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MOVIE REVIEW: यशराज की हटकर लव स्टोरी 'दम लगा के हइशा'

Dainik Bhaskar

Feb 27, 2015, 12:19 PM IST

आयुष्मान खुराना और भूमि पेडणेकर के अभिनय से सजी फिल्म 'दम लगा के हइशा' सिनेमाघरों में आ चुकी है।

MOVIE REVIEW: Dum Laga Ke Haisha
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फिल्म का नाम

दम लगा के हइशा

क्रिटिक रेटिंग

2.5/5

स्टार कास्ट

आयुष्मान खुराना, भूमि पेडणेकर और संजय मिश्रा

डायरेक्टर

शरत कटारिया

प्रोड्यूसर

यशराज फिल्म्स

संगीत

अनु मलिक

जॉनर

लव ड्रामा

आयुष्मान खुराना और भूमि पेडणेकर के अभिनय से सजी फिल्म 'दम लगा के हइशा' सिनेमाघरों में आ चुकी है। पिछले शुक्रवार रिलीज हुई 'बदलापुर' के बाद इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस वाकई दम लगाने की सफल कोशिश की है। फिल्म की टैग लाइन है 'लव कम इन ऑल साइजेस' और यह पूरी फिल्म की कहानी को डिस्क्राइव करती है। अब तक 'भेजा फ्राई', 'फिल्लम सिटी', 'हम तुम और शबाना' जैसी फिल्मों की कहानी लिख चुके शरत कटारिया ने इस फिल्म के जरिए डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखा है। वैसे, फिल्म की लीड एक्ट्रेस भूमि पेडणेकर की भी यह पहली बॉलीवुड फिल्म है।

फिल्म की कहानी

फिल्म एक लव स्टोरी है। कहानी में दो पात्र है प्रेम प्रकाश तिवारी (आयुष्मान खुराना), जो कुमार शानू का बहुत बड़ा प्रशंसक है और दूसरी संध्या वर्मा (भूमि पेडणेकर), जो खूबसूरत लड़की है, लेकिन उसका वजन 85 किलो है। संध्या के जीवन में दो ही ख्वाब होते हैं। एक, वह टीचर बनना चाहती है और दूसरा यह कि आम लड़कियों की तरह वह भी एक ऐसा लाइफ पार्टनर चाहती है, जो उसे हमेशा प्यार करे।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब प्रेम और संध्या की शादी होती है। दरअसल, प्रेम के पिता (संजय मिश्रा) ने कई सालों पहले अपने दोस्त को वादा किया था कि वे उनकी बेटी को अपने घर की बहु बनाएंगे। पिता का यह वादा प्रेम की जिंदगी बदल देता है, क्योंकि उसने कभी यह नहीं सोचा था कि उसकी शादी एक हैवीवेट लड़की से होगी, लेकिन पिता की मर्जी के आगे उसकी एक नहीं चलती। शादी के बाद जहां संध्या प्रेम में अपने सपनों का लाइफ पार्टनर देखती है, वहीं प्रेम हमेशा उससे दूरी बनाने की कोशिश करता है। रिश्ते को लेकर उनके बीच हमेशा नोंक-झोंक होती है।
इस बीच प्रेम की मां उसे 'दम लगा के हइशा' नाम की एक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कहती है, जिसमें उसे पत्नी को पीठ पर सवार कर दौड़ लगानी होती है। प्रेम मां को लाख मना करता है, लेकिन हारकर उसे इसमें भाग लेना ही पड़ता है। क्या प्रेम और संध्या यह प्रतियोगिता जीतते हैं, क्या वे एक-दूसरे के करीब आते हैं? इस सवालों के जवाब ढूंढने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा।

शरत कटारिया का डायरेक्शन

शरत कटारिया ने यशराज के बैनर तले बनी इस फिल्म से निर्देशन की शुरुआत की है। बतौर राइटर शरत की पिछली फिल्मों को सराहना नहीं मिली, लेकिन 'दम लगा के हइशा' के लिए उनके डायरेक्शन की तारीफ बनती है। इस फिल्म के जरिए उन्होंने दर्शकों को एक अच्छी कॉमेडी दी है।

आगे की स्लाइड्स में पढ़े शेष रिव्यू...

MOVIE REVIEW: Dum Laga Ke Haisha
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एक्टिंग 

 
आयुष्मान खुराना ने प्रेम प्रकाश तिवारी के किरदार को बखूबी जिया है। भूमि की डेब्यू फिल्म है और वे अपने रोल में एकदम फिट बैठी हैं। बाकी स्टार्स ने भी अपनी-अपनी जगह ठीकठाक काम किया है।
 

संगीत

 
कुमार शानू ने लंबे अरसे बाद फिल्मों में वापसी की है। चूंकि फिल्म की कहानी 90 के दशक के आसपास की है और लीड किरदार प्रेम को भी उनका फैन बताया गया है, इसलिए उन्हें फिल्म की जरूरत कहा जा सकता है और उस दौर के हिसाब से उनके सॉन्ग्स हिट हैं। वैसे, बता दें कि फिल्म का संगीत अनु मलिक ने दिया है और बैकग्राउंड स्कोर एंड्रिया गेरा का है। मालिनी अवस्थी और राहुल राम की आवाज में 'सुंदर सुशील' और कुमार शानू का 'दर्द करारा' जैसे गाने फिल्म की थीम के हिसाब से सही हैं।
 

देखें या नहीं

 
फिल्म एक साफ-सुथरी लव स्टोरी है, साथ ही इसमें कॉमेडी का तड़का भी लगाया गया है। कुल मिलाकर कहें तो यह यशराज के बैनर तले अब तक बनीं लव स्टोरीज से से हटकर है और यदि आप घिसी-पिटी प्रेम कहानियों से बोर हो गए हैं तो 'दम लगा के हइशा' में आपको नयापन मिलेगा।
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