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Movie Review: 'हार्टलेस'

'हंसी तो फंसी' के अलावा इस शुक्रवार 'हार्टलेस' भी रिलीज़ हुई है.यह एक रोमांटिक मेडिकल थ्रिलर फिल्म है जिसे एक्टर से डायरेक्टर बने शेखर सुमन ने निर्देशित किया है. बतौर निर्देशक यह उनकी पहली फिल्म है.

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2014, 11:04 AM IST
movie review: heartless

'हंसी तो फंसी' के अलावा इस शुक्रवार 'हार्टलेस' भी रिलीज़ हुई है। यह एक रोमांटिक मेडिकल थ्रिलर फिल्म है, जिसे एक्टर से डायरेक्टर बने शेखर सुमन ने निर्देशित किया है। बतौर निर्देशक यह उनकी पहली फिल्म है।

फिल्म की कहानी घूमती है आदित्य (अध्ययन सुमन) के इर्द-गिर्द जो एक अमीर मां गायत्री (दीप्ति नवल) का बेटा है।उसे दिल की बीमारी है और उसका ऑर्गन ट्रांसप्लांट होना है।

वह जीना नहीं चाहता, मगर एक टूर के दौरान उसकी मुलाकात दुबई के होटल में बतौर रिसेप्शनालिस्ट काम करने वाली रिया से होती है। आदित्य रिया को चाहने लगता है और इसी वजह से उसकी जीने की इच्छा जाग उठती है।आदित्य की मां रिया को बिलकुल पसंद नहीं करती। इसी दौरान आदित्य की तबीयत बिगड़ने लगती है।

आदित्य अपनी सर्जरी अपने सर्जन दोस्त शेखर सुमन से करवाता है। इसी दौरान कई उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं।क्या आदित्य की सर्जरी सफल हो पाती है? क्या वह रिया को अपनी हमसफ़र बना पाता है? फिल्म की कहानी इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढते हुए आगे बढ़ती है।

निर्देशन: शेखर सुमन की यह फिल्म हॉलीवुड फिल्म 'अवेक' से प्रेरित है। शेखर सुमन ने इस फिल्म को दिल से बनाया है। उन्होंने इसे अपने बड़े बेटे आयुष को समर्पित किया है, जिसकी 11 साल की उम्र में मौत हो गई थी। आयुष को दिल की बीमारी थी। सुमन ने अपने बेटे को खोने का दर्द इस फिल्म के जरिए बयां करना चाहा है। निर्देशन के मामले में शेखर सुमन कहीं न कहीं चूकते नजर आए हैं। फिल्म की कहानी कहीं-कहीं बेहद बोझिल लगने लगती है।

एक्टिंग: निर्देशन से ज्यादा एक्टिंग कमजोर है। इस फिल्म के जरिए शेखर सुमन ने अपने बेटे अध्ययन सुमन के डूबते करियर को पार लगाने की कोशिश की है। अध्ययन ने 2009 में फिल्म 'हाल ए दिल' से बॉलीवुड में एंट्री की थी। फिल्म तरह फ्लॉप रही थी।

इसके बाद वह इक्का-दुक्का फिल्मों में नजर आए, मगर बात नहीं बनी। इस फिल्म के जरिए उनके पिता ने उन्हें बॉलीवुड में जगह बनाने का एक और मौका दिया, मगर इसमें भी अध्ययन कुछ ज्यादा सफल होते नहीं दिख रहे। फिल्म में उनकी एक्टिंग बेहद कमजोर है।

सीन के मूड के हिसाब से उनके चेहरे पर एक्सप्रेशन आ ही नहीं पाते और इसी वजह से यह फिल्म आपको कनेक्ट नहीं कर पाती। दिल की बीमारी को दिखाने वाली फिल्म ही दर्शक के दिल में नहीं उतर पाती। रही बात फिल्म की एक्ट्रेस एरियाना अयाम की तो उनका हाल भी अध्ययन की तरह ही है। एक्टिंग में उन्हें अभी बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। वहीं, दीप्ति नवल और ओम पुरी ने अपने किरदारों को अच्छी तरह निभाया है।

कुल मिलाकर कहा जाए तो इस फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं कि अगर आप इसे मिस कर दें तो पछतावा होअगर वीकेंड में कुछ और करने लायक हो तो इस फिल्म को देखने का रिस्क न ही उठाएं तो बेहतर है!

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