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'शादी के साइड इफेक्ट्स'

'शादी के साइड इफेक्ट्स'

Dainik Bhaskar

Feb 28, 2014, 02:22 AM IST
movie review: shaadi ke side effects
2011 में आई बॉलीवुड फिल्म 'प्यार का पंचनामा' का एक फेमस डायलॉग है, 'हिंदी फिल्मों में लड़का-लड़की मिले और फिल्म खत्म। उसके बाद की कहानी कोई नहीं बताता। 'ये डायलॉग बोलने के बाद फिल्म का एक किरदार शादीशुदा लोगों की जिंदगी में आने वाली प्रॉब्लम्स के बारे में बताता है। शुक्रवार को रिलीज हुई विद्या बालन और फरहान अख्तर की फिल्म 'शादी के साइड इफेक्ट्स' कुछ ऐसी ही कहानी समेटे हुए है।
बालाजी फिल्म्स के बैनर तले बनी 'शादी के साइड इफेक्ट्स' में दिखाया गया है कि विद्या और फरहान की शादी के बाद उनकी जिंदगी किस तरह बदल जाती है। वैसे, खास बात ये है कि मैरिड कपल्स इस फिल्म को देखते हुए अपनी कुर्सी पर बैठे नहीं रह पाएंगे। कोई बड़ी बात नहीं, अगर हंसते-हंसते उनका पेट दर्द करने लगे। विद्या और फरहान ने एक-दूसरे के ऊपर ऐसे-ऐसे कमेंट्स किए हैं, जो मैरिड कपल्स को बिल्कुल अपनी कहानी जैसे लगेंगे।
वैसे, जो लोग अभी अपनी शादी की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें देखकर हॉल में मौजूद उन लोगों को जरूर हैरानी होगी, जिनकी शादी को लगभग 10-15 साल बीत चुके हैं। जिस सिनेमाहॉल में हमने ये फिल्म देखी, वहां दोनों तरह के लोग बैठे हुए थे। एक तरफ जहां यंग कपल खूब ठहाके लगा रहे थे, वहीं मैच्योर कपल्स ये सोच रहे थे कि आखिर बाकी के लोग हंस क्यों रहे हैं। जाहिर-सी बात है कि फिल्म में जो दिखाया गया है, वो पुराने कपल्स की बजाय नए कपल्स पर ज्यादा सटीक बैठता है।
हालांकि, इसका कारण जानने में आपको ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। जल्दी ही आप समझ जाएंगे कि फिल्म का नाम 'शादी के साइड इफेक्ट्स' न होकर 'बच्चे के साइड इफेक्ट्स' होना चाहिए था। यह इसलिए कि फिल्म में विद्या और फरहान के बीच की हर प्रॉब्लम का कारण बच्चे को ही दिखाया गया है। पूरी कहानी बच्चे और उससे होने वाली परेशानी के इर्द-गिर्द घूमती है।
क्या ये फिल्म सिर्फ मैरिड कपल्स के लिए है?
एक हद तक ये बात बिल्कुल सही है। अगर अभी तक आपको मैरिड लाइफ के अनुभव नहीं हुए हैं और किसी दूसरे को भी इन अनुभवों से गुजरते नहीं देखा है, तो शायद आप फिल्म को पूरी तरह से एन्जॉय ना कर पाएं। ऐसे में, आप खुद को मूवी के कैरेक्टर्स से कनेक्ट नहीं कर पाएंगे। हां, पहले हाफ में हॉल में मौजूद हर शख्स के खिलखिलाने की उम्मीद है, क्योंकि ये सबके लिए कॉमन होगा।
वैसे, ऑडियंस में जितने भी कपल होंगे, उन्हें विद्या और फरहान की प्रॉब्लम्स और उनकी झिक-झिक अपनी जैसी लगेगी। साथ ही, वो सिचुएशन को भी खुद से को-रिलेट कर पाएंगे।
जहां तक डायरेक्शन की बात है, तो इस फिल्म से अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू कर रहे साकेत चौधरी ने अच्छा काम किया है। उन्होंने मैरिड कपल्स को ये सिखाने की भरपूर कोशिश की है कि आखिर अपनी लाइफ को खुशहाल कैसे बनाया जाए।
अगर आप ये सोच कर फिल्म देखने जा रहे हैं कि फिल्म में आपको कपिल शर्मा टाइप हसबैंड-वाइफ जोक्स सुनने को मिलेंगे, तो ऐसा नहीं है। फिल्म में इससे भी कहीं ज्यादा ड्रामा और कॉमेडी है।
विद्या बालन और फरहान की एक्टिंग रही कैसी?
इस बात में तो कोई शक नहीं कि फरहान अख्तर फिल्म इंडस्ट्री के सबसे टैलेंटेड आर्टिस्ट्स में से एक हैं। फिल्म देखने के बाद आपको ये यकीन हो जाएगा कि वो हर छोटा-बड़ा किरदार अच्छे से निभा सकते हैं। आखिर उनके अंदर एक डायरेक्टर भी तो छिपा हुआ है। उन्हें पता है कि किस चीज को पर्दे पर किस तरह उकेरना है। 'रॉक ऑन' से लेकर 'शादी के साइड इफेक्ट्स' तक उन्होंने खुद को बहुत ग्रूम कर लिया है।
विद्या बालन का किरदार उनकी पिछली फिल्म 'घनचक्कर' वाले कैरेक्टर से मिलता-जुलता है। इस फिल्म में भी उन्होंने एक पत्नी का रोल बखूबी निभाया है। विद्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अच्छी स्क्रिप्ट और अच्छा डायरेक्शन मिलने पर वो बेहतरीन रोल कर सकती हैं।
कैसा है म्यूजिक?
फिल्म का म्यूजिक एवरेज है। इसके अधिकतर गाने फिल्म की थीम और स्क्रिप्ट को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, जो फिल्म में काफी सटीक बैठते हैं। हालांकि, आप अपने फोन की प्लेलिस्ट में इन्हें ज्यादा दिन नहीं रख पाएंगे।
बड़ा सवाल: फिल्म देखने जाएं या ना जाएं?
फिल्म पहले हाफ में बहुत ही मनोरंजक है और आपको गुदगुदाती है, लेकिन इसका दूसरा हाफ थोड़ा बोरिंग है, जो आपको बोझिल लग सकता है। हां, अगर आपके पास कोई बहुत जरूरी काम नहीं है, तो आप इस फिल्म पर पैसा और वक्त खर्च कर सकते हैं।
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