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Movie Review: 'लेकर हम दीवाना दिल'

'लेकर हम दीवाना दिल' न केवल अरमान बल्कि इस फिल्म में उनके अपोजिट नजर आने वाली दीक्षा सेठ और इस फिल्म के निर्देशक आरिफ अली की भी डेब्यू फिल्म है। आरिफ मशहूर फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली के भाई हैं।

Dainik Bhaskar

Jul 04, 2014, 10:16 AM IST
movie review lekar hum deewana dil
कहानी: फिल्म की कहानी दिनेश उर्फ डीनो (अरमान) और करिश्मा (दीक्षा सेठ) के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों अच्छे दोस्त हैं। फिर एक दिन दोनों घर से भागने का निर्णय लेते हैं और अपने पेरेंट्स से छुपकर शादी कर लेते हैं।
इसके बाद दोनों के सामने कई मुश्किलें आनी शुरू हो जाती हैं। दोनों को अपनी गलतियां भी समझ आने लगती हैं। फिल्म युवाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
फिल्म गलतियों और उनसे सबक लेने की कहानी बयां करती है।
निर्देशन: आरिफ अली का निर्देशन बेहद कमजोर है। फिल्म में वही घिसी-पिटी लव स्टोरी है, जिसे हम अब तक की कई बॉलीवुड फिल्मों में देख चुके हैं।
फिल्म देखकर लगता है कि आरिफ ने शायद इसे बनाने से पहले अपने भाई इम्तियाज़ अली (जाने-माने डायरेक्टर) से टिप्स नहीं लिए।
फिल्म में न स्टोरी है, न म्यूजिक। सच कहा जाए तो एक भी ऐसा कारण नहीं जिसके लिए यह फिल्म देखने के लिए सिनेमाघर का रुख किया जाए।
कैसी है एक्टिंग: राजकपूर के नाती अरमान जैन अपनी पहली फिल्म में एक्टिंग के मामले में बेहद कमजोर साबित हुए हैं।
उनसे आप अगले रणबीर कपूर होने की उम्मीद न ही रखें तो बेहतर है। उन्हें अभी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ेगा।
वहीं, दीक्षा सेठ की बात की जाए तो अरमान के मुकाबले उन्होंने कहीं बेहतर एक्टिंग की है।कुछ सीन्स में दीक्षा अपनी एक्टिंग से काफी इम्प्रेस करती हैं और उन्हें देखकर लगता है कि वह इंडस्ट्री में लंबी पारी खेल सकती हैं।

कैसा है म्यूजिक: फिल्म का म्यूजिक सुनकर एक पल तो भरोसा नहीं होता कि इसे ए.आर रहमान ने दिया है। खलीफा गाने के अलावा फिल्म में ऐसा कोई भी गाना नहीं, जिसे दोबारा सुनने की इच्छा हो, बैकग्राउंड स्कोर ठीक है।
क्या फिल्म देखी जा सकती है?
हम तो आपको यही सलाह देंगे कि इसे देखने में अपने पैसे खर्च न ही करें तो बेहतर है।
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