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Movie Review: 'किस्सा’

Dainik Bhaskar

Feb 21, 2015, 10:45 AM IST

सीमित दर्शकों के लिए ये डेढ़ घंटे की फिल्म है। सिर्फ छह शहरों में लगी है तो बाकी लोग डीवीडी या डायरेक्ट-टु-होम के जरिए देख सकते हैं। अच्छे सिनेमा के दीवानों या अन्य के लिए मस्ट वॉच।

Movie Review: Qissa
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सीमित दर्शकों के लिए ये डेढ़ घंटे की फिल्म है। सिर्फ छह शहरों में लगी है तो बाकी लोग डीवीडी या डायरेक्ट-टु-होम के जरिए देख सकते हैं। अच्छे सिनेमा के दीवानों या अन्य के लिए मस्ट वॉच।
अंबर सिंह बने इरफान की एक्टिंग यादगार है। चुग़ताई, मंटो, अमृता की पंजाबी कथाओं की तरह अनूप व मधुजा मुखर्जी की "किस्सा’ एेतिहासिक है। विभाजन की पीड़ा से जूझता अंबर अपने चौथे बच्चे की आइडेंटिटी भी यूं विभाजित करता है कि वो, कंवर (शोम), मां (टिस्का) जो कभी इस संतान को गोद नहीं ले पाती, और कंवर की पत्नी नीली (रसिका) उलझ जाते हैं।
औरत होने की पीड़ा, मां का दर्द, अपने ही जिस्म व जेहन की लड़ाई कभी रुलाएगी, कभी कचोटेगी। बेटे की चाह में पागल ससुर द्वारा बहु के लिहाफ को छूने की कोिशश भी स्त्रीत्व को चोटिल करती है। ऐसी फिल्म दशक में आती है, जरूर देखें.
Story [3.5/5] बेहद अलग व सच्ची कहानी है। कहीं- कहीं महीन रूप से अटकती है जिसे सिनेमैटोग्राफी संभालती है।
direction [3.5/5] अनूप सिंह फिल्म द्वारा हमें बांधे रखने में कामयाब होते हैं। बस कुछ को क्लाइमैक्स भारी लग सकता है। अजीब भी। उनका प्रस्तुतिकरण बेहद सहज है।
acting [4/5] एक्टिंग इस कहानी को साधने वाली रीढ़ है। इरफान और टिस्का की अदाकारी बेहद उम्दा है। कंवर के रोल में तिलोत्तमा शोम धीरे-धीरे बहुत मजबूत लगती जाती हैं।
music [2/5] संगीत की ज्यादा गुंजाइश न थी। पर कंपोजर बिएट्रिस थ्रिएत-मनीष टिपू का स्कोर दिल में भाव जगा पाता है।

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Movie Review: Qissa
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