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मूवी रिव्यूः जोड़ी ब्रेकर्स

Dainik Bhaskar

Feb 24, 2012, 11:23 AM IST

बिपाशा-माधवन की जोरदार केमिस्ट्री से सजी है फिल्म।

movie review: Jodi Breakers
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इस सप्ताह दो फिल्में रिलीज हुई हैं, पहली 'जोड़ी ब्रेकर्स' और 'तेरे नाल लव हो गया'। दोनों ही फिल्मों की थीम लव स्टोरी है। हम यहां बात कर रहे हैं फिल्म 'जोड़ी ब्रेकर्स' की। 'जोड़ी ब्रेकर्स' की कहानी वाकई में दमदार है और लोगों को बांधे रखने में कामयाब रहती है। इंटरवल के पहले का सस्पेंस लोगों को रोलर कोस्टर की सवारी कराता है तो सेकंड हाफ बिल्कुल फिल्मी और फीका सा लगता है। यह फिल्म का माइनस पाइंट साबित हो सकता है।





'जोड़ी ब्रेकर्स' वास्तव में शादी तोड़वाने वाले सिड (आर माधवन) और सोनाली (बिपाशा बसु) की लव स्टोरी है। अपनी वाइफ से अलग होने के बाद से सिड को शादी पर कोई विश्वास नहीं रह जाता है। सोनाली से उसकी मुलाकात नैनो (ओमी वैद्य) के पब में होती है जो बाद में उसके जोड़ी ब्रेकर के बिजनेस में पार्टनर बन जाती है। दोनों मिलकर अपने बिजनेस को तब तक बहुत अच्छा चलाते हैं जब तक उनकी लाइफ में कुछ बदलाव नहीं आ जाते हैं। इस दौरान ही सिड के पास एक क्लाइंट आता है जो उसकी एक्स वाइफ से ताल्लुक रखता है। इसके बाद कैसे उनकी जिंदगी में अप एंड डाउन्स आते हैं और कैसे वे अपनी जिंदगी को सही राह पर लाते हैं, यही फिल्म का क्लाइमैक्स है।





स्टार कास्टः फिल्म में बिपाशा बसु और आर माधवन की जोड़ी बिल्कुल फ्रेश है और लोगों को इनके बीच की केमिस्ट्री बहुत पसंद आने वाली है। हालांकि मिलिंद सोमन अपने कैरेक्टर में नहीं उतर पाएं हैं। दीपानिता शर्मा की एक्टिंग में हर फिल्म के बाद सुधार हो रहा है और लगता है कि जब वे अपनी अंतिम फिल्म करेंगी तो एक्टिंग सीख जाएंगी। हेलेन ने अपने हिस्से में आया रोल बहुत उम्दा ढ़ंग से निभाया है। ओमी इस फिल्म में 3 इडियट्स के चतुर ही लगे हैं।





डायरेक्शनः डायरेक्टर अश्विनी चौधरी फिल्म गुड बॉय बैड बॉय के बाद जोड़ी ब्रेकर्स के रूप में एक बहुत ही जबरदस्त फिल्म लेकर आएं हैं। उन्होंने बहुत अच्छी कोशिश की है लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती जाती है वैसे-वैसे वे इसपर अपनी पकड़ खोते जाते हैं। फिल्म की एडिटिंग व सिनेमैटोग्राफी पर उनकी ढ़ीली पकड़ साफ नजर आती है।





म्यूजिक/डायलॉग्स/सिनेमैटोग्राफी/एडिटिंग: फिल्म का म्यूजिक ऐसा नहीं है जिसे याद रखा जा सके। डायलॉग्स जरूर दमदार हैं और कई जगह सिचुएशन के हिसाब से फिट बैठते हैं। कैमरा वर्क बहुत कमजोर है। फिल्म में इमोशनल सीन के साथ कैमरामैन तालमेल नहीं बिठा पाए। एडिटिंग कई जगह शॉकिंग हैं औऱ इसपर ज्यादा मेहनत किए जाने की जरूरत थी।





क्यों देखें:बिपाशा और माधवन की जबरदस्त केमिस्ट्री और परफॉर्मेंस के लिए एक बार फिल्म थियेटर का रूख किया जा सकता है।



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