमेशा चढ़ा हुआ रहता है। प्राची देसाई ने दूसरी नायिका का रोल निभाया है और वे पूरी तरह बेअसर लगी हैं। इस तरह की फिल्‍मों में दर्शक आमतौर पर इस बात की रत्‍ती भर भी परवाह नहीं करते कि कौन किसके लिए क्‍या और क्‍यों महसूस करता है।

ऐसा लगता है कि यह फिल्‍म तभी पटरी से उतर गई थी, जब मुख्‍य भूमिकाओं के लिए इन कलाकारों को साइन किया गया था। लेकिन फिल्‍म की सबसे जबर्दस्‍त बात मुझे यह लगी कि बॉडी बिल्‍डर हीरो की गर्लफ्रेंड प्रेग्नेंट हो जाती है, जबकि उन दोनों का पहले ही ब्रेकअप हो चुका होता है। अच्‍छा!! ओह गॉड, अचानक मुझमें इस फिल्‍म के लिए दिलचस्‍पी जाग गई है!!

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