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एक कुत्ते को मिलने वाला था पहला ऑस्कर अवॉर्ड, यह है इसके पीछे की कहानी

90वां एकेडमी अवॉर्ड यानी ऑस्कर का आयोजन 4 मार्च को लॉस एंजिलिस में शाम 4 बजे शुरू होगा।

Danik Bhaskar | Mar 03, 2018, 07:37 PM IST
डॉग रियो टिन टिन जिसे मिलने वाला था पहला ऑस्कर अवॉर्ड। डॉग रियो टिन टिन जिसे मिलने वाला था पहला ऑस्कर अवॉर्ड।

90वां एकेडमी अवॉर्ड यानी ऑस्कर का आयोजन 4 मार्च को लॉस एंजिलिस में शाम 4 बजे शुरू होगा। वहीं, भारतीय समय अनुसार ये सेरेमनी 5 मार्च को सुबह 6.30 बजे शुरू होगा। आपको बता दें कि ऑस्कर अवार्ड्स 1929 में शुरू हुए थे। फेमस फिल्म कंपनी एमजीएम के ओनर लुई बी मेयर ने हॉलीवुड में एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स की बुनियाद रखी थी और ये अवॉर्ड शुरू किया था। वैसे तो ऑस्कर को लेकर कई इंटरेस्टिंग फैक्ट्स हैं, इन्हीं में एक दिलचस्प किस्सा आपको इस पैकेज में बताने जा रहे हैं। ऐसी है फर्स्ट ऑस्कर अवॉर्ड की कहानी की...


फर्स्ट ऑस्कर अवॉर्ड की कहानी बेहद दिलचस्प है। वैसे तो पहला ऑस्कर अवॉर्ड जर्मर एक्टर एमिल जेनिंग्स ने जीता था। लेकिन आपको बता दें कि वे इस अवॉर्ड के पहले हकदार नहीं थे। कम ही लोग जानते हैं कि पहला ऑस्कर अवॉर्ड किसी एक्टर को नहीं बल्कि एक कुत्ते को मिलने वाला था। ये अवॉर्ड जर्मन शेपर्ड डॉग ने जीता था, जिसका नाम रियो टिन टिन था।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पहले ऑस्कर अवॉर्ड से जुड़ी कुछ और बातें...

रियो टिन टिन। रियो टिन टिन।

दरअसल, रियो टिन टिन को फर्स्ट वर्ल्ड वार के दौरान फ्रांस ने बचाया था। 1918 में फ्रांस में अमेरिकी वायुसेना के एक जवान ने रियो को बचाया था। बाद में रियो टिन टिन हॉलीवुड फिल्मों में फेमस हुआ। उसने तकरीबन 27 फिल्मों में काम किया। इनमें से करीब चार फिल्में 1929 में ही रिलीज हुईं थीं। इन्हीं में से एक फिल्म में उनकी बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए अवॉर्ड कमेटी ने रिया टिन टिन को ऑस्कर का दावेदार माना। 

ऑस्कर ट्रॉफी। ऑस्कर ट्रॉफी।

एकेदमी के फर्स्ट प्रेसीडेंट लुई मेयर के सामने जब रियो टिन टिन का नाम आया तो उन्हें महसूस हुआ कि यदि फर्स्ट ऑस्कर अवॉर्ड किसी कुत्ते को दिया गया तो इससे लोगों के बीच अच्छा मैसेज नहीं जाएगा। 

एमिल जेनिंग्स। एमिल जेनिंग्स।

लुई मेयर ने अवॉर्ड कमेटी को दोबारा वोट करने को कहा। दोबारा वोटिंग के बाद जर्मन एक्टर एमिल जेनिंग्स का नाम सामने आया और वे ऑस्कर पाने वाले पहले एक्टर बने। एमिल ने बाद में जर्मन तानाशाह हिटलर के लिए भी काम किया। इतना ही नहीं उन्होंने नाजी सरकार के प्रतार-प्रसार के लिए फिल्में भी बनाई। एमिल का निधन 2 जनवरी, 1950 को हुआ था।