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VIDEO@MOVIE REVIEW: 40 साल बाद 'गब्बर' की असफल वापसी

Dainik Bhaskar

May 01, 2015, 03:53 PM IST

अक्षय कुमार स्टारर फिल्म 'गब्बर इज बैक' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फुलऑन एक्शन से भरी इस फिल्म की कहानी हल्की हैं, यहीं वजह है कि फिल्म ने कहीं न कहीं दर्शकों को निराश किया है।

Movie Review: Gabbar Is Back
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(अक्षय कुमार)
फिल्म का नाम गब्बर इज बैक

क्रिटिक रेटिंग

2/5

स्टार कास्ट

अक्षय कुमार, श्रुति हासन, सुमन तलवार,
सुनिल ग्रोवर, जयदीप अहलावत

डायरेक्टर

राधाकृष्ण जगर्लामुडी उर्फ कृष

प्रोड्यूसर

संजय लीला भंसाली

म्यूजिक डायरेक्टर

चिरंतन भट्ट, यो यो हनी सिंह, मंज मसिक

जॉनर

एक्शन थ्रिलर
40 साल पहले अमजद खान ने फिल्म 'शोले' में विलेन गब्बर का किरदार निभाया था और आज उसी किरदार को हीरो के रूप में पेश करने की कोशिश की है डायरेक्टर कृष ने। अक्षय को लेकर उन्होंने 'गब्बर इज बैक' बनाई जरूर है, लेकिन फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो उस गब्बर को टक्कर दे। यानी कि गब्बर वापस जरूर आया है, लेकिन उसकी यह वापसी ऑडियंस को रिझाने में असफल रही है।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी को यदि संक्षेप में समझा जाए तो दो डायलॉग इसकी पूरी कहानी को बयां कर देते हैं। गब्बर (अक्षय कुमार) का 'पचास-पचास कोस दूर जब कोई रिश्वत लेता है तो सब कहते हैं, मत ले...वरना गब्बर आ जाएगा' और बिजनेसमैन दिग्विजय पाटिल (सुमन तलवार) का 'रिश्वत ली तो गब्बर मार देगा और नहीं ली तो मैं मार दूंगा'। यानी कि फिल्म की कहानी गब्बर नाम के एक शख्स की है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता है। समाज में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए वह हर तबके के लोगों को सबक सिखाता है। फिर चाहे वह तहसीलदार हो, हॉस्पिटल प्रशासन से जुड़े लोग हों, पुलिस हो या फिर बिजनेसमैन। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए गब्बर क्या-क्या हथकंडे अपनाता है और किस हद तक सफल होता है, यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी। फिल्म में जयदीप अहलावत ने सीबीआई चीफ, सुमन तलवार ने बिजनेसमैन दिग्विजय पाटिल, श्रुति हासन ने एडवोकेट श्रुति और सुनील ग्रोवर ने पुलिस कॉन्स्टेबल साधु का किरदार निभाया है।
फिल्म का डायरेक्शन
राधाकृष्ण जगर्लामुडी उर्फ कृष ने अक्षय कुमार की एक्शन हीरो की छवि को भुनाने की नाकामयाब कोशिश की है। निर्देशक के तौर पर वे पूरी तरह फेल रहे हैं। फिल्म में ऐसा कोई सीन या डायलॉग नहीं है, जिसपर तालियां और सीटी बजाई जाएं। सिवाय, प्राइवेट अस्पताल वाले उस सीन को छोड़कर, जिसमें अक्षय वहां के प्रशासन की मनमानी को उजागर करते हैं। यही एक ऐसा सीन है, जो ऑडियंस को पूरे समय बांधे रहता है।
स्टार्स की एक्टिंग

'गब्बर इज बैक' में अक्षय को खलनायक बनाकर, नायक के तौर पर पेश किया है। अक्षय की मौजूदगी की वजह से फिल्म में एक्शन की भरमार है। हालांकि, उनके किरदार में नयापन की कमी है। काफी हल्के स्क्रीनप्ले की वजह से श्रुति हासन का किरदार दमदार नहीं लगता। सुमन तलवार साउथ में भले ही सुपरस्टार हों, लेकिन इस फिल्म में उनकी एक्टिंग में बिल्कुल भी दम नहीं है। करीना कपूर खान सिर्फ गाने में दिखाई दी हैं। इसके अलावा, उनका फिल्म में कोई रोल नहीं था। हाे, कॉन्स्टेबल साधु के किरदार में सुनील ग्रोवर और सीबीआई चीफ के किरदार में जयदीप अहलावत एकदम फिट बैठे हैं। दोनों बहुत अच्छा काम फिल्म में किया है।
क्यों देखें फिल्म?
फिल्म में नयापन की कमी है और रफ्तार भी धीमी लगती है। यदि आप अक्षय कुमार के डाई-हार्ड फैन है और उनकी हर फिल्म देखना पसंद करते हैं, तो आप इसे देख सकते हैं।

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