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जब अमिताभ की जगह खुद मरने को तैयार हो गए राजेश खन्ना

पहला किस्सा है फिल्म नमक हराम का साल 1973 आनंद के बाद अमिताभ और राजेश खन्ना की किस्मत दो बार टकराई थी।

Danik Bhaskar | Dec 29, 2017, 12:48 PM IST

बॉलीवुड डेस्क. आज गुजरे जमाने के मशहूर एक्टर राजेश खन्ना का जन्मदिन है। आइए जानते हैं उनकी जिंदगी के तीन अहम किस्से। पहला किस्सा है फिल्म नमक हराम का...साल 1973...अानंद के बाद अमिताभ और राजेश खन्ना की किस्मत दो बार टकराई थी..फिल्म नमक हराम में आनंद के बाद दो बार और अमिताभ और राजेश खन्ना की किस्मत टकराई. ऋषि दा की फिल्म नमक हराम में राजेश को रईस मिल मालिक के बेटे विकी का रोल ऑफर किया गया था. गरीब दोस्त सोमू को आखिर में मरना था. यह जान राजेश ने सोचा कि उन्हें वह रोल करना चाहिए, जिसे जनता की सहानुभूति मिले. वह सोमू के रोल में आ गए और अमिताभ को विकी का रोल ऑफर कर दिया गया.

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यश चोपड़ा दीवार फिल्म राजेश खन्ना के साथ बनाना चाहते थे. राजेश बनते विजय तो उनके छोटे भाई रवि का रोल करते नवीन निश्चल. मगर फिल्म के राइटर सलीम जावेद ने विजय के रूप में अमिताभ बच्चन को सोच रखा था. उसके बाद जो हुआ, वह इतिहास है. इसका उलटा हुआ दसेक बरस के बाद. जब डायरेक्टर मोहन कुमार ने फिल्म अवतार में अमिताभ बच्चन का नाम फाइनल करने के बाद राजेश खन्ना को लिया और फिल्म सुपरहिट हो गई.

 

ऐसी ही एक फिसलन राज कपूर के साथ भी हुई. राजेश खन्ना उन्हें बहुत मानते थे. राज साहब सत्यम शिवम सुंदरम में राजेश खन्ना को फाइनल कर चुके थे. मगर कपूर के बेटे अड़ गए. ऐसे में राजेश खन्ना के जन्मदिन के रोज पार्टी शुरू करने से कई घंटे पहले राज गुलदस्ता लेकर पहुंचे और बोले, काका मैं बच्चों के सामने हार गया.