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Movie Review: महिलाओं की अहम समस्या पर जरुरी मैसेज देती है 'फुल्लू'

रूरल एरिया के एक गांव की कहानी है फुल्लू जिस में एक अहम मुद्दे की तरफ ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई है।

Dainik Bhaskar

Jun 16, 2017, 11:44 AM IST
Phullu Movie Review

फिल्म: फुल्लू
क्रिटिक रेटिंग: 2.5 /5
स्टार कास्ट: शारिब अली हाशमी, ज्योति सेठी, नूतन सूर्या
डायरेक्टर: अभिषेक सक्सेना
प्रोड्यूसर: पुष्पा चौधरी, अनमोल कपूर, क्षितिज चौधरी, रमन कपूर
म्यूजिक: विकी अग्रवाल
जॉनर: सोशल ड्रामा

डायरेक्टर अभिषेक सक्सेना ने महिलाओं की एक अहम समस्या के ऊपर इस फिल्म के जरिए ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है और तरह-तरह के एग्जाम्पल के साथ इस समस्या की तरफ प्रकाश डालने की कोशिश की है। कैसी बनी है यह फिल्म, आइए पता करते हैं।

कहानी
यह कहानी एक गांव के रहने वाले फुल्लू (शारिब अली हाशमी) की है जो पूरे गांव में चर्चा का विषय बना रहता है। फुल्लू काम तो कोई नहीं करता लेकिन जब भी शहर जाता है गांव की सारी महिलाओं के लिए उनके जरूरत के सामान को हमेशा ले आता है। फुल्लू जब कोई काम नहीं कर रहा होता है तो इसे देखकर उसकी मां काफी परेशान होती है और सोचती है कि अगर उसकी शादी कर दी जाए तो शायद वह जिम्मेदारियों को समझें और काम पर लग जाए। इसी कारण से फुल्लू की शादी कर दी जाती है और बहू के रूप में बिगनी(ज्योति सेठी) घर पर आती है। अब फुल्लू के घर में तीन-तीन महिलाएं हो जाती हैं एक उसकी मां दूसरी उसकी बहन और तीसरी उसकी बीवी बिगनी। एक दिन अचानक से जब फुल्लू शहर गया रहता है तो वहां एक मेडिकल स्टोर पर एक डॉक्टर उसे महिलाओं के पैड के बारे में जानकारी देती हैं जिसे सुनकर उसकी आंखें खड़ी हो जाती है और फुल्लू अपने घर की महिलाओं के लिए पैड खरीद कर लाता है। फुल्लू की मां ने उसे बहन की शादी के लिए गहने खरीदने के पैसे दिए थे लेकिन उन पैसों से उसने पैड खरीदे जो कि उस गांव में कोई भी प्रयोग में नहीं लाया करता था मां के लाख समझाने पर भी फुल्लू उनकी बात नहीं मानता और गांव वालों को कम पैसे में पैड मुहैया कराने के लिए शहर जाकर खुद पैड बनाना सीखता है और जब वह गांव आता है तो अपने हाथ से बनाए हुए पैड को चेक करने के लिए वह अपनी बहन और अपनी मां से भी रिक्वेस्ट करता है लेकिन दोनों उसे मना करके घर से निकाल देते हैं फिर उल्लू अपनी प्रेग्नेंट वाइफ से भी मदद मांगता है लेकिन परिस्थितियां बदल जाती हैं और क्या फुल्लू अपने इस सपने को साकार कर पाता है इसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।


डायरेक्शन
फिल्म का डायरेक्शन बढ़िया है और सिनेमेटोग्राफी, लोकेशंस भी कहानी के हिसाब से अच्छे हैं। जमीनी लेवल पर शूटिंग काफी दिलचस्प भी लगती है। फिल्म की कहानी की सोच तो काफी अच्छी है लेकिन बड़े स्टार कास्ट ना होने की वजह से शायद इसे बॉक्स ऑफिस पर ओपनिंग पाने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है साथ ही साथ फिल्म की एडिटिंग और बेहतर की जा सकती थी।

स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस
शारिब हाशमी ने टाइटल किरदार बहुत ही बेहतरीन निभाया है जिसे आप अंत तक याद रखते हैं। फिल्म में छोटी-छोटी बातें हैं जो आपके जहन में भी घर कर जाएंगी। वहीं एक्ट्रेस ज्योति सेठी ने किरदार के लिहाज से बखूबी एक्टिंग की है। इसके अलावा फिल्म के बाकी सभी कलाकारों ने बढ़िया काम किया है।


म्यूजिक
फिल्म का संगीत अच्छा है खास तौर पर भुनर भुनर वाला गीत सबसे बेहतरीन है फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है।

देखें या नहीं
फिल्म के द्वारा एक सीख दी गई है और साथ ही साथ यह एक एडल्ट फिल्म है। अगर आपको मुद्दों पर आधारित फिल्में पसंद हैं तो एक बार जरूर देख सकते हैं बशर्ते कि आप एडल्ट भी हो।

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