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MOVIE REVIEW : मर्दानी

प्लॉट : फिल्म में लड़कियों की तस्करी करने वाले गिरोह से मर्दानी शिवानी शिवाजी रॉय के संघर्ष दिखाया गया है।

Dainik Bhaskar

Aug 22, 2014, 02:29 PM IST
Movie Review : Mardaani
('मर्दानी' के पोस्टर में रानी मुखर्जी)
सिनेमाघरों में इस शुक्रवार उतरी हैं रानी मुखर्जी, वो भी मर्दानी बनकर और उन्हें इस वतार में लेकर आए हैं डायरेक्टर प्रदीप सरकार। वही प्रदीप सरकार, जो रानी को लेकर साल 2007 में 'लागा चुनरी में दाग' बना चुके हैं। 2007 में आई इस फिल्म ने जहां ग्लैमर की दुनिया के घिनौने पक्ष देह व्यापार को उजागर किया था, वहीं इस बार प्रदीप सरकार ने देश में चल रही स्कूली बच्चियों की तस्करी के मुद्दे को उठाया है। 'लागा चुनरी में दाग' में जहां रानी खुद देह व्यापार के जाल में फंस जाती हैं, वहीं 'मर्दानी' में वे देश के ऐसे दुश्मनों के खिलाफ लड़ती नजर आती हैं, जो बच्चियों की खरीद-फ़रोख्त का धंधा करते हैं।
क्या है फिल्म की कहानी :
फिल्म की कहानी शिवानी शिवाजी रॉय (रानी मुखर्जी), सीनियर इंस्पेक्टर, क्राइम ब्रांच के इर्द-गिर्द रची गई है। वह एक ऐसी पुलिस अफसर है, जिसने कभी रिश्वत नहीं ली और देश में चल रहे अवैध धंधों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। वह अपने पति डॉ. विक्रम रॉय (जिसु सेनगुप्ता) और बहन की बेटी मीरा के साथ रहती है। शिवानी शेल्टर हाउस में रह रही एक बच्ची प्यारी को अपनी बेटी जैसी मानती है। एक दिन अचानक प्यारी गायब हो जाती है और उसकी तलाश में लगी शिवानी को धीरे-धीरे इस बात का एहसास होता है कि यह किसी छोटे-मोटे गिरोह का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई बड़ा माफिया काम कर रहा है। इस बीच फोन पर शिवानी का संपर्क होता है वुमन ट्रैफिकिंग (खास तौर से स्कूली बच्चियों की तस्करी करने वाले गिरोह) के किंग और फिल्म के असली विलेन वाल्ट (ताहिर भासिन) से और वह उसे प्यारी को छोड़ने के लिए कहती है, लेकिन वाल्ट नहीं मानता। तब शिवानी उसे तीस दिन में पकड़ने का चैलेंज देती है। शिवानी कैसे वाल्ट तक पहुंचती है और इसके लिए उसे किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, यही फिल्म में दिखाया गया है।
प्रदीप सरकार का निर्देशन :
'परिणीता' (2005) और 'लागा चुनरी में दाग'(2007) के बाद प्रदीप सरकार एक बार फिर महिला प्रधान फिल्म लेकर दर्शकों के सामने आए हैं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चल पाए या नहीं, लेकिन उनकी फिल्मों में महिला किरदारों को बड़ी ही मजबूती के साथ पेश किया जाता है। 'मर्दानी' में भी उन्होंने शिवानी शिवाजी रॉय के कैरेक्टर को बड़ी ही मजबूती के साथ गढ़ा है। हालांकि, कहीं-कहीं फिल्म लचर नजर आती है, लेकिन शिवानी का किरदार दर्शकों को बांधे रखने में कारगर है।
रानी सहित स्टार्स की एक्टिंग :
यदि एक्टिंग की बात करें तो रानी शिवानी के किरदार में वाकई मर्दानी नजर आती हैं। उन्होंने किरदार में जान फूंकने के लिए अपशब्दों के इस्तेमाल से भी कोई परहेज नहीं किया है। इसके अलावा, ताहिर भासिन ने भी अपने किरदार को बखूबी निभाया है। 27 वर्षीय ताहिर की यह पहली फिल्म है। इससे पहले उन्होंने इसी साल जनवरी में रिलीज हुई 'वन बाय टू' में छोटा-सा किरदार निभाया था। रानी और ताहिर के अलावा, जिसु सेनगुप्ता सहित किसी कलाकार के करने लायक फिल्म में कुछ खास नहीं है।
बड़ा सवाल : देखें या नहीं
फिल्म की कहानी एक गंभीर मुद्दे (स्कूली बच्चियों की तस्करी) को लेकर बनाई गई है, जो समाज को एक संदेश देती है। जो दर्शक इस तरह की फिल्में देखना पसंद करते हैं, 'मर्दानी' सिर्फ उनके लिए है। इसके अलावा, जो रानी मुखर्जी का बोल्ड और दबंग अवतार देखना चाहते हैं, वे भी इसे देख सकते हैं।
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