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इंडियन सिनेमा की पहली बैन फिल्म: विदुर को गांधी बताकर लगा दी थी रोक

क्या आप जानते हैं कि फिल्मों के विरोध का यह सिलिसिला तब से चला आ रहा है, जब फिल्में मूक हुआ करती थीं।

Danik Bhaskar | Feb 07, 2018, 12:18 PM IST
इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह फोटो फिल्म 'भक्त विदुर' के दौरान की ही है। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह फोटो फिल्म 'भक्त विदुर' के दौरान की ही है।

मुंबई . 'पद्मावत' के बाद अब मणिकर्णिका का विरोध शुरू हो गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्मों के विरोध का यह सिलिसिला तब से चला आ रहा है, जब फिल्में मूक हुआ करती थीं। उस दौर में एक ऐसी भी मूवी आई थी, जिसे सिनेमाघरों में बैन कर दिया गया था। यह भारतीय सिनेमा के इतिहास की पहली बैन फिल्म कही जाती है। हम बात कर रहे हैं 1921 में आई फिल्म 'भक्त विदुर' की। आखिर क्या थी इस फिल्म के बैन की वजह...

- फिल्म में कृष्ण भक्त विदुर को महात्मा गांधी की तरह दिखाया गया था। विदुर का रोल करने वाले द्वारकादास नानानदास संपत ने फिल्म के लिए गांधीजी जैसा ही कॉस्टयूम पहना था और खुद को उनकी तरह ही दिखाने की कोशिश की थी।
- इस वजह से ब्रिटिश सरकार को लगा कि यह लोगों में उनके प्रति असंतोष पैदा कर सकती है।
- सेंसर बोर्ड ने उस वक्त यह कहकर फिल्म को बैन कर दिया था, "हम जानते हैंकि आप क्या कर रहे हैं। ये विदुर नहीं, गांधीजी हैं। हम इसे रिलीज की अनुमति नहीं दे सकते।"

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, क्या थी फिल्म की कहानी...

क्या थी फिल्म की कहानी

 

- फिल्म की कहानी महाभारत पर बेस्ड  थी, जो पांडवों और कौरवों के बीच टकराव को दिखाती है। विदुर, जो कि धृतराष्ट्र और पांडू के सौतेले भाई थे, इस फिल्म के अहम किरदार थे। विदुर को कई बार पांडवों के प्रति सहानुभूति रखते दिखाया गया था। 
- विदुर पांडवों के प्रति संवेदना रखते थे और हमेशा उन्हें दिलासा दिलाते थे कि कौरवों को उनके किए का फल मिलेगा। कौरवों और पांडवों के बीच का यह टकराव उन्हें कुरुक्षेत्र में महाभारत के युद्ध तक ले जाता है।