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पल्लू में नोटों का बंडल बांधकर डायरेक्टर के पास पहुंची थी ये एक्ट्रेस,जानें क्या था माजरा

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2018, 03:37 PM IST

फिल्म मुग़ल ए आजम से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा...

निम्मी निम्मी

जब भी वुमेन ओरिएंटेड फिल्मों की बात होती है तो महबूब खान निर्देशित 'मदर इंडिया' का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। हालांकि कम ही लोग जानते हैं कि महबूब ने एक और स्त्री प्रधान फिल्म 'औरत' (1940) डायरेक्ट की थी और 'मदर इंडिया' उसी का रीमेक थी।

फिल्म में राधा (नरगिस) को उसका पति (राजकुमार) अचानक छोड़कर चला जाता है। तमाम मुश्किलों से जूझते हुए राधा अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा करती है। तरह-तरह की दिक्कतों के बावजूद राधा अपने संस्कारों से बिल्कुल नहीं डगमगाती और खुद पर बुरी नज़र रखने वाले सुक्खी लाला (कन्हैया लाल) से समझौता नहीं करती।

महबूब खान ने ही इस फिल्म की स्क्रिप्ट भी लिखी थी। 172 मिनट की 'मदर इंडिया' को 1957 में रिलीज किया गया था। इसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। फिल्म को भारत की ओर से ऑस्कर के लिए भी भेजा गया था। फिल्म को ऑस्कर नहीं मिला और इससे महबूब खान इतने दुखी हुए कि उनको दिल का दौरा तक पड़ गया।

एक और दिलचस्प बात ये है कि एक भारतीय स्त्री की महानता दर्शाती इस फिल्म का टाइटल कैथरीन मायो की किताब 'मदर इंडिया' से लिया गया था, जिसमें मायो ने भारतीय संस्कृति और समाज का मजाक उड़ाया था। महबूब ने इस किताब के प्रति विरोध जताने के लिए ही अपनी फिल्म का ये नाम रखा।

वैसे, 'मदर इंडिया' की मेकिंग में बहुत मुश्किलें आई थीं। फिल्म बनाने में तकरीबन 40 लाख रुपए खर्च हुए थे और महबूब खान को पैसों की किल्लत से जूझना पड़ा था। जब अभिनेत्री निम्मी को इस बारे में पता चला तो वे पल्लू में नोटों का बंडल बांधकर महबूब के ऑफिस पहुंचीं, मैनेजर को रुपए पकड़ाए और कहा कि पिक्चर जरूर बननी चाहिए, लेकिन प्लीज़! महबूब साहब को न बताइएगा कि निम्मी ने रुपए दिए हैं।

निम्मी निम्मी

गुजरे जमाने की एक्ट्रेस निम्मी 85 साल की हो चुकी हैं। उनका जन्म 18 फरवरी, 1933 को आगरा में हुआ था। निम्मी एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन फिल्मों के लिए उन्होंने अपना नवाब बानू से निम्मी रखा था। आज गुमनामी की जिंदगी जी रही निम्मी ने यूं तो कई हिट फिल्मों में काम किया लेकिन उनकी एक गलती ने उनका पूरा करियर बर्बाद करके रख दिया था। 11 साल की उम्र में ही मां को खो चुकी निम्मी को उनकी दादी ने पाला। 

 

1963 में आई फिल्म 'मेरे मेहबूब' के डायरेक्टर हरमन सिंह रवैल ने निम्मी को फिल्म में लीड एक्ट्रेस का रोल दिया, लेकिन निम्मी लीड रोल की जगह सेकंड लीड रोल जो कि फिल्म के एक्टर राजेंद्र कुमार की बहन का था, करना चाहती थी। डायरेक्टर के कई बार मनाने के बाद भी वो नहीं मानी और फिल्म में उनकी जगह साधना को लीड एक्ट्रेस के तौर पर लिया गया और उन्हें सेकंड लीड रोल में। फिल्म सुपरहिट रही और साधना का करियर चल पड़ा, वहीं इस फिल्म के बाद निम्मी को लीड रोल मिलना कम हो गए और धीरे-धीरे उनका करियर खत्म हो गया।

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