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Movie Review: तमंचे

Dainik Bhaskar

Oct 09, 2014, 11:06 PM IST

यह फिल्म आपको टुकड़ो में इंटरटेन करती है। कई खामियों के बावजूद फिल्म एक बार देखी जा सकती है।

Movie Review Tamanchey
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जरा सोचिए जब दो अपराधियों को एक-दूसरे से प्यार होगा, तो क्या होगा? दोनों फ्यूचर प्लान करते समय ड्रग सप्लाई जैसे बड़े अपराधों के बारे में सोचते हैं, तो बेस्ट टाइम पास के रूप में लोगों की हत्या करना। वैसे, तमंचे सामान्य बॉलीवुड मसाला फिल्मों की तरह नहीं है।
एक अच्छी स्टोरी होने के बाद भी फिल्म में कई गड़बड़ियां हैं। फिल्म में मुन्ना का किरदार निखिल और बाबू का किरदार ऋचा चड्ढा ने निभाया है। फिल्म का निर्देशन नवनीत बहल ने किया है। फिल्म बीच-बीच में कई जगह पर बोरिंग हो जाती है।
ऋचा चड्ढा और निखिल द्विवेदी के बीच कैसी केमिस्ट्री?
फिल्म के किरदार बाबू और मुन्ना के बीच एक अनोखी केमिस्ट्री है। बाबू दिल्ली का एक ड्रग डीलर है। वहीं, मुन्ना एक छोटे-से गांव का एक किडनैपर है। ऋचा चड्ढा अपनी पहली फिल्म से ही इस तरह के क्रिमिनल की भूमिका निभाती आ रही हैं।

वहीं, निखिल को हीरो के रूप में डाइजेस्ट कर पाना मुश्किल है। मूवी के क्लाइमेक्स में ऋचा विलन को बताती है कि निखिल कितना स्मार्ट है। मूवी में द्विवेदी का लोकल एक्सेंट कहीं-कहीं पर इरिटेट करता है।
क्या है फिल्म की कहानी ?
पुलिस से बचकर भागते हुए बाबू और मुन्ना को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है, लेकिन बाद में बाबू का पीछा करते हुए मुन्ना को पता लगता है कि बाबू ड्रग डीलिंग रैकेट में शामिल है। इसके बाद बाबू के बेड पार्टनर और गैंग के लीडर को मुन्ना इंप्रेस करता है और गैंग से जुड़ जाता है। दोनों के बीच प्यार में तब ट्विस्ट आता है, जब इस बात की खबर गैंग के लीडर को पता चलती है।

तमंचे क्यों देखें ?
फिल्म में कई कमियां हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी हिस्से हैं, जिन्हें बेवजह फिल्माया गया है। इसके बावजूद तमंचे 'वन टाइम वॉच' की लकीर को लांघती है। यदि आप इस फिल्म में 'बैंग-बैंग' जैसा ग्लैमर और 'हैदर' जैसा क्लास अपेक्षित कर रहे हैं, तो आप कोई दूसरी फिल्म प्लान करेंगे तो बेहतर होगा और यदि आप क्राइम और एक्शन फिल्म के बेहद शौक़ीन हैं, तो आप तमंचे के लिए टिकट बुक कर सकते हैं।

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