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इस छोटी सी डिवाइस के जरिए कोई भी आपका बैंक अकाउंट कर सकता है खाली, ऐसे बचें

Dainik Bhaskar

Apr 20, 2018, 09:24 PM IST

एक छोटी-सी डिवाइस आपके बैंक अकाउंट में जमा पैसा मिनटों में खाली कर सकती है।

All You Need to Know About Credit Card Fraud

गैजेट डेस्क। एक छोटी-सी डिवाइस आपके बैंक अकाउंट में जमा पैसा मिनटों में खाली कर सकती है। दरअसल इस डिवाइस (स्कीमर/ कॉल रिकॉर्डर) के जरिए कार्ड की पूरी इंफॉर्मेशन मिनटों में चुरा ली जाती है। सायबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने बताया कि कार्ड के पीछे जो काले कलर की मैग्नेटिक स्ट्रिप होती है, उसमें कार्ड की पूरी कॉन्फिडेंशियल डिटेल छुपी होती है। स्कीमर के जरिए यही इंफॉर्मेशन डिवाइस में आ जाती है। यह डिवाइस में एक बार में 50 से 60 कार्ड की डिटेल चुरा सकती है।

कैसे होती है चोरी


डिवाइस में इंफॉर्मेशन आने के बाद डुप्लीकेट कार्ड तैयार किया जाता है। यह कार्ड बहुत ही आसानी से तैयार हो जाता है। इसका मटेरियल ऑनलाइन अवेलेबल है। डिवाइस में जो चोरी की इंफॉर्मेशन स्टोर होती है, वो इस कार्ड में पेस्ट कर दी जाती है। इसके बाद इसे यूज करके पैसा निकाल लिया जाता है। इसमें आपके पास आपका कार्ड है और किसी ने उसका क्लोन तैयार कर लिया है तो उसे आपके कार्ड की जरूरत नहीं। वे बिना कार्ड के ही आपके अकाउंट से पैसा निकाल सकता है।

कैसे बचें


> कभी भी अपना डेबिट या क्रेडिट कार्ड किसी दूसरे के हाथ में न दें।


> अक्सर लोग वेटर, पेट्रोल पंपकर्मी या कहीं शॉपिंग करते वक्त अपना कार्ड दे देते हैं, जबकि आपको खुद ही मशीन लेकर कार्ड स्वाइप करना चाहिए।

> यदि आप खुद कार्ड स्वाइप नहीं पा रहे तो इसे अपनी आंखों के सामने ही स्वाइप करवाएं।

> कई कंपनियों ने कार्ड को एक्टिव और डी-एक्टिव करने की सुविधा दे रखी है, ऐसे में यदि आप कार्ड का यूज नहीं कर रहे तो उसे डीएक्टिव मोड पर डाल दें।

ऐसा होने पर आप तुरंत क्या कर सकते हैं

> आरबीआई की नई गाइडलाइन के मुताबिक, यदि बैंक की गलती से कस्टमर के साथ किसी भी तरह की जालसाजी होती है तो ग्राहक इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा।

> ऐसा होने पर ग्राहक की कोई जवाबदेही नहीं होगी। फिर इस बात से भी फर्क नहीं पड़ता कि संबंधित व्यक्ति ने मामले की रिपोर्ट की है या नहीं।

> यदि कोई थर्ड पार्टी जालसाजी का मामला होता है, जिसमें न ही बैंक की कोई गलती है और न ही ग्राहक की और ग्राहक बैंक से अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन का कम्यूनिकेशन प्राप्त होने के तीन दिन के अंदर इस बारे में अपने बैंक को सूचित करता है तब भी ग्राहक की कोई जवाबदेही नहीं होगी।

> 7 वर्किंग डे में यदि कस्टमर बैंक को सूचित नहीं करता है तो फिर बैंक अपने बोर्ड द्वारा अप्रूवड पॉलिसी के आधार पर संबंधित कस्टमर को पे करता है। कस्टमर अपने बैंक से पॉलिसी मांग सकते हैं। आरबीआई ने बैंकों को भी अपनी अप्रूवड पॉलिसी डिस्प्ले करने के आदेश दिए हैं।

> यदि कस्टमर की खुद की गलती से कोई अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन होता है तो इसकी जिम्मेदार कस्टमर की ही होती है। कई बार कस्टमर अपनी पेमेंट डिटेल शेयर कर देते हैं।

> यदि बैंक को इस बारे में सूचित नहीं किया जाता तो संबंधित ग्राहक को ही पूरा नुकसान उठाना पड़ता है।

पैसा सुरक्षित रखने के लिए ये काम जरूर करें, देखिए अगली स्लाइड्स में....

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