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Movie Review: 'आंखों देखी' / Movie Review: 'आंखों देखी'

dainikbhaskar.com

Mar 21, 2014, 03:45 PM IST

इस फिल्मी फ्राइडे कई फिल्में रिलीज हुई हैं। इन फिल्मों में रजत कपूर के निर्देशन में बनी ड्रामा फिल्म ‘आंखों देखी’ भी शामिल है।

Movie Review: Ankhon Dekhi
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यह एक मजाकिया फिल्म है, जिसमें एक व्यक्ति के सफर को दिखाया गया है। फिल्म की शूटिंग दिल्ली में हुई है। रजत कपूर की यह एक घरेलू फिल्म है, जो संयुक्त परिवार के महत्व को गहराई से दिखाती है।

कहानी:

फिल्म की कहानी बाबू जी (संजय मिश्रा) के इर्द-गिर्द घूमती है। बाबू जी पुरानी दिल्ली की एक गली के छोटे से मकान में अपने बड़े परिवार के साथ रहते हैं। उनके परिवार में अम्मा यानी सीमा भार्गव, उनके दो बच्चे रीटा-शम्मी और ऋषि चाचा (रजत कपूर) अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ रहते हैं।

बाबू जी के घर में दो कमरे हैं और थोड़ी सी खाली जगह है। इस घर में जगह वाकई बहुत कम है, लेकिन इसके बावूजद घर में सब काफी खुश हैं। घर में रह रहे सब लोग कभी मजाक करते हैं, तो कभी लड़ते भी हैं।

इसी बीच बाबू जी की फैमिली को पता चलता है कि गली का एक लड़का अज्जू, बेटी रीटा के साथ घूमता है। इसके बाद सभी अज्जू को सबक सिखाने की सोच लेते हैं, लेकिन हर वक्त अपनी बातों से दूसरों को मोह लेने की कला जानने वाले बाबू जी को लगता है कि अज्जू सच्चा और नेक है। बीच में ऐसा वक्त भी आ जाता है, जब हर वक्त कुछ न कुछ बोलते नजर आने वाले बाबू जी चुप्पी साध लेते हैं। बाबू जी की जिद थोड़ी अजीब रहती है। अपने इसी जिद्दी स्वभाव के चलते वह कभी अपने बनाएं दांडी मार्च पर निकल पड़ते हैं। अब फिल्म में आगे और क्या होता है, इसके लिए आपको सिनेमाघर का रुख करना पड़ेगा।

एक्टिंगः

फिल्म में बाबू जी का किरदार निभाने वाले संजय मिश्रा फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी हैं। वैसे, संजय पहले भी कई बार अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुके हैं, लेकिन इस बार उनकी एक्टिंग काफी अच्छी रही है। हां, रजत कपूर, सीमा भार्गव, बिजेंद्र काला, मनुऋषि चड्डा, माया, नमित दास सहित फिल्म के हर स्टार ने अपनी एक्टिंग से किरदार को पर्दे पर जानदार तरीके से पेश करने का प्रयास किया है।

निर्देशन:

बतौर डायरेक्टर रजत कपूर ने अपनी इस फिल्म की स्क्रिप्ट के साथ अच्छा न्याय किया है। उन्होंने ज्यादातर कलाकार को उनके किरदार के मुताबिक अच्छी फुटेज दी है। वहीं रजत ने फिल्म की स्टोरी को भी कहीं थमने नहीं दिया है। हां, फिल्म का क्लाइमैक्स कुछ थिएटर जैसा लगता है।

क्यों देखें फिल्म:

आज बॉलीवुड में ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपर कलेक्शन करने के हिसाब से बनाई जा रही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि बॉलीवुड में अच्छी फिल्में बनना बंद हो गई हैं। जी हां, अगर आपके पास समय है और आप एक अच्छी स्टोरी और अच्छे अभिनय वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है। फिल्म की कहानी में न कोई ज्यादा मसाला है, न ग्लैमर का तड़का, लेकिन इसके बाद भी फिल्म की रफ्तार धीमी नहीं होती है।

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