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5 Facts: कभी रिजेक्ट हो गई थी आवाज, फिर वडाली ब्रदर्स ने ऐसे बनाई पहचान

सूफी गायक प्यारेलाल वडाली(75) का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से अमृतसर में निधन हो गया।

Danik Bhaskar | Mar 09, 2018, 01:01 PM IST
एक कॉन्सर्ट के दौरान पूरनचंद वडाली और प्यारेलाल वडाली(R)। एक कॉन्सर्ट के दौरान पूरनचंद वडाली और प्यारेलाल वडाली(R)।

मुंबई. सूफी गायक प्यारेलाल वडाली(75) का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से अमृतसर में निधन हो गया। प्यारेलाल, अपने बड़े भाई पूरनचंद वडाली के साथ ही गाया करते थे उनकी जोड़ी ने दुनियाभर में सूफी गायकी से एक अलग मुकाम बनाया था। आज इस पैकेज में हम आपको बता रहे हैं वडाली ब्रदर्स से जुड़े 5 फैक्ट्स। जब संगीत सम्मेलन में नहीं मिली गाने की परमिशन...

- सूफी सिंगर वडाली ब्रदर्स 'गुरू की वडाली' गांव अमृतसर डिस्टिक(पंजाब) से थे। जो कि धन-धन श्री गुरू हरगोविंद साहब(सिखों के 6वें गुरू) का भी बर्थ प्लेस है।
- म्यूजिशियन की पांचवी जेनरेशन में जन्मे पूरनचंद और प्यारेलाल ने सूफी संतों की बातों को सिंगिंग के माध्यम से पहुंचाया।
- पहली बार वडाली ब्रदर्स गांव के बाहर जालंधर से हरबल्लभ मंदिर में परफॉर्मेंस देने गए थे। हालांकि हरबल्लभ संगीत सम्मेलन(जालंधर) में दोनों को आवाज की वजह से गाने की परमिशन नहीं मिली और ब्रदर्स को रिजेक्ट कर दिया गया था।
- इस डिसअप्वॉइमेंट के बाद वडाली ब्रदर्स ने जालंधर में संगीत सम्मेलन किया। जहां उन्हें ऑल इंडिया रेडियो के एक एग्जीक्यूटिव ने देखा और तभी दोनों का पहला सॉन्ग रिकॉर्ड किया था।


आगे की स्लाइड्स में जानें पैसे कमाने के लिए ये काम करते थे प्यारेलाल, पढ़ें वडाली ब्रदर्स से जुड़े 4 Facts...

1. सिंगिंग से पहले ये काम करते थे वडाली ब्रदर्स

 

- कम ही लोग जानते हैं कि सिंगर बनने से पहले दोनों भाई अलग ही प्रोफेशन में थे। जहां पूरनचंद अखाड़े में कुश्ती करते थे तो वहीं प्यारेलाल पैसों के लिए गांव की रामलीला में कृष्ण का रोल प्ले करते थे। 
- बता दें, करीब 25 साल कुश्ती करने वाले पूरनचंद को पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

2. बड़े भाई से सीखा प्यारेलाल ने संगीत


- पूरनचंद और प्यारेलाल कभी फॉर्मल एजुकेशन के लिए स्कूल नहीं गए। बावजूद इसके वडाली ब्रदर्स के म्यूजिक के प्रति डेडिकेशन और खून में ही इंडियन क्लासिकल की समझ होने के कारण उन्हें म्यूजिक वर्ल्ड में मास्टर की उपाधि मिली। 
- वडाली बदर्स के पिता श्री ठाकुर दास ने बड़े बेटे पूरनचंद को म्यूजिक सीखने के लिए फोर्स किया था। जिसके बाद उन्होंने पटियाला घराने से पंडित श्री दुर्गा दास जी से संगीत सीखा। 
- प्यारेलाल अपने बड़े भाई पूरनचंद को ही गुरू और मार्गदर्शक मानते थे। उन्हीं से प्यारेलाल को संगीत की शिक्षा मिली। 

3. पूर्वजों के घर में रहकर सिखाते थे संगीत


- वडाली ब्रदर्स का म्यूजिक जॉनर गुरूबाणी, काफी, गजल और भजन रहा है। दोनों भाई 'गुरू की वडाली' में अपने पूर्वजों के घर में रहते हैं। 
- यहां ये दोनों भाई उन्हें संगीत सिखाते हैं जो इस म्यूजिक की रक्षा करने का वचन देते हैं और इसके प्रति अपनी पूरी लाइफ दे देते हैं। 
- वडाली ब्रदर्स ने कभी पैसों के लिए गाना नहीं गाया। क्योंकि पैसों के लिए इस विधा का इस्तेमाल करना दोनों को ही सही नहीं लगा। दोनों भाई ज्यादातर लाइव कॉन्सर्ट में सिर्फ इस संगीत को दूसरों तक पहुंचाने के लिए गाया करते थे।

4. इन देशों में परफॉर्म कर चुके वडाली ब्रदर्स


- पूरनचंद और प्यारेलाल ने अबतक यूनाटेड स्टेट ऑफ अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, पाकिस्तान, दुबई, सिंगापुर जैसे कई देशों में साहित्यिक प्रोग्राम अटेंड किए हैं। 
- कुछ टाइम से दोनों भाई गुलजार साहब के लिखे गानों को बॉलीवुड के लिए गा चुके हैं। वे अबतक 'पिंजर', 'धूप', 'तनु वेड्स मनु', 'मौसम', 'टीना की चाबी', 'क्लासमेट' जैसी फिल्मों में गाने गा चुके हैं।