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अद्भुत है अमेजिंग स्पाइडर मैन

फिल्म क्रिटिक मयंक शेखर

Jun 29, 2012, 07:42 PM IST

किसी भी अन्य सुपर-हीरो के लिए ऐसी दीवानगी नहीं होगी।

Movie review The Amazing Spider Man
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सबसे पहले सबसे अव्वल बात। इस मूवी के रिव्यूज़ से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। बहुत कम चीजें किसी लोकप्रिय सुपर-हीरो और उसके दर्शकों के बीच आ सकती हैं। बहुत-से दर्शक पहले ही इस इवेंट पिक्चर का मजा लेने का मन बना चुके होंगे। अमेरिकन स्टूडियो सोनी पिक्चर्स, जिसके पास इस फिल्म की फ्रेंचाइजी है, यह बात जानता है। वास्तव में सोनी पिक्चर्स ने इस बहुप्रचारित फिल्म को अमेरिका से भी पहले भारत में रिलीज किया है। फिल्म 3डी और 2डी दोनों में है। मैंने इसे 3डी में देखा, हालांकि मेरा ख्याल है कि इसे 2डी में देखना बेहतर होगा, क्योंकि तब स्क्रीन इतनी डार्क नहीं लगेगी और आपकी नाक भी ३डी फिल्म देखने के लिए जरूरी भारी चश्मों के बोझ से सलामत रहेगी। देशभर में इस फिल्म के एक हजार से अधिक प्रिंट वितरित किए गए हैं, जिससे यह भारत में सर्वाधिक प्रिंट्स में रिलीज होने वाली हॉलीवुड फिल्म बन गई है। कुछ प्रिंट्स को हिंदी, तमिल और तेलुगु में भी डब किया गया है। मैंने यह फिल्म हिंदी में देखी। ऐसा और कहां हो सकता था। यह भारतीयों के लिए एक अप्रतिम अनुभव है।





किसी भी अन्य सुपर-हीरो के लिए ऐसी दीवानगी नहीं होगी, जैसी स्पाइडर-मैन के लिए है। मेरा ख्याल है कि इस दीवानगी के लिए सोनी को दूरदर्शन का धन्यवाद अदा करना चाहिए। टेलीविजन के शुरुआती दिनों में, जब भारतीयों की एक समूची युवा पीढ़ी किसी भी किस्म के मनोरंजन से महरूम थी और उनका एकमात्र टीवी चैनल खेती-किसानी और उर्वरकों से जुड़े कार्यक्रम दिखाया करता था, तब मेरी उम्र के बच्चे हर रविवार सुबह अपने प्यारे साथी स्पाइडर मैन को देखने के लिए उत्सुकता से तैयार रहते थे। तब अंकल चिप्स हमारा पसंदीदा स्नैक और मैगी हमारा पसंदीदा नाश्ता हुआ करता था। स्पाइडर मैन हमारा लोकल, नेशनल सुपर-हीरो था। चूंकि हम स्पाइडर मैन के साथ ही पले-बढ़े, इसलिए हम उसके चरित्र से खुद को अच्छी तरह जोड़ सकते हैं।





इस फिल्म का शीर्षक है : द अमेजिंग स्पाइडर मैन। लेकिन वास्तव में यह पीटर पार्कर की कहानी है। हम देखते हैं कि किस तरह युवा पीटर स्पाइडर मैन बन गया था। अन्य सुपर-हीरो का जन्म ही अद्भुत चमत्कारी शक्तियों के साथ होता है, लेकिन इसके विपरीत स्पाइडर मैन एक सामान्य व्यक्ति है और इस फिल्म में दिखाई गई उसकी कहानी से भी यही जाहिर होता है। वह अपनी पहचान छुपाने के लिए ही मास्क पहनता है। पीटर पार्कर (एंड्रयू गारफील्ड ने यह भूमिका अच्छे-से निभाई है, अलबत्ता इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता कि किसी सुपर-हीरो फिल्म में हीरो की भूमिका कौन निभा रहा है) एक शीर्ष वैज्ञानिक का बेटा है, जिसने जेनेटिक ट्रांसप्लांटेशन में गहरी रिसर्च की है। उसके पिता अब नहीं हैं। जब वे जीवित थे, तब उनकी थ्योरीज का श्रेय उन्हें नहीं मिला था। पीटर की परवरिश उसके अंकल (मार्टिन शीन) और आंटी (सैली फील्ड) ने की है। हम जानते हैं कि पीटर डेली बगल नामक एक अखबार का फोटो-जर्नलिस्ट हुआ करता था। लेकिन इस फिल्म में उसकी आयु महज 17 वर्ष है और वह एक कॉलेज छात्र है। तब इस फिल्म का एक बड़ा हिस्सा उस शर्मीले खामोश किशोर से जुड़ा एक ह्यूमन ड्रामा बन जाता है, जो लड़कियों में ज्यादा लोकप्रिय नहीं है और जिसके संगी-साथी उसका मजाक उड़ाया करते हैं।






एक विशालकाय जेनेटिक लैब में किसी स्पाइडर द्वारा काट लिए जाने के बाद पीटर शक्तिमान बन जाता है। अब वह स्पाइडर की ही तरह अपने इर्द-गिर्द जाल बुन सकता है और परिंदों की तरह उड़ान भर सकता है। धीरे-धीरे पीटर स्पाइडर मैन बनता जाता है। वह अपने लिए सही पोशाक का चयन करता है और अपनी तेजतर्रार गति पर नियंत्रण करना भी सीख जाता है। लेकिन वह अब भी हमारे ही बीच का एक इंसान है। उसके दिल को भी ठेस पहुंचती है। हम अभी तक नहीं जानते कि उसकी ताकत कितनी है। चूंकि वह एक मनुष्य है, इसलिए क्या वह गोलियों की बौछार से सुरक्षित बच सकता है? निश्चित ही वह गोलियों से बच जाता है, लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिए था, है ना? केवल पीटर की गर्लफ्रेंड ग्वेन (एमा स्टोन) को ही यह राज पता है कि वह एक स्पाइडर मैन है। ग्वेन के लिए पीटर उसका अल्टीमेट रोमैंटिक हीरो है, न्यूयॉर्क सिटी के लिए पीटर एक क्राइम फाइटर है, जिसका मकसद गुंडों को ठिकाने लगाना है, पुलिसवालों के लिए स्पाइडर मैन सिरदर्द है, लेकिन हमारे लिए, वह हमारा सबसे प्यारा सुपर-हीरो है।





कई साल पहले निर्देशक शेखर कपूर ने अपनी सुविख्यात भविष्यवाणी में कहा था कि एशियाई उपभोक्तावाद के उदय के कारण वर्ष 2015 तक, जब सभी फिल्मों का 75 प्रतिशत राजस्व एशिया से जनरेट होगा, ‘तब भी हॉलीवुड स्पाइडर मैन किस्म की फिल्में बनाता रहेगा, हालांकि जब स्पाइडर मैन अपने चेहरे से नकाब हटाएगा तो हम पाएंगे कि वह कोई चीनी या भारतीय है।’ खैर, अभी तक तो ऐसा हुआ नहीं है, लेकिन कम से कम एक भारतीय अभिनेता इस फिल्म का हिस्सा जरूर है। फिल्म में इरफान खान के होंठ सामान्य से अधिक सुर्ख नजर आए हैं और उन्होंने रजित की भूमिका निभाई है, जो कि एक प्रतिष्ठित रिसर्च लैब के लिए पैसों का स्रोत है। इरफान निश्चित ही भारत के सर्वश्रेष्ठ एक्टिंग एक्सपोर्ट हैं। उन्हें एक मेनस्ट्रीम अमेरिका फिल्म में देखना मन को भला लगता है।





रजित के कर्मचारियों में से एक वैज्ञानिक जेनेटिक ट्रांसप्लांटिक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। जहां-जहां सुपर-हीरो होगा, वहां उसका कोई जानी दुश्मन भी होगा ही। यह दुष्ट वैज्ञानिक एक ग्रीन लिजार्ड का रूप धर लेता है, लेकिन फिल्म में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर वह दुनिया का खात्मा क्यों कर देना चाहता है। यह चरित्र अविश्वसनीय है और चूंकि वह मुख्य खलनायक है, इसलिए उसकी यह अविश्वसनीयता दुखदायी है? लेकिन क्या वाकई आपको इस बात की फिक्र होगी? जी नहीं। क्या इसके बावजूद आप यह फिल्म देखना और इसका मजा लेना चाहेंगे? जी हां। मैंने भी ऐसा ही किया। यह फिल्म एक मजेदार सैर की तरह है। और मैंने फिल्म खत्म होने के बाद खुद को फिल्म शुरू होने की तुलना में अधिक खुश पाया। आखिर हमें इसी खुशी की तो सबसे अधिक फिक्र करनी चाहिए।




(मयंक शेखर जाने-माने फिल्म समीक्षक हैं, वे www.dainikbhaskar.comसे जुड़े हैं)








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