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MOVIE REVIEW: OMG से बेहतर कर पाने में आया 'धर्म संकट..'

शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म 'धर्म संकट में' रिलीज हो गई है

Dainik Bhaskar

Apr 10, 2015, 11:39 AM IST
Movie Review: Dharam Sankat Mein
('धरम संकट में' का पोस्टर)

फिल्म का नाम

धरम संकट में

क्रिटिक रेटिंग

2.5/5

स्टार कास्ट

परेश रावल, अनु कपूर, नसीरुद्दीन शाह

डायरेक्टर

फवाद खान

बैनर

वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स

संगीत

Various Artists

जॉनर कॉमेडी फिल्म
मुंबई: सोचिए अगर किसी हिन्दू को अधेड़ उम्र में पता चले कि उसका जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ था और तो और वह जिन्हें अपना माता-पिता मानता आया है, वे उसके रियल पेरेंट्स नहीं है। वह गोद ली हुई औलाद है, तो उस इंसान पर क्या बीतेगी। इसी थॉट को डायरेक्टर फवाद खान ने शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म 'धरम संकट में' दिखाने की कोशिश की है।
वैसे, इन दिनों धर्म और आस्था पर कई फिल्में बन रही हैं। आमिर खान की 'पीके' और बाबा राम रहीम के चमत्कारों से भरी 'एमएसजी' रिलीजियस टॉपिक पर बेस्ड फिल्में है। परेश रावल और अक्षय कुमार इसी सेंसिटिव टॉपिक पर 2012 में फिल्म लाए थे 'ओ माई गॉड'। यह फिल्म दर्शकों और क्रिटिक्स द्वारा बेहद सराही गई थी। 3 साल बाद इसी सफल मुद्दे को दर्शकों के सामने रखने दोबारा पर्दे पर लौट आए है परेश रावल। लेकिन इस बार दर्शकों पर उनका जादू चलना मुश्किल लगता है। जहां परेश की पिछली फिल्म में अक्षय कुमार जैसा स्टार कहानी का अहम किरदार था। वहीं, इस बार पूरी फिल्म खुद परेश, अनु कपूर के आसपास घूमती है।
कहानी
अहमदाबाद का रहने वाला गुजराती व्यवसायी धरमपाल त्रिवेदी (परेश रावल) पूजा-पाठ से दूर रहता है। वह अपनी खूबसूरत वाइफ, एक बेटे और एक बेटी के साथ हंसी-खुशी जिंदगी बिता रहा है। उसकी लाइफ में तब तूफान आ जाता है, जब मां की मौत के बाद वह बैंक जाकर उनका लॉकर खोलता है। वहां मिले खत और दूसरे कागजात से धरमपाल को पता चलता है कि वह एक मुसलमान की औलाद है और उसे मां ने अनाथालय से गोद लिया था। अब वह अपने पिता से मिलता चाहता है।
पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम वकील नवाब महमूद नजीम (अनु कपूर) को धरमपाल अपनी इस पहचान के बारे में बताता है। कुछ दिन बाद धरमपाल के सामने दूसरे सच आने शुरू हो जाते है। दूसरी ओर नीलानंद का किरदार निभाने वाले नसीरुद्दीन शाह भक्तों को ठगने वाले बाबा है। कैसे धरमपाल अपने पिता को तलाशता हैं। साथ ही, वकील अनु कपूर के साथ मिलकर नीलानंद बाबा का भंडाफोड करते है, यह सब जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा।
एक्टिंग
धरमपाल के किरदार में परेश रावल काफी जंचे हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग भी देखने लायक है। अनु कपूर की उर्दू जुबान का भी कोई जवाब नहीं है। नसीरुद्दीन शाह स्टाइलिश बाबा के तौर पर नजर आए हैं। हालांकि, फिल्म में नसीर साहब के किरदार को और भी ज्यादा बेहतर बनाया जा सकता था।
अगली स्लाइड में पढ़ें, फिल्म का शेष रिव्यू...
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