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Movie Review 'खूबसूरत'

Dainik Bhaskar

Sep 19, 2014, 12:23 PM IST

सोनम कपूर 'खूबसूरत' बन इस साल का दूसरा टेस्ट देने बॉक्स ऑफिस पर आईं हैं। इस साल उनकी 'बेवकूफियां' भले ही नाकाम रही हो, लेकिन 'खूबसूरत' में उन्होंने पिछली नाकामी को पीछे छोड़ने का पूरा प्रयास किया है।

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फिल्म की कहानीः

दिल्ली में रहने वाली मिली चक्रवर्ती (सोनम कपूर) एक साइकोथेरेपिस्ट हैं। मिली की मां मंजू चक्रवर्ती (किरण खेर) ने उनकी ऐसी परवरिश की है, जहां कोई रोक-टोक नहीं होती। दूसरी तरफ मिली पेशेन्ट को अपने बनाए तरीके से ठीक करने में यकीन रखती हैं। इसी बीच मिली को राजस्थान के संभलगढ़ में राजा शेखर राठौर के यहां जाना होता है। राठौर फैमिली में रहने वाले सभी सदस्य एक-दूसरे से कटे-कटे रहते हैं और यहां के नियम मिली को भी फॉलो करने पड़ते हैं। इस फैमिली में प्रिंस विक्रम राठौर (फवाद खान) होते हैं, जिन्हें हंसना नहीं आता और बोलने के लिए भी वो काफी सोचते हैं। दूसरी तरफ मिली एक बार बोलना शुरू करती है तो फिर चुप होने का नाम ही नहीं लेती। मिली के इस अंदाज का जादू धीरे-धीरे राठौर फैमिली पर चलने लगता है। साथ ही, विक्रम भी मिली के करीब आने लगता है। इसके बाद फिल्म में क्या होता है, इसके लिए आपको सिनेमाघर का रुख करना होगा।
शशांक का डायरेक्शन:
शशांक घोष ने अब तक 'वैसा भी होता है पार्ट 2', 'क्विक गन मुरगन' के साथ कई दूसरी फिल्मों का डायरेक्शन किया है। हालांकि, पिछली फिल्मों की तुलना में 'खूबसूरत' का डायरेक्शन बेहतर दिखाई देता है। वैसे इस फिल्म में भी कई जगह कहानी टूटती और कमजोर दिखाई देती है। उन्होंने सोनम के किरदार पर ज्यादा फोकस किया है, जिसके चलते फिल्म के दूसरे किरदार कहानी में कमजोर नजर आते हैं।
सोनम-फवाद का अभिनय:
फिल्म की कहानी में सोनम पर ज्यादा फोकस किया गया है। सोनम ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। हालांकि, जब उनकी तुलना रेखा की 'खूबसूरत' से की जाती है, तो वो कमजोर नजर आती हैं। वैसे सोनम ने फिल्म में जो अभिनय किया है वो उनकी पर्सनालिटी पर पूरी तरह फिट बैठा है। दूसरी तरफ फवाद ने इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया है, लेकिन वो अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं। हालांकि, किरण खेर और रत्ना पाठक अपनी पुरानी फिल्मों की तरह यहां भी बेहतर अभिनय करती नजर आई हैं।
फिल्म का संगीत:
फिल्म में छह गाने हैं, जो लगभग 24 मिनट की ड्यूरेशन के हैं। इनमें 'इंजन की सिटी में मारा बम डोले' तो पहले भी फेमस हो चुका थी। वहीं, एक अन्य गाना 'अभी तो पार्टी शुरू हुई है' भी दर्शकों को पसंद आया। हालांकि, बाकी गाने अपना प्रभाव नहीं छोड़ सके। ऐसे में कहा जा सकता है कि स्नेहा खानवलकर का संगीत औसत रहा।
फिल्म क्यों देखें:
'खूबसूरत' की सबसे अच्छी बात फैमिली फिल्म होना है। यानी आप पूरे परिवार के साथ फिल्म का मजा ले सकते हैं। फिल्म में किसी तरह की अश्लीलता नहीं है। फिल्म में लड़कों को सोनम का चुलबुला अवतार नजर आएगा। वहीं, लड़कियों को सोनम फिल्म के जरिए फैशन और ड्रेसेस की टिप्स दे सकती हैं। यानी फिल्म के टिकट पर मनोरंजन के साथ-साथ आपको कुछ एक्सट्रा जानकारी भी मिल जाएगी।

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