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जब जॉनी वाकर ने शकील बदायूंनी से यूं लिया था बदला

जॉनी वाकर की आज 87वीं बर्थ एनिवर्सरी (11 नवंबर) है। आपको उनसे जुड़ा एक किस्सा बताने जा रहे हैं।

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2017, 11:50 AM IST
जॉनी वाकर। जॉनी वाकर।
पहले का जमाना सच में बहुत अलग था... सुपर स्टार यदि अपने सह-कलाकारों संग दोस्ताना व्यवहार रखते थे तो फिल्मों से जुड़े दूसरे लोगों के साथ कैरेक्टर आर्टिस्ट का भी अंदाज बड़ा मजाकिया होता था! इसकी मिसाल अभिनेता जॉनी वाकर और गीतकार शकील बदायूंनी के इस यादगार सफर से मिलती है। इस सफर के दौरान शकील बदायूंनी ने स्टेशन पर खड़े कुछ स्टूडेंट्स को भड़का दिया और वे जॉनी वकर से मिलने की जिद्द में ट्रेन में घुसने की कोशिश करने लगे। हालांकि, ये स्टूडेंट्स उनसे मिल नहीं पाए, क्योंकि उन्होंने खुद को बोगी के बाथरूम में बंद कर लिया था। इसके बाद जॉनी वॉकर ने शकील बदायूंनी से इस मजाक का बदला देले की ठानी। बता दें कि जॉनी वाकर की आज 87वीं बर्थ एनिवर्सरी (11 नवंबर) है। कुछ ऐसा है पूरा किस्सा...

किसी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में जॉनी वाकर जब ट्रेन से चेन्नई जा रहे थे, तब उन्हें रास्ते में पता चला कि उसी कंपार्टमेंट में उर्दू के प्रख्यात शायर खुमार बाराबंकवी और गीतकार शकील बदायूंनी भी हैं... एक मुशायरे में शामिल होने के लिए वे हैदराबाद जा रहे थे। फिर जॉनी और शकील ने आंखों ही आंखों में जाने कौन-सी योजना बना डाली कि शकील साहब एक स्टेशन पर उतरकर चहलकदमी करने लगे। इसके बाद प्लेटफॉर्म पर मौजूद विद्यार्थियों के एक झुंड से उन्होंने बड़ी संजीदगी के साथ कहा- अजीब है... इस सामने वाले डिब्बे में मशहूर एक्टर जॉनी वाकर बैठे हुए हैं, मगर आप साहेबान को भनक तक नहीं है! वैसे आप जैसे युवाओं से मिलकर उन्हें बेइंतहा खुशी होती... फिर क्यों नहीं, आप सभी उनसे जाकर मुलाकात करते हैं?' इतना सुनते ही उस भीड़ ने जॉनी साहब की बोगी घेर ली... यहां तक कि जबर्दस्ती घुसने के चक्कर में उन सिरफिरों ने दरवाजे-खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए, साथ ही अन्य यात्रियों के सामान वगैरह को भी तितर-बितर कर दिया! लेकिन यह क्या, जॉनी तो उस मौके पर वहां थे ही नहीं।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें इस किस्से से जुड़ी कुछ और बातें...
जॉनी वाकर। जॉनी वाकर।
जॉनी की अप्रत्याशित गैर-मौजूदगी से शकील साहब काफी चिंतित थे, किंतु ट्रेन के चलते ही निराश प्रशंसक जब डिब्बे से नीचे उतर गए तो बाथरूम में घुसे जॉनी भाई ने बाहर आकर शकील जी को चौंका दिया। यह बात और है कि अब बारी जॉनी की थी... अगला स्टेशन आने से पहले ही वे कवियों एवं शायरों की उस टोली के पास जा पहुंचे, जो बड़े इत्मीनान के साथ ताश खेलने में मशगूल थी। बेशक, अपने साथ जॉनी भाई को सफर करते पाकर उन सबकी हैरानगी देखने लायक थी। खैर, ट्रेन अपनी रफ्तार में थी तो उनकी बातचीत भी... इसी दौरान शकील साहब जब हाथ-मुंह धोने के इरादे से बाथरूम में गए, दूसरा स्टेशन आ गया। जॉनी के लिए यही अच्छा अवसर था, लिहाजा उन्होंने प्लेटफॉर्म पर उतर कर फौरन प्रशंसकों की भीड़ जुटा ली...।
 
जॉनी वाकर। जॉनी वाकर।
जॉनी ने प्रशंसकों को यह बताते हुए सवाल भी पूछ लिया- मुकरी साहब भी तो हैं मेरे साथ। आप लोग उनसे नहीं मिलेंगे? अब भीड़ जब उत्सुकता दिखा रही थी- 'कहां? किस जगह?', जॉनी ने बड़ी मासूमियत से बताया- उस बाथरूम में... वे लोगों से भेंट करने में डरते हैं न, इसीलिए वहां छिप गए हैं! वैसे तुम सबों की तारीफ क्या, जो उन्हें बाहर न निकाल पाए!!' बस, जॉनी की यह चुनौती सुनते ही मजमा उस बाथरूम को तोड़ने पर आमादा हो गया... शकील साहब परेशान- 'आखिर यह क्या हादसा हो गया?' कि तभी उनके कानों ने एक परिचित आवाज सुनी- 'मुकरी साहब, बाहर तशरीफ लाइए न... ये मेहरबान आपके दर्शन करना चाहते हैं!' यह जॉनी वाकर की आवाज थी। लेकिन उस समय बाहर निकलना मानो जान-बूझकर मुसीबत को न्यौता देना था, लिहाजा गाड़ी जब रेंगने लगी और तय हो गया कि भीड़ छंट चुकी है, शकील ने सीट के पास आकर जॉनी साहब को देखा... वे बेफिक्री के अंदाज में शकील साहब द्वारा पहले से ऑर्डर की गई चाय की चुस्की लेने में मस्त थे!
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जॉनी वाकर।जॉनी वाकर।
जॉनी वाकर।जॉनी वाकर।
जॉनी वाकर।जॉनी वाकर।
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