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Movie Review : गरीबों का मसीहा बन कर दुश्मनों से लड़ता है 'कबाली' / Movie Review : गरीबों का मसीहा बन कर दुश्मनों से लड़ता है 'कबाली'

dainikbhaskar.com

Jul 22, 2016, 10:50 AM IST

रजनीकांत ने 'कबाली' में एक बार फिर गरीबों के मसीहा का किरदार निभाया है। वो गरीब मजदूरों के लिए समाज के बुरे लोगों से लड़ता है।

Kabali Movie Review
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क्रिटिक रेटिंग 3 /5
स्टार कास्ट रजनीकांत, राधिका आप्टे, धनशिका, विंस्टन चाओ, जॉन विजय, दिनेश रवि
डायरेक्टर पीए रंजीत
प्रोड्यूसर कलईपुली एस. थानु
म्यूजिक संतोष नारायणन
जॉनर एक्शन थ्रिलर
रजनीकांत की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'कबाली' थिएटर में रिलीज हो चुकी है। 'कबाली' एक्शन थ्रिलर मूवी है, जिसे पीए रंजीत ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में रजनीकांत की हीरोइन राधिका आप्टे हैं। रजनीकांत ने फिल्म में एक ऐसे गैंगस्टर का रोल प्ले किया है, जो लोगों के लिए भलाई का काम करता है। फिल्म की ज्यादातर शूटिंग मलेशिया में हुई है।

कहानी...
कबाली (रजनीकांत) 25 साल से मलेशिया की एक जेल में बंद है। उसकी रिहाई का वक्त आ गया, लेकिन मलेशिया पुलिस और प्रशासन इस बात को लेकर चिंतित है कि उसे छोड़ना सही होगा या फिर उसकी सजा को जारी रखा जाए। काफी विचार-विमर्श के बाद उसे छोड़ दिया जाता है। जेल से निकलने के बाद कबाली पूरे मलेशिया का जायजा लेता है और पाता है कि गैंगस्टर टोनी ली (विंस्टन चाओ) की गैंग 43 ने वहां रह रहे इंडियंस को कैसे गलत धंधों में फंसाया हुआ है। कहीं बच्चे ड्रग्स की सप्लाई करते नजर आते हैं तो कहीं लड़कियों की खरीद-फरोख्त का धंधा चल रहा है। कबाली इस गैंग के खिलाफ मोर्चा खोल देता है। बीच-बीच में कबाली की पिछली कहानी भी आती है? फिर चाहे वह रूपा (राधिका आप्टे) के साथ उसकी लव स्टोरी हो, प्रेग्नेंट रूपा का बिछड़ना हो या फिर उसका गैंगस्टर बनना। कबाली कैसे गैंगस्टर बनता है? उसे जेल क्यों जाना पड़ता है और कैसे वह 43 गैंग का नामोनिशान मिटाता है? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
डायरेक्शन...
फिल्म का फर्स्ट हाफ कमजोर है। शुरुआत में करीब 30 मिनट तक यह बोझिल लगती है। इसके बाद फिल्म कुछ स्पीड पकड़ती है। फिल्म की स्टोरी और कैमरा शॉट्स अच्छे हैं। फिल्म में रजनीकांत की स्टाइल को दिखाती सिनेमेटोग्रॉफी और आर्टवर्क काबिल-ए-तारीफ है। सेकंड हाफ में कबाली द्वारा पत्नी रूपा की तलाश वाले सीन्स काफी इमोशनल हैं। कैसे एक पति (जो अब तक यह मानकर चल रहा था कि उसकी पत्नी मर चुकी है) अपनी पत्नी के जीवित होने की खबर मिलने के बाद उससे मिलने को उतावला होता है? यह फिल्म में बखूबी दिखाया गया है। हालांकि, फिल्म का डायरेक्शन उतना शानदार नहीं है, लेकिन सुपरस्टार रजनीकांत के फैंस के लिए तो बस रजनी का एक्शन देखने लायक है। डायरेक्टर ने फिल्म में उन शॉट्स को खासी तवज्जो दी है, जो सुपरस्टार के फैन्स को क्रेजी कर दें।
स्टार की परफॉर्मेंस...
65 साल के रजनीकांत कबाली के रोल में एकदम फिट बैठे हैं। उनके हंसने का अंदाज, कोट की आस्तीन से अचानक गन का निकालना, पत्नी की जुदाई में इमोशनल होना, हर सीन में बखूबी जमे हैं। राधिका आप्टे को ज्यादा स्पेस नहीं मिला है, लेकिन जितना भी मिला है, उतने में उन्होंने पूरा न्याय किया है। टोनी ली के रोल में विंस्टन चाओ ने अच्छा काम किया है। रजनीकांत की बेटी के रोल में धंशिका के रोल की तारीफ करनी होगी। कुल मिलाकर कहा जाए तो एक्टिंग के मामले में फिल्म एकदम फिट है।
फिल्म का म्यूजिक...
फिल्म का बेकग्राउंड म्यूजिक बढ़िया है। इसका एक सॉन्ग 'निरुप्पा दा' पहले से म्यूजिक चार्ट्स पर हिट हो चुका है। बाक़ी गाने भी ठीक हैं। हालांकि, रजनी की फिल्मों में उनके एक्शन सीन्स को तबज्जो दी जाती है। इसलिए म्यूजिक से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
देखें या नहीं...
अगर आप रजनीकांत के डाय हार्ट फैन हैं तो फिर यह फिल्म आपके लिए ही है। सोचें नहीं, बस थिएटर का रुख करें।

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