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Movie Review: दिलचस्प और अपने आसपास की कहानी लगती है 'पिंक'

RJ ALOK

Sep 15, 2016, 03:20 PM IST

मशहूर बंगाली फिल्म्स के डायरेक्टर अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने पहली बार हिंदी फिल्म 'पिंक' डायरेक्ट की है, जिसकी कहानी दिलचस्प और दमदार लगती है।

'Pink' Movie Review
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क्रिटिक रेटिंग 3.5/5
स्टार कास्ट
अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हाड़ी,
एंड्रिया तेरियांग, अंगद बेदी, पियूष मिश्रा, विजय वर्मा
डायरेक्टर अनिरुद्ध रॉय चौधरी
प्रोड्यूसर रश्मि शर्मा, राइजिंग सन फिल्म्स, सरस्वती क्रिएशन्स
संगीत शांतनु मोईत्रा, अनुपम रॉय
जॉनर कोर्टरूम ड्रामा-थ्रिलर
अपने प्रोडक्शन में एक से बढ़कर एक फिल्में बनाने वाले निर्माता-निर्देशक शूजित सरकार ने इस बार अनिरुद्ध रॉय चौधरी के हाथ में कमान देकर फिल्म 'पिंक' को डायरेक्ट करने के लिए कहा है, आइए जानते हैं आखिर कैसी है यह फिल्म...
कहानी
दिल्ली-फरीदाबाद में बेस्ड ये कहानी सर्वप्रिय विहार में किराए के मकान में रहने वाली मीनल (तापसी पन्नू), फलक (कीर्ति कुल्हाड़ी) और एंड्रीया (एंड्रीया तारियांग) की है। 1 मार्च, रविवार की रात फरीदाबाद के पास स्थित सूरजकुंड के इलाके में रॉक कॉन्सर्ट के बाद ये तीनों लड़कियां वहां मौजूद तीन लड़कों के साथ पास के ही घर में पार्टी करने चली जाती हैं। वहां किन्ही कारणों से आपसी झड़प के बाद राजवीर (अंगद बेदी) की आंख के पास गहरी चोट लग जाती है, जिसकी वजह से ये तीनोंं लड़के, मीनल के पीछे पड़ जाते हैं और इसका अंजाम इन तीनोंं लड़कियों को भुगतान पड़ता है। मीनल के ऊपर केस हो जाता है। रिटायर्ड वकील दीपक सहगल (अमिताभ बच्चन) सामने आकर तीनोंं लड़कियों की तरफ से केस लड़ते हैं। अब क्या दीपक की दलील इन लड़कियों को बचा पाएगी या नहीं? इसके लिए आपको थिएटर का रूख करना होगा।

डायरेक्शन
फिल्म का डायरेक्शन सामान्य, लेकिन कहानी के हिसाब से बहुत परफेक्ट है। फिल्म की शुरुआत में जब स्टार्स के नाम सामने आते हैं, उसके बैकग्राउंड से ही कहानी भी शुरू हो जाती है, जो अपने आप में ही काफी अच्छा प्रयोग है। यही कारण है कि आप शुरुआत और आखिर के टाइटल्स को पढ़ते हुए भी कहानी को बिल्कुल भी मिस नहीं कर सकेंगे। इससे लिए डायरेक्टर की तारीफ करनी होगी। कोर्ट रूम ड्रामा और आउटसाइड शूट को भी कैमरे में बखूबी कैप्चर किया गया है। फिल्म की लिखावट के लिए रितेश शाह भी बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने कोर्टरूम के भीतर होने वाली जिरह को कलम से पन्नों पर सटीक उतारा है। अभिक मुखोपाध्याय की सिनेमेटोग्राफी भी काफी दिलचस्प है। कहानी की एक और खास बात ये है की इसमें नार्थ ईस्ट, लड़कियों के पहनावे, उनकी हैबिट और ऐसे कई मुद्दों पर बड़े ही सहज तरीके से प्रकाश डाला गया है।
एक्टिंग
वकील के रूप में अमिताभ बच्चन ने बहुत ही उम्दा अभिनय किया है, ऐसा वकील जो रिटायर्ड है साथ ही बाइपोलर बीमारी का शिकार है। बेशक किरदार मुश्किल था, लेकिन अमिताभ बच्चन ने बेहतरीन तरीके से इसे निभाया। वहीं कोर्ट रूम में अभिनेता पियूष मिश्रा और उनके द्वारा प्रयोग में लाए गए लीगल टर्म्स भी रियलिटी के करीब इस फिल्म को लाते हैं। पियूष मिश्रा ने अच्छा काम किया है। एक्ट्रेस तापसी पन्नू और कीर्ति कुल्हाड़ी ने कुछ ऐसे एक्सप्रेशन से भरपूर सीन दिए हैं जो आपको आखिर तक याद रहेंगे और इसका फायदा इन दोनों एक्ट्रेसेस को आने वाले प्रोजेक्ट्स में जरूर मिलेगा। एंड्रीया तारियांग, अंगद बेदी का काम भी सराहनीय है। एक तरह से बहुत ही परफेक्ट कास्टिंग है। हालांकि, कुछ किरदार ऐसे भी थे जिनकी मौजूदगी तो थी, लेकिन उन्हें कैश नहीं किया जा सका।

म्यूजिक
फिल्म के म्यूजिक कहानी के साथ चलता है और आपको सोचने पर मजबूर करता है। अनुपम रॉय और शांतनु मोईत्रा का संगीत अच्छा है।
देखें या नहीं...?
अच्छी कहानी, उम्दा एक्टिंग और बेहतरीन फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो जरूर देखें।

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