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मूवी रिव्यू- एमएलए

Dainik Bhaskar

May 24, 2012, 01:54 PM IST

'पीपली लाइव' के 'नत्था' को एक बार फिर से पर्दे पर देखने के लिए इस फिल्म का टिकट ले सकते हैं।

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इस फिल्म की कहानी में कुछ भी नया नहीं है। दर्शक फिल्म देखते समय आसानी से यह बता सकते हैं कि आगे क्या होनेवाला है।

यह फिल्म मध्यप्रेदश के भागलीपुर गांव की कहानी कहती है। वहां उसी गांव का एक उद्योगपति कमल कुशवाह (चैतन्य नायडू) मिल्क फैक्टरी लगाकर लोगों को रोजगार देने की कोशिश करता है।

गांव के लोग कमल को बहुत मानते हैं और इसी को चुनाव में कैश करने के लिए वहां का एमएलए (मुकेश तिवारी) उससे दोस्ती बढ़ाता है। लेकिन, कमल को पता चलने के बाद एमएलए के साथ उसकी लड़ाई शुरू हो जाती है।





स्टोरी ट्रीटमेंट-फिल्म में एक ऐसे एमएलए का कैरेक्टर रचा गया है जो अपनी ताकत बढ़ाने के लिए किसी का भी खून कर सकता है। उसी तरह का एक स्टीरियोटाइप भ्रष्ट पुलिस अधिकारी है और एक ईमानदार बिजनेसमेन का कैरेक्टर बुना गया है। कई बार दुहराई जा चुकी कहानी का ट्रीटमेंट ठीकठाक है। लेकिन, ऐसी फिल्म में किसी रोमांच की गुंजाईश कम ही होती है।





स्टार कास्ट-मुकेश तिवारी क्रूर नेता के रोल में जमे हैं। पीपली लाइव के 'नत्था' ओंकारदास माणिकपुरी गांव के आदमी की याद दिलाते हैं। उन्होंने अपनी भूमिका बेहतर निभाई है।

चैतन्य नायडू बिजनेसमेन केके की भूमिका में बिल्कुल फिट नहीं दिखे हैं। पंकज त्रिपाठी ने सुखीराम के रोल में शानदार परफॉर्मेंस दिया है। कृष्ण श्रीवास्तव ने भी एक निर्दयी पुलिसवाले के रोल में प्रभावशाली एक्टिंग की है।





डायरेक्शन-शिव दुबे का डायरेक्शन बेहतर है। नया कुछ कहने को नहीं है, यही इस फिल्म की सबसे बड़ी कमी है। लेकिन, डायरेक्टर ने स्टार कास्ट से अच्छा काम करवाकर कुछ अच्छे सीन्स भी इस फिल्म में निकाले हैं।





डायलॉग्स/सिनेमेटोग्राफी/म्यूजिक-गांव की पृष्ठभूमि की राजनीति पर बनी इस फिल्म के डायलॉग बेहतर हैं। सिनेमेटोग्राफी और म्यूजिक साधारण हैं।





क्यूं देखें- 'पीपली लाइव' के 'नत्था' को एक बार फिर पर्दे पर देखने के लिए इस फिल्म का टिकट ले सकते हैं। फिल्म में कोई बड़ा स्टार कास्ट नहीं है फिर भी कुछ ऐसे मोमेंट्स हैं जो दर्शकों पर प्रभाव छोड़ते हैं।




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