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Movie Review: सस्पेंस से भरपूर 'डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी' का पहला केस

दिबाकर बनर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म 'डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

Dainik Bhaskar

Apr 03, 2015, 11:34 AM IST
MOVIE REVIEW : Detective Byomkesh Bakshy

(फिल्म के एक सीन में सुशांत सिंह राजपूत)

फिल्म का नाम

डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी

क्रिटिक रेटिंग

3/5

स्टार कास्ट

सुशांत सिंह राजपूत, आनंद तिवारी, स्वास्तिका मुखर्जी, दिव्या मेनन और नीरज काबी

डायरेक्टर

दिबाकर बनर्जी

प्रोड्यूसर

आदित्य चोपड़ा

संगीत

Various Artists

जॉनर

क्राइम थ्रिलर

दिबाकर बनर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म 'डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी, शरदिंदु बंदोपाध्याय द्वारा रचा गया काल्पनिक पात्र है, जो 1932 से 1970 के बीच काफी पॉपुलर हुआ था। दिबाकर बनर्जी इसी कैरेक्टर को फिल्म के जरिए दर्शकों के सामने लाए हैं।


क्या है फिल्म की कहानी

ब्योमकेश बख्शी एक साधारण-सा इंसान है, जो अन्य डिटेक्टिव की तरह सिर पर हैट नहीं लगाता और न ही मुंह में पाइप फंसाए दिखाई देता है। वह तो एक आम भारतीय की तरह धोती-कुर्ता में दिखाई देता है। इस बात का उल्लेख यहां इसलिए करना जरूरी है कि अब तक आम लोगों के मन में डिटेक्टिव की छवि हैट और पाइप वाले शख्स की ही है। खैर, ब्योमकेश को अपनी जिंदगी का पहला केस मिलता है, जो कि एक मर्डर केस है। अजीत बनर्जी (आनंद तिवारी) उनके पास आता है और कहता है कि उसके पिता कई दिनों से गायब हैं। ब्योमकेश अजीत के पिता की मिसिंग मिस्ट्री को सॉल्व करने निकलते हैं। इस बीच वे गजानन सिकदर (डॉ. कौशिक घोष) तक पहुंच जाते हैं, जिनकी फैक्ट्री में अजीत के पिता की मौत हुई। अब ब्योमकेश के पास अजीत के पिता की मौत की गुत्थी को सुलझाना ही अहम मकसद है। मामले में नया ट्विस्ट तब आता है, जब गजानन का कत्ल कर दिया जाता है। इस बीच ब्योमकेश की जिंदगी में अंगूरी देवी (स्वास्तिका मुखर्जी) की एंट्री होती है, जो ब्योमकेश को राह भटकाती है और केस सुलझने की जगह उलझता जाता है। जांच के दौरान ब्योमकेश को पता चलता है कि अजीत के पिता की मौत के तार कोलकाता में चल रही ड्रग डीलिंग से जुड़े हैं। क्या सच में अजीत के पिता का खून हुआ है और यदि हां, तो कैसे इसके तार ड्रग डीलिंग से जुड़े हैं? अंगूरी देवी क्यों मामले को उलझाती है? ऐसे कई सवाल आपके जेहन में होंगे, लेकिन इनके जवाब जानने के लिए आपको सिनेमाघरों की ओर कदम बढ़ाने होंगे।

दिबाकर बनर्जी का निर्देशन

डायरेक्टर दिबाकर बनर्जी ने इससे पहले 'खोसला का घोसला', ओए लकी लकी ओए' और 'लव सेक्स और धोखा' जैसे फिल्में दी हैं। लगभग हर फिल्म के लिए उनके निर्देशन को सराहना मिली है। एक बार फिर उनके काम की तारीफ करनी होगी। फिल्म में शुरुआत से अंत तक सस्पेंस है। हर एक सीन पर उन्होंने मजबूती से काम किया है। एक जासूस की नजर कैसे छोटे बर्तन से लेकर सड़कों और बसों पर लगे पोस्टर्स तक में मामले के सुराग तलाशती है, इसे दिबाकर ने बड़े ही अच्छे तरीके से दिखाया है। बता दें, दिबाकर का डिटेक्टिव घुमा-फिरा कर नहीं बल्कि स्ट्रेट फॉरवर्ड बात करने में यकीन करता है, यही उसकी सबसे बड़ी खासियत भी है। 1940 के दशक को दिबाकर बनर्जी, काफी हद तक पर्द पर दिखाने में सफल हुए हैं।

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MOVIE REVIEW : Detective Byomkesh Bakshy

स्टार कास्ट और एक्टिंग 

 
सुशांत सिंह राजपूत ने ब्योमकेश बख्शी के किरदार में जान डाली है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस रोल के लिए उनसे अच्छा कोई नहीं हो सकता था। फिल्म में सुशांत ने एक नौसिखिया डिटेक्टिव की भूमिका निभाई है, जो गलती कर सीखता है। कई गुत्थियों को सुलझाकर अपना केस सॉल्व करने में कामयाब होता है।
 
बतौर विलेन नीरज काबी की एक्टिंग भी शानदार है, उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को बांध रखा है। स्वास्तिका मुखर्जी रियल लाइफ में 14 साल की बेटी की मां हैं, लेकिन रील लाइफ में उन्हें देखकर इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल होगा। अंगूरी देवी के किरदार में वे एकदम फिट बैठी हैं। दिव्या मेनन, आनंद तिवारी सहित बाकी स्टार्स के हिस्से में जो काम आया, उसे बखूबी किया है।
 

सीक्वल का संकेत

 
फिल्म के क्लाइमेक्स से यह साफ है कि डायरेक्टर बनर्जी जल्द ही इसका सीक्वल लाएंगे। दरअसल, बाकी हिंदी फिल्मों से हटके इस फिल्म का विलेन अभी मरा नहीं है। 'ब्योमकेश तुमने मेरी दोस्ती देखी है, दुश्मनी नहीं' इन लाइन्स के साथ फिल्म खत्म होती है। जिससे साफ है कि जल्द ही इस डिटेक्टिव सीरीज का दूसरा भाग आएगा। वेल, ढेर सारी मिस्ट्री और ट्विस्ट के बाद, नौसिखिया ब्योमकेश अपना पहला केस सॉल्व करता है, उम्मीद है दूसरे केस में वह ज्यादा परिपक्वता दिखाएगा। 
 

देखें या नहीं?


2015 की शुरुआत से अब तक कई फिल्में रिलीज हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर माइंडलेस सिनेमा था। इस बार ऐसा नहीं है, फिल्म देखने के लिए आपको दिमाग की जरूरत पड़ेगी, इसलिए उसे घर पर रखकर कतई न जाएं। फिल्म में सस्पेंस है, ड्रामा है लेकिन एंटरटेनमेंट की कमी है। यदि मौज-मस्ती के लिए आप कोई फिल्म देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपके लिए बिल्कुल भी नहीं है। 
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MOVIE REVIEW : Detective Byomkesh Bakshy
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