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डांस करने पर इस एक्ट्रेस को लोग कहने लगे थे प्रॉस्टिट्यूट, की थी तीन शादियां

कथक डांसर और एक्ट्रेस सितारा देवी की आज 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है।

Danik Bhaskar | Nov 08, 2017, 01:42 PM IST
सितारा देवी। सितारा देवी।
कथक डांसर और एक्ट्रेस सितारा देवी की आज 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है। उनका जन्म 8 नवंबर, 1920 को कोलकाता में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनलक्ष्मी था और प्यार से उन्हें सभी धन्नो बुलाते थे। हालांकि, बॉलीवुड में कदम रखने पर उन्हें सितारा देवी नाम दिया गया था। खबरों की मानें तो जब महाराज सुखदेव ने अपनी बेटी धन्नो को डांस सिखाने का फैसला किया तो उन्हें समाज का विरोध झेलना पड़ा था। इतना ही नहीं धन्नो को लोग प्रॉस्टिट्यूट कहकर बुलाने लगे थे। फिर भी महाराज ने अपनी बेटी को डांस सिखाया। उन्होंने एक डांस स्कूल खोला जहां उन्होंने डांस की ट्रेनिंग शुरू की थी। इतना ही नहीं उन्होंने प्रॉस्टिट्यूट के बच्चों को भी इस स्कूल में दाखिला देकर डांस किया था। सितारा देवी ने की थी तीन शादियां...
सितारा देवी ने अपनी लाइफ में तीन शादियां की थी। पहली शादी उन्होंने नासिर अहमद खान से की थी। दूसरी शादी फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के डायरेक्टर के आसिफ से की थी। दोनों ही शादियां ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। उन्होंने तीसरी शादी फिल्म 'डॉन' के प्रोड्यूसर कमल बरोट के भाई प्रताप बरोट से की थी। दोनों का एक बेटा रंजीत बरोट हैं। रंजीत म्यूजिक डायरेक्टर और सिंगर हैं।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें सितारा देवी की लाइफ से जुड़ी कुछ और बातें...
सितारा देवी। सितारा देवी।
1933 में बॉलीवुड से काशी आए फिल्म निर्माता निरंजन शर्मा को एक ऐसी एक्ट्रेस की तलाश थी, जो डांस के साथ सिंगिंग में भी माहिर हो। उनकी नजर सितारा देवी पर पड़ी। उन्होंने सितारा के पिता को फिल्म का ऑफर दिया। बेटी के भविष्य को देखते हुए पिता सुखदेव ने धन्नो को फिल्म में काम करने के लिए मुंबई भेजने का फैसला किया। 
 
सितारा देवी। सितारा देवी।
जानकारी के अनुसार जब धन्नो को फिल्म की शूटिंग के लिए मुंबई रवाना होना था तो पूरे मोहल्ले के बच्चे-महिलाएं तक स्टेशन उन्हें छोड़ने आए थे। सितारा देवी ने 15 साल की उम्र में निरंजन की पहली फिल्म 'वसंत सेना' (1935) से अपने करियर की शुरुआत थी। इसके अलावा उन्होंने 'ऊषा हरण' (1940), 'रोटी' (1942), 'आबरू' (1943), 'बड़ी बहन' (1945), 'हलचल' (1951), 'मदर इंडिया' (1957), 'पूजा' (1940), 'भगवान' (1938) आदि फिल्मों में काम भी किया है। फिल्मों के साथ उन्होंने अलग-अलग जगहों पर अपनी परफॉर्मेंस देने भी जारी रखा। उन्होंने फिल्मों में कोरियोग्राफी के जरिए भी अपनी पहचान बनाई। 
 
 
सितारा देवी। सितारा देवी।
16 साल की उम्र में कोलकाता के शांति निकेतन में एक परफॉर्मेंस के दौरान उनके डांस से प्रभावित होकर रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें कथक क्वीन की उपाधि दी थी। उन्होंने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान लगातार 11:30 घंटे तक डांस करने का रिकॉर्ड भी बनाया था। सितारा देवी ने भारत सहित अमेरिका और ब्रिटेन के कई शहरों में भी प्रस्तुति दी थी।
 
सितारा देवी। सितारा देवी।
सितारा देवी को संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड (1969), पद्मश्री (1973) और कालीदास सम्मान (1995) जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया। इसके अलावा, उन्हें पद्मभूषण सम्मान देने की घोषणा भी हुई थी, लेकिन सितारा देवी ने इसे ये कहते हुए ठुकरा दिया था कि कथक के क्षेत्र में उनका योगदान बहुत बड़ा है और वो भारत रत्न से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगी। बता दें उनका निधन 25 नवंबर, 2014 को हुआ था।