--Advertisement--

'एक हसीना थी, एक दीवाना था'

प्लॉट: यह लव ट्राएंगल है, जिसमें एक हीरो को पिछले जन्म के प्रेमी की आत्मा बताया गया है।

Dainik Bhaskar

Jul 01, 2017, 10:40 AM IST

Story : यह फिल्म 1968 में बनी फिल्म ‘नील कमल’ जैसी ही है, जिसमें राजकुमार को पिछले जन्म के प्रेमी की आत्मा बताया गया था आैर जिसकी एक आवाज पर मनोज कुमार से शादी कर चुकी वहीदा रहमान नींद में चलते हुए खिंची चली आती थीं। लगभग ऐसे ही तिकोने प्रेम की इस फिल्म में नताशा (नताशा फर्नांडीज) अर्चेतन द्ध जैसी स्थिति में प्रेमात्मा देवधर (शिवदर्शन) से मिलने पहुंच जाती है।

देवधर को उस प्रेमी की आत्मा बताया गया है, जो नताशा की नानी से प्यार करता था और अब उस अधूरे प्रेम को नताशा के साथ पूरा करना चाहता है। फिल्म में इस आत्मा का प्रवेश तब होता है जब नताशा की सन्नी (उपेन पटेल) के साथ शादी की तैयारिया चं ल रही होती हैं। फिल्म में बहुत सारे राज क्लाइमेक्स पर जाकर खुलते हैं, जो सब बेसिर पैर के नजर आते हैं। अच्छी लोकेशन पर कमजोर कहानी लड़खड़ा कर रह जाती है।

Acting: फिल्म निर्माता सुनील दर्शन के पुत्र शिव दर्शन अपने कॅरिअर की दूसरी फिल्म में भी कुछ नहीं कर पाए। उनकी डायलाॅग डिलीवरी भी अच्छी नहीं रही। उपेन पटेल ने ठीक ठाक काम किया है। नताशा फर्नांडीज ने अपनी पहली ही फिल्म में लुभाया है।

Direction: निर्देशन ठीक ठाक है, लकिे न कमजोर कहानी पर्दे पर ठीक से उतर नहीं पाई।

Music: लगभग 20 साल पहले टी-सीरीज के गुलशन कुमार की हत्या के आरोपी बने नदीम-श्रवण की जोड़ी वाले नदीम ने दुबई में बैठकर इस फिल्म का सगं ीत दिया है। गानों में अरसे बाद मैलोडी सुनाई दी है।

X
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..