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शूटिंग के दौरान हुई थी धर्मेंद्र के इस 'भाई' की हत्या, पॉपुलैरिटी बनी थी दुश्मन

वीरेंद्र सिंह देओल थे तो धर्मेंद्र के कजिन, लेकिन 80 के दशक में वे धरम से भी बड़े स्टार हुआ करते थे।

Danik Bhaskar | Dec 08, 2017, 10:57 AM IST
धर्मेंद्र और वीरेंद्र। धर्मेंद्र और वीरेंद्र।

मुंबई. वीरेंद्र सिंह देओल थे तो धर्मेंद्र के कजिन, लेकिन 80 के दशक में वे धरम से भी बड़े स्टार हुआ करते थे। पंजाबी सिनेमा में वीरेंद्र का नाम इतना फेमस हो चुका था कि हर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता था। लेकिन कौन जानता था कि एक दिन फिल्म के सेट पर ही इस एक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी जाएगी। उस रोज फिल्म 'जट ते जमीन' की शूटिंग कर रहे थे वीरेंद्र...

- बात 6 दिसंबर 1988 की है। उस रोज वीरेंद्र फिल्म 'जट ते जमीन' की शूटिंग कर रहे थे।
- तभी अचानक किसी ने गोली मारकर उनकी जान ले ली। वीरेंद्र की हत्या किसने की या करवाई? आज तक इस बात पर संशय बना हुआ है।
- लेकिन कहा जाता है कि वीरेंद्र सिंह की पॉपुलैरिटी ही उनकी दुश्मन बन बैठी थी और कुछ उन्हें आतंकियों ने गोली मारी थी।
- निधन के वक्त वीरेंद्र की उम्र 40 साल थी।

1975 में आई थी वीरेंद्र की पहली फिल्म

- वीरेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत 1975 में आई फिल्म 'तेरी मेरी एक जिंदड़ी' से की थी। इस फिल्म में उनके साथ धर्मेंद्र ने भी अहम भूमिका निभाई थी।
- फिल्म हिट साबित हुई और वीरेंद्र का करियर चल निकला। इसके बाद उन्होंने 'धरम जीत' (1975), 'कुंवारा मामा' (1979), 'जट शूरमे' (1983), 'रांझा मेरा यार' (1984) और 'वैरी जट' (198) जैसी 25 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
- एक्टर होने के साथ-साथ वे राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी थे।

आगे की 3 स्लाइड्स में पढ़ें वीरेंद्र की लाइफ से जुड़ी खास बातें...

पत्नी दीप्ति भटनागर के साथ रणदीप आर्य। पत्नी दीप्ति भटनागर के साथ रणदीप आर्य।

दो बेटों के पिता थे वीरेंद्र

 

- वीरेंद्र की पत्नी का नाम पम्मी कौर है। जब वीरेंद्र की मौत हुई, तब वे दो बेटों रणदीप और रमनदीप के पिता थे। वीरेंद्र की एक बेटी होने का दावा भी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में किया जाता है। हालांकि, इसकी कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है।
- वीरेंद्र और उनके कजिन अजीत सिंह देओल (अभय देओल के पिता) ने एक ही दिन एक ही मंडप में दो सगी बहनों से शादी की थी। वीरेंद्र ने पम्मी और अजीत ने ऊषा से शादी की थी। 
- फेमस धार्मिक शो 'यात्रा' की होस्ट के रूप में नजर आ चुकीं दीप्ति भटनागर वीरेंद्र सिंह की बहू हैं। उन्होंने वीरेंद्र के बड़े बेटे रणदीप से शादी की है।

रणदीप आर्य फिल्म 'डल्ला भट्टी' के पोस्टर में। रणदीप आर्य फिल्म 'डल्ला भट्टी' के पोस्टर में।

बेटे भी फिल्मों में एक्टिंग

 

- वीरेंद्र के बेटे रणदीप आर्य और रमनदीप आर्य भी फिल्मों में एक्टिव हैं। रणदीप ने जहां 'कभी आए न जुदाई' (2003), 'कैदी' (2002), 'मुसाफिर हूं यारो' (2001 ) जैसी फिल्मों में काम किया है। वहीं, उनके छोटे भाई रमनदीप फिल्मों के लिए स्ट्रगल कर रहे हैं। रमन 2012 में आई फिल्म 'चालीस चौरासी' में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर चुके हैं। 
- वीरेंद्र की पत्नी पम्मी ने बेटे रणदीप की पंजाबी फिल्म 'डल्ला भट्टी' (1998) को डायरेक्ट किया था।

'दो चेहरे' के पोस्टर में धर्मेंद्र, वीरेंद्र और अरुणा ईरानी। 'दो चेहरे' के पोस्टर में धर्मेंद्र, वीरेंद्र और अरुणा ईरानी।

वीरेंद्र ने हिंदी में भी दीं दो सक्सेसफुल फिल्में

 

- वीरेंद्र ने पंजाबी ही नहीं, हिंदी सिनेमा में दो फिल्में 'दो चेहरे' (1977) और 'खेल मुकद्दर का' (1981) की थीं। ये दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सक्सेसफुल रही थीं। इनमें से 'दो चेहरे' में वे धर्मेंद्र के को-एक्टर थे। जबकि 'खेल मुकद्दर का' को उन्होंने डायरेक्ट किया था। 
- मौत के करीब दो साल बाद यानी 1990 में वीरेंद्र की आखिरी फिल्म 'दुश्मनी दी आग' रिलीज हुई थी, जो पंजाबी में बनी थी।