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Movie Review: हाउस कीपर से कंगना के चोर बनने की दास्तां है 'सिमरन'

Plot: कंगना रनोट एक बार फिर सिंगल लड़की की कहानी लेकर आई हैं जिसका नाम ‘सिमरन’ है।

Dainik Bhaskar

Sep 15, 2017, 11:22 AM IST
कंगना रनोट की सिमरन शुक्रवार क कंगना रनोट की सिमरन शुक्रवार क

रेटिंग 2/5
स्टार कास्ट कंगना रनोट, मार्क जस्टिस, सोहम शाह, मनु नारायण, अनीस जोशी
डायरेक्टर हंसल मेहता
म्यूजिक सचिन-जिगर
प्रोड्यूसर भूषण कुमार, क्रिशन कुरमा, शैलेश आर सिंह, अमित अग्रवाल
जॉनर कॉमेडी ड्रामा

- 'शाहिद'(2012), 'सिटी लाइट'(2014) और 'अलीगढ़'(2015) जैसी फिल्मों के बाद डायरेक्टर हंसल मेहता ने कंगना रनोट को लीड रोल में लेकर कॉमेडी ड्रामा फिल्म 'सिमरन' बनाई है। उनकी ये फिल्म सिमेनाघरों में रिलीज हो चुकी है तो कैसी बनी ये फिल्म आइए जानते हैं...

कहानी
- फिल्म की कहानी अमेरिका में रहने वाले एक पटेल परिवार की लड़की प्रफुल्ल पटेल यानी कंगना रनोट की है। जो कि तलाकशुदा होती है और फैमिली के साथ रहती है। प्रफुल्ल की इनकम का सोर्स एक होटल है जहां वो हाउस कीपिंग का काम करती है। फैमिली से प्रफुल्ल की कम ही बनती है। कई बार उसकी दोबारा शादी के लिए घरवाले रिश्ते ढूंढते हैं, लेकिन बात नहीं बनती है।

- इसी बीच प्रफुल्ल की एक फीमेल फ्रेंड्स की शादी लॉस वेगास में होती है। यहां वो जाती है और एक होटल में जुआ खेलते वक्त अपना सारा पैसा हार जाती है। वो यहीं नहीं रुकती, होटल वालों से उधार में पैसे लेकर फिर जुआ खेलती है और ये पैसे भी हार जाती है। जैसा कि प्रफुल्ल की कमाई तो सीमित है ऐसे में वो कर्जा चुकाने के लिए चोरी-चकारी, बैंक लूटना जैसे काम करने लगती है। इसी बीच कुछ लड़के भी लव इंटरेस्ट के तौर पर उसकी लाइफ में आते हैं जिससे उसके अफेयर होते हैं। बात नहीं बनती। तो क्या प्रफुल्ल को सच्चा प्यार मिलता है? क्या वो अपनी उधारी चुका पाती? ये जानने के लिए तो आपको फिल्म देखनी होगी।

डायरेक्शन
- फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है। जैसा कि फिल्म की शूटिंग विदेश में हुई है ऐसे में यहां काफी अच्छी लोकेशन देखने को मिली हैं। बात अगर कहानी की करें तो ये कहीं-कहीं न सिर्फ कमजोर जान पड़ती है, बल्कि निराश भी करती है।

- फिल्म का फर्स्ट हाफ दर्शकों को बांधता है, लेकिन सेकंड हाफ में कहानी बिखरती और हिली-डुली नजर आती है। साथ ही, फिल्म के स्क्रीनप्ले को भी काफी बेहतर किया जा सकता था। ये सब बातें हंसल के डायरेक्शन पर सवाल खड़े करती है क्योंकि दर्शकों को उनसे एक बेहतरीन फिल्म की आस थी, लेकिन ये फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है।

एक्टिंग
- फिल्म में सिर्फ और सिर्फ कंगना पर फोकस किया गया है। नो डाउट उनकी एक्टिंग काफी अच्छी है, लेकिन अगर उन्हें छोड़ दिया जाए तो किसी और कैरेक्टर की एक्टिंग याद ही नहीं आती है। बेशक कास्टिंग यहां काफी कमजोर रही है जिसे और बेहतर किया जा सकता था।

म्यूजिक
- फिल्म का म्यूजिक तो पहले ही रिलीज हो चुका है जो कि कोई खास कमाल नहीं दिखा पाया है। वहीं फिल्म का सबसे उम्दा सॉन्ग 'सिंगल रहने दे' आखिरी में क्रेडिट देते वक्त रखा गया है। इसका बैकग्राउंड स्कोर भी ओके है।

देखें या नहीं
- अगर आप कंगना रनोट को हद से ज्यादा पसंद करते हैं तो एकबार ट्राय कर सकते हैं, लेकिन अगर हंसल की फिल्मों के कायल हैं तो ये फिल्म आपको निराश कर सकती है।

फिल्म रिलीज के मौके पर हाल ही में DainikBhaskar.com ने कंगना रनोट से फिल्म और उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर खास बातचीत की। आगे की स्लाइड में पढ़े कंगना का इंटरव्यू...

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