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Movie Review: फैमिली मसाले में फीका पड़ा 'शेफ' का टेस्ट, नहीं लगा पाए तड़का

ये फिल्म 2014 में आई अमेरिकन 'शेफ' की हिन्दी रीमेक है।

Dainik Bhaskar

Oct 06, 2017, 12:29 PM IST
Chef movie review
रेटिंग 2.5/5
स्टार कास्ट सैफ अली खान, पद्मप्रिया जानकीरमन, स्वर कांबले, मिलिंद सोमन, चंदन रॉय सान्याल
डायरेक्टर राजा कृष्णा मेनन
प्रोड्यूसर भूषण कुमार, क्रिशन कुमार, राजा कृष्णा मेनन, विक्रम मल्होत्रा
म्यूजिक रघू दीक्षित, अमाल मलिक
जॉनर फैमिली ड्रामा

डायरेक्टर राजा कृष्णा मेनन की 'बारह आना'(2009) और 'एयरलिफ्ट'(2016) के बाद 'शेफ' तीसरी फिल्म है। जो कि सिमेनाघरों में रिलीज हो गई है तो कैसी बनी ये फिल्म आइए जानते हैं....

कहानी
फिल्म की कहानी दिल्ली के चांदनी चौक से शुरु होती है जहां रोशन कालरा(सैफ अली खान) अपने पेरेंट्स के साथ रहते हैं। रोशन के माता-पिता चाहते हैं कि वो इंजीनियर बने लेकिन उनका शुरु से ही कुकिंग से लगाव होता है। इसी वजह से वो एक दिन घर छोड़कर चले जाते हैं और न्यूयॉर्क के एक होटल में बड़े शेफ बन जाते हैं। शेफ बनने के सफर में रोशन की पर्सनल लाइफ पर भी काफी असर पड़ता है। किन्हीं परेशानियों की वजह से उनकी पत्नी राधा मेनन (पद्मप्रिया जानकीरमन) बेटा अरमान(स्वर कांबले) को लेकर उनसे अलग हो जाती है और वापस केरला(इंडिया) में रहने लगती हैं। एक दिन रोशन के लाइफ में एक ट्विस्ट आता है और वो जॉब छोड़कर वापस इंडिया पत्नी के पास केरला आ जाते हैं। यहां रोशन अपने बेटे अरमान के साथ कुछ वक्त बिताता है और चलती फिरती फूड ट्रक से दोबारा शेफ का शुरू करता है। कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं और ये एक फाइनल नतीजे पर पहुंचती है। क्या होता फिल्म का एंड ये जानने के लिए तो आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

डायरेक्शन
फिल्म का डायरेक्शन और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है। फिल्म में केरला और न्यूयॉर्क की रियल लोकेशन दिखाई हैं जो काफी आकर्षक हैं। जैसा कि फिल्म पिता-पुत्र के रिलेशन को दर्शाती है ऐसे में कहानी पर थोड़ा और काम किया जा सकता था। वहीं ये कोई टिपिकल मसाला फिल्म नहीं है। इसमें न तो कोई आइटम सॉन्ग है न ही ये ठहाका लगाकर हंसने का मौका देती है। ये बातें फिल्म को काफी स्लो बनाती हैं और दर्शकों को बोर करती हैं। साथ ही फिल्म का क्लाइमेक्स और बेहतर किया जा सकता था।


एक्टिंग
सैफ अली खान को जैसा फिलहाल अपने फिल्मी करियर में एक हिट की जरूरत है जो ये फिल्म कहीं-कहीं पूरा करने में असफल हो सकती है। पिता के रूप में उनकी एक्टिंग बढ़िया है लेकिन थोड़ा और काम किया जा सकता था। वहीं जैसा कि ये पद्मप्रिया जानकीरमन की पहली हिन्दी फिल्म हैं उन्होंने अच्छी परफॉर्मेंस दी है। वहीं स्वर कांबले, चंदन रॉय सान्याल और मिलिंद सोमन के साथ-साथ बाकी को-स्टार्स का काम भी सहज है।

म्यूजिक
रघू दीक्षित और अमाल मलिक ने फिल्म के हिसाब से म्यूजिक दिया है। हालांकि फिल्म कोई ऐसा सॉन्ग नहीं है जो याद रह जाए।

देखें न देखें
अगर आप मूलत पारिवारिक रिश्तों के इमोशनल ड्रामे से भरपूर फिल्म का इंतजार कर रहे थे तो एक बार इसे देख सकते हैं।

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