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Movie Review: सरकार और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाती है 'गौर हरि...'

फिल्म 'गौर हरि दास्तान- द फ्रीडम फाइल' सरकार और न्यायपालिका की वर्तमान प्रक्रिया पर सवाल उठाती है।

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2015, 07:15 PM IST
Movie Review: 'Gour Hari Dastaan' Is A Mush Watch
फिल्म का नाम गौर हरि दास्तान- द फ्रीडम फाइल
क्रिटिक रेटिंग 4/5
स्टार कास्ट विनय पाठक, कोंकणा सेन शर्मा, रणवीर शोरी
डायरेक्टर/प्रोड्यूसर अनंत नारायण महादेवन
म्यूजिक डायरेक्टर ND
जॉनर बायोपिक
अनंत नारायण महादेवन के डायरेक्शन में बनीं फिल्म 'गौर हरि दास्तान- द फ्रीडम फाइल' स्वतंत्रता सेनानी गौर हरि दास के संघर्ष की कहानी बयां करती है। फिल्म शुरू होती है खादी क्राफ्ट में कार्यरत दास का किरदार निभाने वाली विनय पाठक से, जो अपनी पत्नी लक्ष्मी दास (कोंकणा सेन शर्मा) और बेटे अलोक के साथ सामान्य जीवन बिताते हैं।
दास की जिंदगी परेशानियों से भर जाती है, जब उनके बेटे को फ्रीडम फाइटर सर्टिफिकेट न होने के चलते कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलता। इसके बाद वे फ्रीडम फाइटर का दर्जा पाने की जिद्दोजहद में लग जाते हैं। पत्नी, बच्चों, पड़ोसियों और दुनिया के सामने अपने पहचान बनने के लिए यह सर्टिफिकेट बहुत जरूरी है। हालांकि, इस दर्जे को पाने के लिए उन्हें लगातार 32 साल तक संघर्ष करना पड़ता है। गौर हरि दास को अपनी ही सरकार के सामने इस बात का प्रमाण हासिल करना होता है कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में हिस्सा लिया था। आखिरकार, 84 साल की उम्र में उन्हें अपनी मंजिल सर्टिफिकेट के तौर पर मिलती है। इस लम्बे सफर के दौरान गौर हरि दास की मदद एक पत्रकार राजीव सिंघल (रणवीर शोरी) और उसकी दोस्त अनीता (तनिष्ठा मुखर्जी) भी करते हैं।
विनय पाठक को बतौर लीड रोल कास्ट करना डायरेक्टर महादेवन का सबसे बेहतरीन डिसिजन था। विनय ने इस किरदार को पर्दे पर शुरूआत से आखिर तक बखूबी जिया है। यही वजह है कि फिल्म के लिए पेरिस फिल्म फेस्टिवल में पाठक को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला है। इस बात को कोई दो राय नहीं है कि दास का किरदार निभाने के लिए पाठक ने बेहद मेहनत की है। उनकी यह मेहनत पर्दे पर रंग लाई है। विनय के अलावा रणवीर शौरी की भी तारीफ करनी होगी, पत्रकार के किरदार में वो जमें हैं। अफसोस की बात यह है कि दास की पत्नी के किरदार में कोंकणा सेन शर्मा का छोटा सा रोल है।
लगभग दो घंटे की इस फिल्म में आपको कोई भी खोट देखने को नहीं मिलेगा। इसे डायरेक्टर माधवन ने शानदार तरीके से पर्दे पर दर्शाया है। फिल्ममेकर ने बिना किसी गड़बड़ी के प्लॉट को वर्तमान से 1975 तक और आजादी के पहले के युग तक दिखाया है। इसके अलावा आर्ट डायरेक्टर चेतन पाठक की भी तारीफ करनी होगी, जिन्होंने पुराने दस्तावेजों, अखबारों से लेकर उस वक्त की वस्तुओं का पुनर्निर्माण किया। इस फिल्म को बेहतरीन बनने का श्रेय को-राइटर सीपी सुरेंद्रन को भी जाता है, जिन्होंने स्टोरी लाइन को बखूबी पिरोया है।
फिल्म सरकार और न्यायपालिका की वर्तमान प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। कुल मिलाकर इंडिपेंडेंस डे के मौके पर इस फिल्म को देखा जा सकता है, क्योंकि फिल्म की कहानी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को उजागर करती है।
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Movie Review: 'Gour Hari Dastaan' Is A Mush Watch
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