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मूवी रिव्यूः जिंदगी तेरे नाम

इसमें सिद्धार्थ, अल्जाइमर रोग से पीड़ित अपनी पत्नी अंजलि की देखभाल में निस्वार्थ भाव से लगा रहता है।

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2012, 10:42 AM IST

'जिंदगी तेरे नाम' 1975 की कहानी है। इसमें सिद्धार्थ, अल्जाइमर रोग से पीड़ित अपनी पत्नी अंजलि की देखभाल में निस्वार्थ भाव से लगा रहता है। वह उससे बहुत प्रेम करता है। अंजलि अपनी याददाश्त खो चुकी है और उसके ठीक होने का कोई आसार नहीं है। लेकिन, सिद्धार्थ आशा नहीं खोता और पुराने दिनों को वापस लाने की कोशिशों में लगा रहता है। यह करने के लिए वह अपनी पत्नी को प्रेम कहानी सुनाता रहता है, जिसे अंजलि ने ही लिखा है। क्या अंजलि कभी ठीक हो पाएगी या कम से कम अपने पति को फिर से पहचान पाएगी? यही इस फिल्म की कहानी है।









स्टोरी ट्रीटमेंटःनिक कैसेवेट्स निर्देशित हॉलीवुड फिल्म 'नोटबुक' से प्रेरित होकर 'जिंदगी तेरे नाम' बनाई गई है। बॉलीवुड में बनी यह दूसरी फिल्म है जो 'नोटबुक' से प्रेरित है। इससे पहले अजय देवगन निर्देशित फिल्म 'यू मी और हम' भी इसी से प्रेरित होकर बनाई गई थी। लेकिन वह फिल्म अपने स्क्रीनप्ले और निर्देशन से दर्शकों को बांधने में सफल रही थी। लेकिन 'जिंदगी तेरे नाम' ठीक इसके उलट है। इसका स्क्रीनप्ले और निर्देशन कमजोर है।









स्टार कास्टःमिथुन चक्रवर्ती ने इस सुस्त ड्रामा में बहुत बढ़िया प्रदर्शन किया है। अंजलि जब एक बार अपने पति के रूप में सिद्धार्थ को पहचानती है, उस दृश्य में मिथुन की एक्टिंग काबिले-तारीफ है। रंजीता ने भी सुंदर बीवी होने के बाद असहाय रोगी की भूमिका बेहतरीन ढ़ंग से किया है। असीम अली खान ने नौजवान सिद्धार्थ के रूप में और प्रियंका मेहता ने अच्छी एक्टिंग की है लेकिन अभी उनमें सुधार की जरूरत है। दिलीप ताहिल और सुप्रिया कार्णिक ने अंजलि के मां-बाप के रूप में बेहतर भूमिकाएं निभाईं हैं। शरत सक्सेना सिद्धार्थ के पिता के रूप में साधारण रहे। हिमानी शिवपुरी अपनी छोटी सी भूमिका ठीक से नहीं कर पाईं।









निर्देशनःआशु त्रिखा ने बहुत खराब ढंग से निक कैसेवेट्स की फिल्म की नकल करने की कोशिश की है। उन्हें इसके लिए माफ नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने अब तक तीन फिल्मों का निर्देशन किया है। निर्देशक पर तब और तरस आता है जब 1975 के समय की कहानी में वह होंडा सिटी कार का उपयोग करते हैं और रंजीता अतिआधुनिक कपड़े पहनती है। इस फिल्म का क्लाईमेक्स बेहतर है, जिसमें रंजीता और मिथुन के बीच गजब की इमोशनल केमेस्ट्री दिखाई गई है।









क्यूं देखें:-मिथुन चक्रवर्ती और रंजीता की एक्टिंग और सिनेमेटोग्राफी इस सिनेमा के मजबूत पक्ष हैं।



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