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क्या इस्लाम पीरियड्स को मानता है अपवित्र? ऐसी है दुनियाभर के धर्मों की मान्यता

पाकिस्तान ने अक्षय कुमार स्टारर फिल्म 'पैडमैन' की रिलीज पर रोक लगा दी है।

Danik Bhaskar

Feb 11, 2018, 04:23 PM IST

मुंबई. पाकिस्तान ने अक्षय कुमार स्टारर फिल्म 'पैडमैन' की रिलीज पर रोक लगा दी है। पाकिस्तानी सेंसर बोर्ड के मुताबिक, पीरियड्स पर बेस्ड यह फिल्म उनकी संस्कृति के खिलाफ है। वहीं, पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार ने इसका विरोध करते हुए ट्विटर पर लिखा है कि फिल्म का सब्जेक्ट न तो अनैतिक है और न ही इस्लामिक। बल्कि यह लोगों को जागरूक करने का काम कर सकता है। अगर पाकिस्तान इस फिल्म के सब्जेक्ट को इस्लाम से जोड़ता है तो जानना जरूरी है कि पीरियड्स को लेकर इस्लाम के पवित्र ग्रन्थ कुरान में क्या लिखा हुआ है। इस वजह से पुरुषों को महिलाओं से दूर रहने की सलाह देता है इस्लाम...

- कुरान के मुताबिक, जब महिलाओं का पीरियड्स आया हो तो पुरुषों को उनसे दूर रहना चाहिए। हालांकि, इसका कारण यह नहीं है कि इस दौरान महिलाएं अपवित्र हो जाती हैं। बल्कि, ऐसा इस वजह से होना चाहिए, क्योंकि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को काफी दिक्कत होती है। वे बेहद दर्द से गुजरती हैं।
- दूसरे पक्ष की बात करें कि इस्लाम में महिलाओं का पीरियड्स के दौरान धर्म-करम से दूर क्यों रखा जाता है? मान्यता यह है कि मोहम्मद साहब की बेगम आयशा पीरियड्स के चलते अपनी मक्का की यात्रा पूरी नहीं कर पाई थीं। तब मोहम्मद ने कहा था कि हो सकता है कि अल्लाह आदम की बेटियों के लिए यही चाहता हो।

आगे की स्लाइड्स में जानिए बाकी धर्मों की मान्यता पीरियड्स को लेकर क्या है...

क्या कहता है हिंदू धर्म

 

- हिंदू धर्म में पीरियड्स को अपवित्र माना गया है। समाज में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि पीरिड्स से गुजर रही महिला को रसोई में नहीं जाने दिया जाता। वह पूजन नहीं कर सकती। मंदिर नहीं जा सकती। यहां तक कि कई जगह तो उसे घर से बाहर अलग झोपड़ी में रखा जाता है। 
- हिंदू ग्रंथों के मुताबिक, ब्रह्म हत्या के बाद इंद्र ने पाप से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु की आराधना की। तब विष्णु ने उन्हें इस पाप को बराबर पेड़, जल, भूमि और महिला में बांट देने का आदेश दिया। इसी के फलस्वरूप महिलाओं के हिस्से में मासिक धर्म आया। माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाएं ब्रह हत्या का पाप ढो रही होती हैं। इसलिए उन्हें पूजा पाठ और रसोई जैसे कामों से से दूर रखा जाता है।
- लेकिन आधुनिक युग की बात करें तो ऐसा नहीं है। पीरियड्स के दौरान भी महिलाएं घर के बाकी मेंबर्स के साथ रहती हैं। किचन के काम भी करती हैं और साथ में खाना भी खाती हैं। हां कई जगह धार्मिक स्थानों पर जाने की रोक रहती है। लेकिन साउथ इंडिया में एक हिस्सा (असम) ऐसा भी है,जहां लड़की के पहले पीरियड का उत्सव मनाया जाता है। 

ईसाई धर्म में ऐसा है उल्लेख 

 

- ईसाई दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है। इस धर्म के ग्रंथ बाइबिल में तब मासिक धर्म का जिक्र आता है, जब ईव सेब खा लेती है। हालांकि, अगर इस धर्म की मान्यता की बात करें तो महिलाओं को चर्च में जाने की अनुमति रहती है। फिर कुछ कट्टर विचारधारा वाले क्रिश्चियंस इन महिलाओं को ऐसा करने से रोकते हैं। 
- आधुनिक युग की बात करें तो इस धर्म के लोगों की विचारधारा बदली है और वे पीरियड्स को एक रहस्य के रूप में मानने लगे हैं। 

सिख धर्म में पवित्र हैं पीरियड्स

 

सिख धर्म में पीरियड्स को अपवित्र नहीं माना गया है। इस धर्म के गुरु नानक देव ने कहा है कि जिंदगी देने के लिए जो बहुत जरूरी होता है, वह है मां का खून। यही वजह है कि पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को हर काम करने की अनुमति रहती है। 

बौद्ध धर्म भी मानता है पीरियड्स को पवित्र 

 

बौद्ध धर्म में भी पीरियड्स को पवित्र माना गया है। यानी कि इस दौरान महिलाएं हर काम कर सकती हैं। हालांकि, कुछ ऐसी मान्यताएं भी हैं कि इन दिनों में महिलाएं कुछ शक्तियां खो देती हैं। 

यहूदी धर्म में सबसे कठिन

 

यहूदी धर्म में मासिक धर्म को इतना अपवित्र माना जाता है कि कोई पुरुष डायरेक्ट कोई चीज ऐसी महिला से नहीं ले सकती। इसके लिए महिला उस चीज को जमीन पर रखेगी और पुरुष उसे उठा लेगा। इस धर्म के मुताबिक, पीरियड वाली महिला को छूना, उसका जूठा खाना खाना, उसके परफ्यूम को सूंघना यहां तक कि उसके गाने को सुनने तक की मनाही है।  

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