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मौत के बाद रिलीज हुई थी इस एक्टर की 10 फिल्में, इस वजह से नहीं की शादी

गुजरे जमाने के एक्टर संजीव कुमार की आज 32वीं डेथ एनिवर्सरी हैं। मौत के बाद संजीव की 10 फिल्में रिलीज हुई।

Danik Bhaskar | Nov 05, 2017, 06:46 PM IST
संजीव कुमार हेमा मालिनी और सुलक्षणा पंडित के साथ। संजीव कुमार हेमा मालिनी और सुलक्षणा पंडित के साथ।
गुजरे जमाने के एक्टर संजीव कुमार की आज 32वीं डेथ एनिवर्सरी है। 6 नवंबर, 1985 को 47 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। संजीव ने अपने फिल्मी करियर में कई सुपरहिट फिल्मों में अभिनय किया। मौत के बाद संजीव की 10 फिल्में रिलीज हुईं। बता दें कि संजीव ने सिर्फ इसलिए शादी नहीं की थी, क्योंकि उन्हें हार्ट की बीमारी थी। उनके परिवार में ज्यादातर मेंबर की मौत लगभग 50 साल की उम्र में हुई। हेमा मालिनी के प्यार में पागल थे संजीव...

खबरों की मानें तो संजीव कुमार को हेमा मालिनी से मुहब्बत थी। उन्होंने हेमा के घर शादी का प्रस्ताव भी भिजवाया था, लेकिन हेमा ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया था, क्योंकि वे धर्मेंद्र को चाहती थीं। वहीं, सुलक्षणा संजीव कुमार से बेइंतहा प्यार करती थीं। लेकिन संजीव के दिलोदिमाग पर तो हेमा मालिनी छाई हुई थीं। उन्होंने सुलक्षणा के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। सुलक्षणा ने संजीव कुमार को बहुत मनाया था कि वे उससे शादी कर लें। लेकिन ऐसा नहीं हो सका और अचानक संजीव कुमार की मौत हो गई।
संजीव की मौत के बाद ये फिल्में हुई थीं रिलीज
संजीव कुमार की मौत के बाद 10 फिल्में रिलीज हुई थीं। इनमें से अधिकांश फिल्मों की शूटिंग बाकी रह गई थी। कहानी में फेरबदल कर इन्हें प्रदर्शित किया गया था। 1993 में उनकी अंतिम फिल्म 'प्रोफेसर की पड़ोसन' प्रदर्शित हुई। इसके अलावा 'कातिल' (1986), 'हाथों की लकीरें' (1986), 'बात बन जाए' (1986), 'कांच की दीवार' (1986), 'लव एंड गॉड' (1986), 'राही' (1986), 'दो वक्त की रोटी' (1988), 'नामुमकिन' (1988), 'ऊंच नीच बीच (1989) फिल्में उनकी मौत के बाद रिलीज हुई थीं।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें संजीव कुमार से जुड़ी कुछ और बातें...
संजीव कुमार और नूतन। संजीव कुमार और नूतन।
नूतन ने मारा था थप्पड़
एक बार नूतन ने संजीव कुमार को थप्पड़ मार दिया था। दोनों फिल्म 'देवी' (1970) में साथ काम कर रहे थे। इसी दौरान नूतन और संजीव के बीच रोमांस की खबरें फैल रही थीं, जिससे नूतन की मैरिड लाइफ में प्रॉब्लम होने लगी थी। नूतन को लगा कि संजीव इस तरह की बातें फैला रहे हैं। लिहाजा, आमना-सामना होने पर उन्होंने संजीव को थप्पड़ मार दिया था।
 
फिल्म त्रिशूल के एक सीन में संजीव कुमार और अमिताभ बच्चन। फिल्म त्रिशूल के एक सीन में संजीव कुमार और अमिताभ बच्चन।
फैमिली में 50 साल से ज्यादा नहीं जी पाया कोई
संजीव कुमार की फैमिली में कोई भी आदमी 50 साल से ज्यादा नहीं जी पाया। संजीव को भी हमेशा महसूस होता था कि वे ज्यादा नहीं जी पाएंगे। उनके छोटे भाई नकुल की मौत संजीव के पहले हो गई थी। ठीक 6 महीने बाद बड़े भाई किशोर भी नहीं रहे थे। संजीव कुमार ने भी 47 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया था।
 
फिल्म शोले में धर्मेन्द्र और अमिताभ बच्चन के साथ संजीव कुमार। फिल्म शोले में धर्मेन्द्र और अमिताभ बच्चन के साथ संजीव कुमार।
धर्मेन्द्र चाहते थे ठाकुर का रोल
फिल्म 'शोले' में संजीव कुमार ने ठाकुर का रोल निभाया था। यह रोल धर्मेन्द्र करना चाहते थे। डायरेक्टर रमेश सिप्पी उलझन में पड़ गए। उस समय धर्मेन्द्र और संजीव कुमार, दोनों ही हेमा मालिनी के दीवाने थे। सिप्पी ने धर्मेन्द्र से कहा कि उन्हें वीरू का रोल निभाते हुए ज्यादा से ज्यादा हेमा के साथ रोमांस करने का मौका मिलेगा। यदि ठाकुर बनेंगे तो संजीव कुमार को वीरू का रोल दे दिया जाएगा। ट्रिक काम कर गई और धर्मेन्द्र ने जिद छोड़ दी। ठाकुर के रोल के कारण संजीव कुमार को आज तक याद किया जाता है।
 
फिल्म अंगूर में देवेन वर्मा और संजीव कुमार। फिल्म अंगूर में देवेन वर्मा और संजीव कुमार।
'हम हिंदुस्तानी' से किया था डेब्यू
9 जुलाई, 1938 को जन्मे संजीव कुमार का वास्तविक नाम हरीभाई जरीवाला है। उनकी पहली फिल्म 'हम हिंदुस्तानी' (1960) थी। उन्होंने कई फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 'निशान' (1965), 'बादल' (1966), 'शिखर' (1968), 'अनोखी रात' (1968), 'दस्तक' (1970), 'मन मंदिर' (1971), 'कोशिश' (1972), 'मनचली' (1973), 'अनामिका' (1973), 'आप की कसम' (1974), 'उलझन' (1975), 'पापी' (1977), 'त्रिशूल' (1978), 'नौकर' (1979) सहित कई फिल्मों में काम किया।