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Movie Review: 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा' से फीकी है 'दिल धड़कने दो'

डायरेक्टर जोया अख्तर की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'दिल धड़कने दो' रिलीज हो चुकी है।

Dainik Bhaskar

Jun 05, 2015, 12:33 PM IST
Movie Review: Dil Dhadakne Do
डायरेक्टर जोया अख्तर की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'दिल धड़कने दो' रिलीज हो चुकी है। 'लक बाय चांस' और 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा' के बाद एक बार फिर वे एक अच्छा विषय ऑडियंस के लिए लाई हैं। हालांकि, इसमें वो बात नहीं है, जो 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा' में थी।

क्या है फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी मेहरा फैमिली है। हर बात में अपनी चलाने वाले कमल मेहरा यानी अनिल कपूर इस परिवार के मुखिया हैं। उनकी पत्नी नीलम (शेफाली शाह) हैं, जो फैमिली ओरिएंटेड हैं। कमल और नीलम की बड़ी बेटी है आयशा (प्रियंका चोपड़ा), जिसकी शादी मानव (राहुल बोस) से हो चुकी है, लेकिन रिश्ता तलाक तक पहुंच चुका है। कमल-नीलम का छोटा बेटा है कबीर मेहरा (रणवीर सिंह), जो अपने हिसाब से जिंदगी जीना चाहता है, लेकिन पिता कमल चाहते हैं कि वह उनके द्वारा बनाए गए दिशा-निर्देशों पर चले। इस फैमिली का एक और सदस्य भी है जो कि एक डॉगी प्लूटो है। प्लूटो की आवाज़ बने हैं आमिर खान। वैसे फिल्म की असली कहानी तब शुरू होती है, जब अपनी और नीलम की शादी की 30वीं सालगिरह पर कमल मेहरा एक क्रूज ट्रिप ऑर्गनाइज करते हैं। क्रूज पर कबीर की मुलाकात फराह(अनुष्का शर्मा) से होती है और वे एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं।
इधर, आयशा को भी अपना पुराना दोस्त मिल सनी (फरहान अख्तर) मिलता है और उनके दिल भी एक-दूसरे के लिए धड़कने लगते हैं। क्रूज पर और क्या-क्या होता है? क्या सच में आयशा और मानव का तलाक होता है? क्या कमल अपने विचारों में बदलाव लाता है और कबीर-फराह के प्यार का क्या अंजाम होता है। इन सब सवालों के जवाब आपको फिल्म देखने के बाद ही पता चल सकेंगे।

जोया अख्तर का डायरेक्शन

‘जिंदगी मिलेगी न दोबारा’ के बाद जोया अख्तर से एक्सपेक्टेशन बहुत हाई हो चुकी है। उनकी ज्यादातर फिल्मों की थीम जर्नी होती है इसे दिखाने में वह एक्सपर्ट हो चुकी हैं। फिल्म का हर फ्रेम बहुत ही खूबसूरत है। स्पेन, इटली, फ़्रांस, ट्यूनिसिया और टर्की की लोकेशंस आपके पैसे वसूल करा देंगी मगर दो घंटे 50 मिनट तक इस फिल्म को देखना कहीं-कहीं उबाऊ भी हो जाता है। अच्छी स्टारकास्ट के बावजूद जोया का डायरेक्शन वह कमाल नहीं दिखा पाता जिसकी उम्मीद आपको रहती है।

कैसी है स्टार्स की एक्टिंग

एक्टिंग की बात की जाए तो अनिल कपूर अपने किरदार में बिल्कुल फिट बैठे हैं।शेफाली शाह ने भी अनिल की पत्नी का किरदार बखूबी निभाया है। भाई-बहनों के रोल में प्रियंका चोपड़ा और रणवीर सिंह ने काफी अच्छा काम किया है। या यूं कहें कि ये किरदार उनके लिए ही बने थे। अब बात करें फरहान अख्तर की तो उनके करने लायक फिल्म में ज्यादा कुछ नहीं था, लेकिन जो भी मिला, उसे उन्होंने शिद्दत से पूरा किया। अनुष्का शर्मा की एक्टिंग के बारे में सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि उन्होंने बस जैसे-तैसे अपने रोल को निभा लिया।
म्यूजिक: ‘गल्ला’ एनर्जी से भरपूर है, वहीं बाकी गाने एवरेज हैं।

देखें या न देखें: फिल्म का प्लस प्वाइंट है इसका विजुअली डिलाइट होना है। exotic locations और बढ़िया स्टारकास्ट फिल्म को अपीलिंग बनाते हैं। इसके अलावा, यदि आप यह सोचकर फिल्म देखने जा रहे हैं कि 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा' जैसा अनुभव मिलेगा तो 'दिल धड़कने दो' आपको निराश कर सकती है। अनिल कपूर, रणवीर सिंह और प्रियंका चोपड़ा की अच्छी एक्टिंग के लिए फिल्म देखी जा सकती है।

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