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अशोक कुमार को देख रणवीर कपूर की दादी ने हटा लिया था घूंघट

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2014, 12:03 AM IST

40 के दशक में भारतीय सिनेमा के किरदारों पर नाट्य मंच का प्रभाव अधिक था।

Ashok Kumar Life Story
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(फाइल फोटो: बॉलीवुड अभिनेता अशोक कुमार)
मुंबई. 40 के दशक में भारतीय सिनेमा के किरदारों पर नाट्य मंच का प्रभाव अधिक था। अशोक कुमार ने इस रिवायत को बदलकर हिंदी सिनेमा में अभिनय की नई परिभाषा गढ़ी। सहज, स्वभाविक अभिनय के साथ पर्दे पर उतरे अशोक कुमार को लोगों ने पलकों पर बिठा लिया।
अशोक कुमार को लेकर एक बेहद दिलचस्प किस्सा रणबीर कपूर के दादा यानी कि राज कपूर की शादी से जुड़ा है। अशोक कुमार आज ही के दिन 13 अक्टूबर 1911 को बिहार के भागलपुर में एक मध्यम वर्गीय बंगाली परिवार में जन्में थे।
अशोक कुमार की लोकप्रियता का आलम यह था कि उनकी एक झलक पाने को राज कपूर की पत्नी ने अपना घूंघट हटा लिया था। दरअसल राज कपूर की शादी थी, उस समय वे बड़े सितारे नहीं थी। तभी किसी ने चिल्लाकर कहा कि अशोक कुमार आए हैं। दुल्हन यानी कि राज कपूर की पत्नी ने सुना तो तुरंत अपना घूंघट हटा लिया। इस बात से राज कपूर अपनी पत्नी से कई दिनों तक खफा रहे थे कि अशोक कुमार का नाम सुना और घूंघट हटा लिया?
हिन्दी फिल्मों के शुरुआती दौर में जब अभिनय शैली में पारसी थियेटर का प्रभाव था। उस दौर में अशोक कुमार ऐसे नायक के रूप में सामने आए जिन्होंने अभिनय में सहजता और स्वाभाविकता पर जोर दिया और स्टारडम को नया रूप देते हुए कई सामाजिक एवं मनोरंजक फिल्मों से सिनेप्रेमियों का मन मोह लिया।

आगे पढ़िए अशोक कुमार से जुड़े ऐसे ही अन्य दिलचस्प किस्से...

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अभिनेता बनने की नहीं थी ख्वाहिश

पेशे से वकील कुंजलाल गांगुली के बड़े बेटे अशोक कुमार आगे चलकर अपने छोटे भाइयों अनूप कुमार और किशोर कुमार के लिए भी फिल्मजगत में करियर बनाने की प्रेरणा बने। अशोक कुमार फिल्म जगत से जुड़े होने के बावजूद अभिनेता नहीं बनना चाहते थे और उनकी रुचि फिल्म के तकनीकी पक्ष में थी। लेकिन उन्हें बेमन से अभिनय की दुनिया में आना पड़ा। एक बार इस क्षेत्र में रम जाने के बाद उन्होंने अभिनय को आत्मसात कर लिया और आने वाले कई दशक तक एक से बढ़कर एक फिल्मों में अभिनय किया।
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देविका के अफेयर ने बनाया हीरो

वकीलों के परिवार से ताल्लुक रखने वाले अशोक कुमार बाम्बे आए और निर्माता-निर्देशक हिमांशु राय के साथ बतौर तकनीशियन काम करने लगे। हिमांशु राय अपनी फिल्म के हीरो हुसैन से खासे नाराज थे क्योंकि अफवाहें थीं कि हीरो का फिल्म की हीरोइन देविका रानी के साथ अफेयर है। देविका रानी, हिमांशु राय की पत्नी थी। हिमांशु राय ने तकनीशियन अशोक कुमार से कहा कि अब देविका रानी के हीरो वही बनेंगे। अशोक कुमार ने बहुत कहा कि मुझे ऐक्टिंग-वेक्टिंग नहीं आती, पर उनकी एक न चली। साल था 1936 और फिल्म थी 'जीवन नैया'।
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अछूत कन्या से मिली पहचान

सामाजिक समस्याओं को दर्शाने वाली 'अछूत कन्या' उनकी शुरुआती फिल्मों में थी, जिसने सिने जगत में उनके पांव जमा दिए। इस फिल्म में उस दौर की चर्चित अभिनेत्री देविका रानी उनकी नायिका थी। इस फिल्म में उनके बेहतरीन अभिनय को देखकर कहीं से नहीं लगा कि वे नए अभिनेता हैं। अपने शानदार अभिनय से अशोक कुमार ने न केवल अपनी जगह बनाई, बल्कि आगे उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्में दी। देविका रानी के साथ उनका फिल्मी सफर आगे भी जारी रहा और दोनों की जोड़ी 'सावित्री', 'निर्मला', 'इज्जत' आदि फिल्मों में नजर आई।
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'किस्मत' ने बनाया स्टार

वर्ष 1943 में प्रदर्शित फिल्म 'किस्मत' ने अशोक कुमार को स्टार बना दिया। यह फिल्म कई मायनों में लीक से हटकर थी। इस फिल्म में अशोक कुमार ने हीरो की स्थापित छवि के विपरीत भूमिका की और हिंदी फिल्मों में एंटी हीरो की एक नई छवि को बढ़ावा दिया। ज्ञान मुखर्जी की फिल्म 'किस्मत' ने लोकप्रियता के कई कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया और कई मायनों में इसकी कामयाबी की चर्चा अब भी होती है। सबसे अधिक समय तक थिएटर में चलने का रिकॉर्ड बहुत लंबे समय तक इसी फिल्म के नाम रहा ।
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'महल' में मधुबाला बनी अशोक कुमार की हीरोइन

अशोक कुमार की एक और चर्चित फिल्म 'महल' प्रदर्शित हुई। इस फिल्म में मधुबाला ने नायिका की भूमिका की थी। यह फिल्म भी काफी सफल रही। अशोक कुमार ने अपने दौर की विभिन्न नायिकाओं के अलावा बाद की पीढ़ी की नायिकाओं के साथ भी काम किया। उनकी चर्चित फिल्मों में 'पाकीजा', 'बहू बेगम', 'आरती', 'बंदिनी', 'आशीर्वाद', 'चलती का नाम गाड़ी' आदि शामिल हैं। उन्होंने कई फिल्मों में पार्श्वगायन भी किया।
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हीरो के बाद चरित्र भूमिकाओं में भी बटोरी वाह-वाही

नायक की भूमिका के बाद दादा मुनि ने बाद में चरित्र भूमिकाओं निभाई। इन भूमिकाओं में भी अशोक कुमार ने बेहतरीन अभिनय किया और दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रहे। गंभीर भूमिकाओं के अलावा अशोक कुमार हास्य अभिनय में भी बड़े सहज नजर आते थे। उन्होंने कई फिल्मों में विलेन की भूमिका भी की। उन्होंने टीवी में भी काम किया। देश के पहले सोप ओपेरा 'हम लोग' में उन्होंने सूत्रधार की भूमिका की। वहीं बीआर चोपड़ा के टीवी धारावाहिक 'बहादुर शाह जफर' में भी शानदार अभिनय किया। दादा साहब फाल्के सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित इस महान अभिनेता का 10 दिसंबर 2001 को निधन हो गया।
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