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'ढिश्कियाऊं'

सनमजीत सिंह तलवार डायरेक्टेड और शिल्पा शेट्टी प्रोड्यूस एक्शन फिल्म ‘ढिश्कियाऊं’ फिल्मी फ्राइडे पर रिलीज हो गई है। फिल्म में हरमन बावेजा, सनी देओल और आयशा खन्ना लीड रोल में हैं।

Dainik Bhaskar

Mar 28, 2014, 01:54 PM IST
Movie Review: Dishkiyaoon

‘इस छर्रे को बंदूक में डाल, ट्रिगर दबा... कारतूस बनके निकलेगा और सबको फोड़ डालेगा’, ये डायलॉग फिल्म में कुछ फोड़े या न फोड़े, लेकिन समनजीत सिंह की यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों को जरूर फोड़ती है। इस एक्शन फिल्म में एक बड़ा खेल है, जो बहुत ही ज्यादा बोरिंग और शायद समझ से भी बाहर है।

अगर आप इस फिल्म को सनी देओल और हरमन बावेजा की एक्टिंग देखने के लिए जाएंगे, तो निराश होंगे। एक्ट्रेस आयशा ने भी एक तरह से दर्शकों को निराश ही किया है। रिलीज से पहले ये कहा जा रहा था कि फिल्म में शिल्पा का आइटम नंबर भी है, लेकिन फिल्म देखने के बात यह पता चलता है कि शिल्पा का आइटम नंबर सिर्फ प्रमोशन का एक पार्ट था।

कहानीः

फिल्म की कहानी विकी (हरमन बावेजा) से शुरू होती है, जो अपने गैंगस्टर बनने की कहानी लकवा (सनी देओल) को सुना रहा है। विकी की कहानी उसके बचपन से शुरू होती है, जिसमें वो लकवा को बताता है कि वह कैसे एक साधारण लड़के से गैंगस्टर बन गया। विकी बचपन में अपने स्कूल के दोस्त से बहुत पिटता है और उससे छुटकारा पाने के लिए वो एक दिन मोटा टोनी (प्रशांत नारायण) से मिलता है। टोनी उसे दुनिया से लड़ने और बड़ा गैंगस्टर बनने के तरीके बताता है। इसके बाद विकी भी गैंगस्टर की दुनिया में अपने पांव जमाने के लिए जुट जाता है।

सबसे बड़े गैंगस्टर की कुर्सी पर बैठने के लिए विकी की राह में कई बाधाएं हैं, लेकिन इसके बाद भी वह हार नहीं मानता और आगे बढ़ता है। वहीं एक दिन विकी की मुलाकात मीरा (आयशा खन्ना) से होती है। मीरा को देखते ही, विकी को उससे प्यार हो जाता है। मीरा चाहती है कि विकी जुर्म की दुनिया को छोड़कर उसका हो जाए, लेकिन विकी का लक्ष्य बड़ा गैंगस्टर बनने का है, जिसके चलते वह जुर्म की दुनिया को नहीं छोड़ पाता है।

कहानी में नया मोड़ तब आता है, जब फिल्म में खलीफा का आदमी टोनी को मार देता है। इसके बाद विकी, खलीफा और उसके आदमी से बदला लेने की सोचता है और उनका खात्मा करने के लिए उन्हीं के साथ मिल जाता है। अब विकी इन गैंगस्टर्स को खत्म कर, क्या खुद एक बड़ा गैंगस्टर बनता है और जिस लकवा को विकी ने अपनी कहानी सुनाई, वो असल में कौन है और उसका क्या खेल है। ये सब जानने के लिए आपको सिनेमाघर का रुख करना पड़ेगा।

एक्टिंगः

फिल्म में सनी देओल का रोल बहुत कम है, जिसके चलते वो कुछ ज्यादा खास नहीं कर सके हैं। वहीं हरमन अपने रोल में कहीं खोए हुए से दिखे है। पूरी फिल्म उन्हीं के इर्द-गिर्द है, लेकिन इसके बावजूद अपने अभिनय से वह फिल्म में कोई जान नहीं डाल सके हैं। हां, इन दोनों स्टार्स के अलावा प्रशांत ने मोटा टोनी के रोल को बेहतरीन ढंग से किया है। उनकी एक्टिंग और डायलॉग्स फिल्म में अच्छे लगे हैं। वहीं आयशा का फिल्म में होना या न होना बराबर ही है। इन स्टार्स के अलावा पुलिस की भूमिका में आदित्य पंचोली भी कुछ खास नहीं कर पाए हैं।

निर्देशनः

सनमजीत सिंह फिल्म के निर्देशक हैं। उनकी फिल्म पर कहीं भी पकड़ देखने को नहीं मिलती। उन्होंने अपनी इस फिल्म को एक्शन फिल्म के रूप में बनाया है, लेकिन यहां एक्शन तो पूरी तरह से गायब ही है। फिल्म में एक्शन से ज्यादा स्टार्स एक दूसरे से बात करते हुए झगड़ रहे हैं। कमजोर स्क्रिप्ट और स्टार्स का दमदार अभिनय न कर पाना फिल्म की सबसे बड़ी कमी है।

म्यूजिकः

फिल्म की तरह उसका म्यूजिक भी कुछ खास नहीं है। फिल्म में कोई ऐसा गाना नहीं है, जिसे आप सिनेमाघर से बाहर निकलकर गुनगुनाए। पलाश मुचाल ने ‘ढिश्कियाऊं’ में अपना म्यूजिक दिया है।

क्यों देखें फिल्म ?

अगर आपके पास बहुत ज्यादा समय है और आप अच्छी स्टोरी और अच्छे अभिनय के बिना भी कोई फिल्म देखना पसंद करते हैं, तभी इस फिल्म को देखने सिनेमाघर जाएं। हां, अगर आप फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघर ये सोचकर जाए कि फिल्म में सनी देओल हैं और उनके बेहतरीन डायलॉग्स और एक्शन सीन्स देखने को मिलेंगे, तो आप सिर्फ निराश ही होंगे।

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