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Movie Review: नौसेना के पराक्रम और जज्बे को दर्शाती है 'द गाजी अटैक'

Dainik Bhaskar

Feb 16, 2017, 09:58 AM IST

फिल्म की शुरुआत में महानायक अमिताभ बच्चन का वॉइस ओवर आता है और वो फिल्म की भूमिका बांध देते है, जिसके अंतर्गत यह पता चलता है की आखिरकार पाकिस्तान के साथ भारत की एक और जंग हुई थी, जिसके बारे में कुछ ही लोगों को पता था। यह फिल्म उसी कहानी को दिखाती है।

'The Ghazi Attack' Is A Must Watch

क्रिटिक रेटिंग 3/5
स्टार कास्ट

अतुल कुलकर्णी, के के मेनन, राणा दग्गुबती, तापसी पन्नू,

ओम पूरी, राहुल सिंह, कुणाल कौशिक

डायरेक्टर संकल्प रेड्डी
प्रोड्यूसर धर्मा प्रोडक्शन, अन्वेष रेड्डी, एन एम पाशा
म्यूजिक के (कृष्ण कुमार)
जॉनर वॉर फिल्म

मंझे हुए एक्टर्स अतुल कुलकर्णी और के के मेनन के साथ 'बाहुबली' फेम राणा दग्गुबती ने इस सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म में काम किया है। कैसी बनी है यह फिल्म, आइए जानते हैं।

कहानी

फिल्म की कहानी 1971 के समय की है, जब पाकिस्तान ने भारत के नौसेना के सबसे दमदार आईएनएस विक्रांत को जमींदोज करने के इरादे से अपनी सबसे कुशल पनडुब्बी 'गाजी' को भेजा था। लेकिन भारत की नौसेना के एस 21 पनडुब्बी पर मौजूद कप्तान रणविजय सिंह (के के मेनन), लेफ्टिनेंट कमांडर अर्जुन (राणा दग्गुबती), देवराज (अतुल कुलकर्णी) जैसे ऑफिसर्स ने अपनी सोच और समझ के साथ पीएनएस गाजी को समंदर में ही मार गिराया। हालांकि, गाजी के भीतर एस 21 से काफी ज्यादा मारक क्षमता थी, लेकिन सूझ बूझ से लड़ाई करके भारतीय सेना ने यह मिशन पूरा किया।


डायरेक्शन
फिल्म का डायरेक्शन और खासतौर पर वीएफएक्स का काम बहुत ही उम्दा है, जिसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है। साथ ही स्क्रीनप्ले को बहुत सटीक रखा गया है, जो आपको सोचने पर विवश कर देता है और लगता है कि आपके सामने भारत और पाकिस्तान का डेडली मुकाबला चल रहा है। डायलॉग और सिनेमेटोग्राफी भी काफी अच्छी है। यह फिल्म 1971 में हुए भारत पाकिस्तान के बीच पानी के अंदर हुए युद्ध की दास्तान बयां करती है, जिसकी वजह से शायद आजकल की मसालेदार और ढिंचक फिल्में देखनी वाली जनता इसे अपने मनको पर खरा ना समझे। लेकिन परफॉर्मेंस और कहानी को तवज्जो देने वाले जरूर ही इस फिल्म को देखना पसंद करेंगे।

स्टारकास्ट
के के मेनन के साथ-साथ अतुल कुलकर्णी ने बहुत ही उम्दा अभिनय किया है। वहीं, राणा दग्गुबती एक बार फिर अच्छी एक्टिंग करते दिख रहे हैं। खासतौर पर उनके और के के मेनन के बीच के सीन्स काफी दिलचस्प हैं। फिल्म में बांग्लादेशी शरणार्थी (उस समय वह ईस्ट पाकिस्तान हुआ करता था) के रूप में तापसी पन्नू का काम अच्छा है और बाकी सभी सह कलाकारों का काम सहज है।


फिल्म का म्यूजिक
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है और वैसे वॉर फिल्म होने की वजह से कोई और गीत नहीं रखा गया है। हालांकि, 'सारे जहां से अच्छा' और 'जन गण मन' भी फिल्म के दौरान आते हैं, जिसे सुनते ही एक अलग जज्बा अपने भीतर जाग उठता है।


देखें या नहीं?
अगर आपको इतिहास से जुड़ी कहानियां पसंद हैं और खासतौर पर परफॉर्मेंस पर आधारित फिल्में पसंद करते हैं, तो इसे जरूर देख सकते हैं।

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'The Ghazi Attack' Is A Must Watch
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