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MOVIE REVIEW : हमशकल्स

'हमशकल्स' कंफ्यूजन पर आधारित फिल्म है, जिसमें सैफ , रितेश और राम ट्रिपल रोल में हैं।

Dainik Bhaskar

Jun 20, 2014, 10:23 AM IST
MOVIE REVIEW : HUMSHAKALS
(फोटो : 'बाएं से, 'हमशकल्स' के एक सीन में राम कपूर, सैफ अली खान और रितेश देशमुख। )
पिछले साल साजिद खान की फिल्म आई थी 'हिम्मतवाला', जो बॉक्स ऑफिस पर मुंह के बल गिरी थी और अब आई है 'हमशकल्स' जिसे झेलने की हिम्मत हिम्मतवाले भी नहीं कर सकते। जो लोग बेवकूफी को कॉमेडी और बचकानेपन को हास्य समझते हैं तो यह फिल्म उनके लिए है। वैसे बता दें कि पहले दिन दूसरे शो में 25-30 दर्शक फिल्म देखने पहुंचे थे, लेकिन फर्स्ट हाफ के बाद यह संख्या भी आधी बची। चूंकि पैसा देकर टिकट खरीदा था, इसलिए कुछ लोग इंटरवल में खुद को यह कहकर तसल्ली दे रहे थे कि फिल्म में अब मजा आएगा, लेकिन मूवी खत्म होते-होते भी मजा नहीं आ पाया। हॉल छोड़ते वक्त कुछ लोगों की जुबान से साफ़ सुना जा सकता था कि टिकट के पैसे पानी में गए।
क्या है फिल्म की कहानी :
फिल्म की कहानी अरबों डॉलर्स की कंपनी के मालिक अशोक सिंघानिया (सैफ अली खान) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका मामा कंस उर्फ कुंवर अमरनाथ सिंह (राम कपूर) उसके खिलाफ साजिश रचता रहता है। कंस खुद कंपनी का मालिक बनने का ख्वाब देखता है, जिसके लिए वह अशोक को पागलखाने भेजना चाहता है और इसके लिए वह एक डॉक्टर पर करोड़ों रुपए खर्च करता है ताकि वह कोई ऐसा केमिकल बनाए, जिससे वह अशोक को पागल साबित कर सके।
वह डॉक्टर एक सीक्रेट फ़ॉर्मूला MAD (माइंड अल्टरिंग ड्रग) बनाता है, जो लोगों के डीएनए बदल देता है और उन्हें कुत्ता बना देता है। इस फॉर्मूले के दम पर कंस अशोक और उसके दोस्त कुमार (रितेश देशमुख) को पागल करार देकर पागलखाने भेज देता है, जहां पहले से ही दो पागल मौजूद है, जो अशोक और कुमार के हमशक्ल है और संयोग से उनका नाम भी अशोक और कुमार है। इसी पागलखाने से पूरी पागलपंती तब शुरू होती है, जब असली अशोक और कुमार की जगह नकली अशोक और कुमार को छोड़ दिया जाता है।
पूरी कहानी दोनों ही हमशकल्स में कंफ्यूजन को लेकर आगे बढ़ती है। बता दें कि इस कहानी को आगे बढ़ाने के लिए कंस यानी राम कपूर का भी एक हमशक्ल डाला गया है, जो असली अशोक और कुमार को पागलखाने में मिलता है। तीनों ही अभिनेताओं सैफ, रितेश और राम के तीसरे हमशक्ल को फिल्म के क्लाइमेक्स के लिए डाला गया है। ऐसा लगता है जैसे साजिद खान ने फैलते रायते को समेटने के लिए ट्रिपल रोल का फॉर्मूला चुना।
साजिद खान का निर्देशन :
'हमशकल्स' एक माइंडलेस कॉमेडी है और शायद इसीलिए साजिद खान ने अपने दिमाग का सही इस्तेमाल नहीं किया। फिल्म में अशोक (सैफ अली खान) एक बिलियन डॉलर कंपनी का मालिक है और अपने बोर्ड मेंबर्स, जो कि सभी विदेशी हैं, को हिंदी में स्पीच देता है। इतना ही नहीं, लंदन के एक पब में विदेशी ऑडियंस के बीच अशोक हिंदी में स्टैंड-अप कॉमेडी करते नजर आता है। ऐसे ही कुछ सीन्स हैं, जो यह बताते हैं कि साजिद का निर्देशन कितना लचर रहा है। 'हिम्मतवाला' के बाद एक बार फिर साजिद निर्देशन में फेल रहे।
एक्टिंग :
एक ओर जहां साजिद खान का निर्देशन लचर है, वहीं सैफ, रितेश, राम और बिपाशा सहित सभी स्टार्स की एक्टिंग भी कोई खास नहीं है। सैफ ने यह फिल्म क्या सोचकर साइन की यह बात समझ से परे है। वहीं,रितेश देशमुख के लिए भी यही बात लागू होती है। रही बात राम कपूर की तो उन्होंने अपने किरदार से थोड़ा इम्प्रेस करने की कोशिश की है मगर जिस फिल्म में कहानी का ही अता-पता न हो, वहां एक्टर्स भी क्या कर सकते हैं? वहीं, फिल्म की एक्ट्रेसेस ईशा गुप्ता, तमन्ना भाटिया और बिपाशा बसु की एक्टिंग की बात करना भी टाइम वेस्टिंग है क्योंकि फिल्म में उनके करने लायक कुछ है नहीं।
संगीत :
साजिद खान की पिछली फिल्म 'हिम्मतवाला' की तरह ही 'हमशकल्स' का संगीत भी बेहद कमजोर है। फिल्म के गाने इतने अच्छे नहीं हैं कि दर्शकों की जुबान पर चढ़ सकें। बता दें कि फिल्म में संगीत हिमेश रेशमिया ने दिया है।
देखें या न देखें?
जिन एक्टर्स को एक रोल में झेलना मुश्किल हो जाता है, उन्हें तीन-तीन रोल्स में देखने की कल्पना करना ही किसी टॉर्चर से कम नहीं। हिम्मतवाला वाली जैसी घटिया फिल्म बनाने के बाद साजिद ने उससे भी घटिया, निम्न दर्जे की फिल्म बनाकर दो घंटे 39 मिनट बर्बाद करने से ज्यादा और कुछ नहीं किया है।
उनकी यह फिल्म न केवल उनके निर्देशन में बनी अब तक की सबसे घटिया फिल्म है बल्कि फिल्म इतिहास की भी सबसे घटिया फिल्मों में से एक है। कुल मिलाकर इस फिल्म को झेलना हिम्मत का काम है जो केवल एक हिम्मतवाला ही कर सकता है।
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