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Movie Review : धार्मिक कट्टरता जैसे मुद्दों को उजागर करती है 'बैंगिस्तान'

'बैंगिस्तान' कहानी है एक ऐसे काल्पनिक देश की, जो धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद जैसे मुद्दों से जूझता है।

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2015, 09:59 AM IST
'बैंगिस्तान' के एक सीन में रिते 'बैंगिस्तान' के एक सीन में रिते
फिल्म का नाम बैंगिस्तान
क्रिटिक रेटिंग 1.5/5
स्टार कास्ट रितेश देशमुख, पुलकित सम्राट, जैकलीन फर्नांडीज और चंदन रॉय सान्याल
डायरेक्टर करण अंशुमान
प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर
म्यूजिक डायरेक्टर राम संपत
जॉनर ड्रामा
सुभाष कपूर (जॉली एल.एल बी और गुड्डू रंगीला फेम) और विनोद कापड़ी (मिस टनकपुर हाजिर हो फेम) के बाद अब पत्रकार करण अंशुमान ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बतौर डायरेक्टर एंट्री ली है। उनकी पहली फिल्म 'बैंगिस्तान' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म के लिए उन्होंने हिंदुस्तान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तरह ही देश 'बैंगिस्तान' की कल्पना की है, जो धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद जैसे मुद्दों से जूझता है।

क्या है फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी 'बैंगिस्तान' के दो अलग-अलग धर्म के नागरिकों के इर्द-गिर्द घूमती है। हाफिज बिन अली (रितेश देशमुख), जो देश के उत्तरी भाग में रहते हैं और प्रवीण चतुर्वेदी (पुलकित सम्राट), जो दक्षिणी भाग के निवासी है। हाफिज और प्रवीण अपने-अपने धर्म पर मर मिटने के लिए तैयार रहते हैं। एक वक्त आता है, जब दोनों के धर्मगुरु उन्हें पोलैंड में हो रही पीस मीट में अपने-अपने धर्म की लड़ाई लड़ने भेजते हैं। इस दौरान दोनों अपने नाम बदल लेते हैं। प्रवीण बन जाता है अल्लाह रक्खा खान और हाफिज बन जाता है ईश्वरचंद शर्मा। इसके बाद कहानी में कई मोड़ आते हैं, जिनके बारे में जानने के लिए आपको सिनेमा हॉल की ओर कदम बढ़ाने होंगे।

करण अंशुमान का डायरेक्शन

करण अंशुमान फिल्म को गति देने में असफल रहे हैं। फर्स्ट हाफ में कुछ सीन्स पर सनेमा हॉल ठहाकों से गूंज उठता है, लेकिन सेकंड हाफ ऑडियंस की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेरता है। फिल्म का क्लाइमेक्स काफी कमजोर है। करण खुद एक फिल्म क्रिटिक हैं, लेकिन वे अपनी ही फिल्म के साथ न्याय नहीं कर सके।

एक्टिंग: रितेश के आगे फीके रहे पुलकित

रितेश देशमुख ने अपना किरदार बहुत अच्छे तरीके से निभाया है। हालांकि, पुलकित सम्राट की कमजोर एक्टिंग का खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ेगा। जैकलीन फर्नाडीज के करने लायक कुछ ज्यादा नहीं था। उन्होंने फिल्म में कुछ नया नहीं किया है।

कैसा है फिल्म का संगीत

फिल्म का संगीत ठीकठाक है। 'इश्क करेंगे...' 'होगी क्रान्ति' और 'मौला' सॉन्ग्स पहले ही ऑडियंस के बीच पॉपुलर हो चुके हैं। कहानी के हिसाब से कुछ गीत कम रखे जा सकते थे।

देखें या नहीं

रितेश देशमुख की एक्टिंग को छोड़कर फिल्म में कुछ ऐसा नहीं, जिसके चलते फिल्म देखी जाए।
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