MOVIE REVIEW: यारियां / MOVIE REVIEW: यारियां

डायरेक्टर दिव्य खोसला इसे बहुत अच्छा बनाने के चक्कर में बिगाड़ बैठीं।

dainik bhaskar.com

Jan 10, 2014, 06:45 PM IST
movie review yaariyan

'यारियां' दिव्या खोसला की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म है जिसे वो ढंग से नहीं बना पाईं। इस फिल्म के ट्रेलर देखकर और म्यूजिक सुनकर कॉलेज जाने वाला यूथ आकर्षित जरूर हुआ था, लेकिन सिनेमा हॉल के अंदर जाते ही हमारे सारे अरमान काफूर हो जाते हैं। नए लड़कों पर पैसा खर्च करने का रिस्क तो आपने ले लिया, लेकिन हॉल से निकलने के बाद पैसा वसूल होने की फीलिंग नहीं आती है।

कंडीशन तो ये है कि फिल्म देखते-देखते आप खुद ही दोस्त से बोल उठेंगे, 'देखना बे अब ये होगा।' तभी आपको आपका दोस्त जवाब देगा, 'मैनें भी तो यही कहा था।' इस फिल्म की सबसे बड़ी खामी यही है कि इसमें हमें कोई सरप्राइज नहीं मिलता है। एक बार फिल्म शुरू हो जाती है तो बस चलती ही जाती है और एक सिंपल से क्लाइमैक्स के साथ खत्म हो जाती है।

ए फॉर एवरेज स्टोरी

सबसे पहले तो आपके जेहन में यही सवाल आता होगा कि फिल्म कैसी है। तो हम आपको बता दें कि पहले 15 मिनट बीतने के साथ आप बोर होने लगेंगे। फिल्म की स्टोरी बहुत ही आम है। पांच दोस्त होते हैं जिन्होंने अपनी कॉलेज लाइफ साथ गुजारी होती है और उनके चैलेंजेस, गल्तियों, प्यार, दोस्ती के अलावा इसमें कुछ नहीं है। हो सकता है आप को ये कहानी अपनी पर्सनल कॉलेज लाइफ से भी बोरिंग लगे।

हां, शूटिंग की लोकेशन आपको जरूर पसंद आएंगी। डायरेक्टर ने शूटिंग की जगह वाकई अच्छी चुनी हैं, लेकिन शायद वो कैमरे पर ब्रेक लगाना भूल गईं क्योंकि फिल्म इतनी फास्ट है कि हम खुद को कनेक्ट ही नहीं कर पाते हैं। ये भी हो सकता है कि इमोशनल सीन देखते-देखते आपको हंसी आ जाए।

बी फॉर बैड परफॉर्मेंस

फिल्म कोई भी हो, एक्टिंग के बारे में तो सभी जानना चाहते हैं। इस फिल्म में एक्टर्स की परफॉर्मेंस बहुत ही सामान्य सी थी। एक्शन सीन करते समय तो हिमांश रजनीकांत लगने लगते हैं जो हॉल में बैठे किसी भी दर्शक को हजम नहीं हुआ। हां, दीप्ति नवल ने जरूर अच्छी एक्टिंग की है।

सी फॉर कॉपी कंटेंट

फिल्म की एक और खराबी है चुराया हुआ कंटेंट। ऐसा लगता है कि पहले की कुछ फिल्मों को आपस में मिक्स कर दिया गया है। अब मूवी की फ्लर्टिंग गर्ल को ही ले लीजिए। उसका किरदार पूरी तरह 'मैं हूं ना' की राखी सावंत से मिलता-जुलता है जो दिन भर लॉलीपॉप चूसा करती थीं। मूवी में साइकिल रेस भी है जो 'स्टूडेंट ऑफ दि इयर' की याद दिलाती है। विलेन की एंट्री को 'सिंहम' से कॉपी किया गया है।

डी फॉर डिलाइट म्यूजिक

फिल्म की सबसे अच्छी चीज है इसका म्यूजिक। मूवी में ऐसे-ऐसे गाने हैं जो आप गाए बिना नहीं रह पाएंगे। चलिए, फिल्म में कुछ तो अच्छा है। आखिरकार हनी सिंह का जादू चल ही गया। बस यही एक चीज है जिसने फिल्म को सुपर फ्लॉप होने से बचा लिया।

अब सबसे बड़ी बात ये है कि आप इस फिल्म पर पैसा खर्च करें या ना। तो अगर आप कुछ भी देखने के आदी हैं और कॉलेज लाइफ को पर्दे पर देखना चाहते हैं तो सिनेमाहॉल का रुख करें वरना घर पर बैठना ज्यादा बेहतर रहेगा।

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