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Movie review: ‘गुलाब गैंग’

Movie review: ‘गुलाब गैंग’

Dainik Bhaskar

Mar 07, 2014, 12:44 PM IST
Movie review: ‘Gulaab Gang’
फिल्म ‘गुलाब गैंग’ में माधुरी के किरदार का नाम ‘रज्जो’ है, जो समाज द्वारा प्रताड़ित की गईं महिलाओं का एक आश्रम चलाती हैं। इस आश्रम की महिलाएं सेल्फ डिपेंड होती हैं। वो आश्रम में हैंड मेड साडियां, मसाले और अन्य सामग्री बनाती हैं। ये महिलाएं अपने हक के लिए किसी से भी लड़ाई करने को तैयार रहती हैं, साथ ही जरुरत पड़ने पर हथियार का इस्तेमाल भी करती हैं। इस आश्रम में मौजूद महिलाओं के जूडो-कराते की ट्रेनिंग भी दी जाती है।
इसी बीच, रज्जो की मुलाकात वहां के स्थानीय विधायकी चुनाव के उम्मीदवार पवन से होती है, जो सुमित्रा देवी (जूही चावला) के आशीर्वाद से चुनाव लड़ रहा होता है। सुमित्रा को एक बड़े और अहंकारी राजनेता के रूप में दिखाया गया है। सुमित्रा राजनीति की बारीकियां अच्छी तरह जानती है और वो सत्ता हासिल करने के लिए रज्जो को लुभाने और उसे दबाने की पूरी कोशिश करती है।
रज्जो को सुमित्रा की कुछ बातें खराब लगती हैं, जिस वजह से वो सुमित्रा के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार हो जाती है। रज्जो का सपना होता है कि उसके गांव में लड़कियों के लिए एक स्कूल हो और सुमित्रा उसके इस प्लान में रोड़ा बनी रहती है। रज्जो राजनीति में उतर तो जाती है, लेकिन सुमित्रा के कानून दांव-पेंचो को नहीं समझ पाती है और उसके रसूख के आगे चुनाव हार जाती है। इस बीच में रज्जो और सुमित्रा देवी में जमकर टकराव होता है। दोनों ने फिल्मों में शानदार डायलॉग बोले हैं।
फिल्म का क्लाइमैक्स ये है कि सुमित्रा रज्जो के गांव में उसी के घर पर उसे होली की बधाई देने जाती है और मिठाई के डिब्बों के झोले में बंदूक लेकर जाती है। जब उसकी आंखो में मिर्च पड़ जाती है, तो वो अंधा-धुंध गोली चलाने लगती है। ऐसे में माधुरी हथियार से उसकी कलाई काट देती है। बाद में कोर्ट सुमित्रा और रज्जो, दोनों को उनके-उनके अपराधों के लिए जेल भेज देती है।
माधुरी दीक्षित और जूही की एक्टिंग
‘गुलाब गैंग’ के डायरेक्टर सौमिक सेन ने फिल्म में दो ऐसी एक्ट्रेसेस पर दांव लगाया, जिनके नाम कई सुपरहिट फिल्में दर्ज हैं। माधुरी और जूही ने भी अपनी एक्टिंग और एक्सप्रेशन से दर्शकों का पैसा वसूल करने की पूरी कोशिश की है। एक्ट्रेसेस की दम पर सौमिक इस फिल्म को हिट कराना चाहते हैं। हालांकि, फिल्म के कुछ सीन्स में अधूरापन नजर आता है, जिसकी भरपाई माधुरी और जूही ठीक से नहीं कर सकीं, लेकिन इससे फिल्म में दोनों की एक्टिंग पर कोई सवाल खड़ा नहीं होता।
माधुरी ने ‘डेढ़ इश्किया’ में अपने एक्सप्रेशन से काफी वाह-वाही लूटी थी। ऐसे में उन्हें इस फिल्म से ढेर सारी उम्मीद होगी। दूसरी तरफ, जूही ने फिल्म में निगेटिव किरदार को बखूबी निभाया है। फिल्म की अच्छी बात ये है कि इसकी कहानी एक फ्लो में चली है, जो दर्शकों पर असर छोड़ने में कामयाब रही है। यदि डायरेक्शन और एडिटिंग पर थोड़ा और काम किया जाता, तो फिल्म और भी बेहतर बन सकती थी।
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