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Movie Review: थोड़े पक्के पर काफी कच्चे हैं 'सात उचक्के'

अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट करते हुए संजीव शर्मा ने पुरानी दिल्ली की पृष्टभूमि पर घटने वाली कहानी को दर्शाने की कोशिश की है।

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2016, 09:57 AM IST
Read Out The Review Of 'Saat Uchakkey'

क्रिटिक रेटिंग
1.5 /5
स्टार कास्ट
मनोज बाजपेयी, के के मेनन, विजय राज,
अदिति शर्मा, अपारशक्ति खुराना,
अन्नू कपूर, अनुपम खेर
डायरेक्टर संजीव शर्मा
प्रोड्यूसर वेव सिनेमाज
संगीत अभिषेक रे
जॉनर कॉमेडी
कहानी
कहानी पुरानी दिल्ली की है, जहां पप्पी (मनोज बायपेयी) अपने 6 उचक्कों की गैंग के साथ दीवान साहब (अनुपम खेर) का खजाना लूटना चाहता है। बार-बार ये प्लानिंग करते हैं, लेकिन इनके प्लान्स में इंस्पेक्टर तेजपाल (के के मेनन) अड़ंगा डालता है। एक खास मकसद से एक-दूसरे के साथ जुड़े 7 उचक्कों को उसे पूरा करने के लिए इन्हें क्या-क्या जहमत उठानी पड़ती है, यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

डायरेक्शन
फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है, पुरानी दिल्ली के इलाकों को अच्छे तरीके से दर्शाया गया है। फिल्म में इनडोर और आउटडोर लोकेशंस की शूटिंग अच्छी लगती है। सिनेमैटोग्राफी भी ठीक है। हालांकि, फिल्म की लिखावट गड़बड़ है जिसकी वजह से ये काफी लंबी और कमजोर लगती है। फिल्म की शुरुआत और अंत भी काफी कमजोर हैं। वैसे, बीच बीच में कई ऐसे मौके आते हैं जब आप हंसते भी है। लेकिन पूरी तरह से फिल्म की लिखावट और एडिटिंग बेहतर की जा सकती थी। रोजमर्रा की जिंदगी में उचक्कों के संवाद में आने वाली गालियां भी हैं जो एक खास तरह की ऑडियंस को आकर्षित कर सकती है।
स्टारकास्ट
फिल्म की सबसे अच्छी बात इसकी कास्ट है। मनोज बाजपेयी, के के मेनन और विजय राज जैसे मंजे हुए कलाकारों ने उम्दा अभिनय किया है। अदिति शर्मा ने भी बेबाक तरह से अपने किरदार को निभाया है। अपारशक्ति खुराना और बाकी कलाकारों ने अच्छा काम किया है
म्यूजिक
फिल्म का संगीत कहानी के हिसाब से अच्छा है। कुछ लोक गीतों का प्रयोग भी सही तरीके से किया गया है।
देखें या नहीं?
अगर आपको मनोज बाजपेयी, के के मेनन और विजय राज को एक साथ देखना है, तो ही इस फिल्म को दिखने जाए। वैसे, ढेर सारे कट्स के साथ टीवी पर आने तक का इंतजार भी कर सकते हैं।
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