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Movie Review: 'वेडिंग एनिवर्सरी' में निराश करता है नाना का रोमांटिक मिजाज

'वेडिंग एनिवर्सरी' गोवा में बेस्ड एक मैरिज एनिवर्सरी की रात में होने वाली घटनाओं पर आधारित कहानी है...

Dainik Bhaskar

Feb 24, 2017, 11:38 AM IST
माही गिल के साथ नाना पाटेकर। माही गिल के साथ नाना पाटेकर।
क्रिटिक रेटिंग 1.5/5
स्टार कास्ट नाना पाटेकर, माही गिल, प्रियांशु चटर्जी
डायरेक्टर शेखर एस झा
प्रोड्यूसर कुमार वी महंत, अचुत नायक
संगीत अभिषेक रे
जॉनर रोमांटिक ड्रामा

गोवा की एक रात की कहानी इस फिल्म में दिखाई गई है। जिसमें पहली बार एक्टर नाना पाटेकर और माही गिल एक साथ किसी फिल्म में नजर आए हैं, कैसी है यह फिल्म, आइए पता करते हैं...

कहानी
फिल्म की कहानी गोवा और उसके सीन्स के साथ एक गाने से शुरू होती है, जिसमें आपके 3 मिनट के लगभग का समय जाता है फिर एंट्री होती है कहानी(माही गिल) की। कहानी अपनी वेडिंग एनिवर्सरी के लिए खास तौर पर गोवा आयी हुई है और बस अपने पति निर्भय(प्रियांशु चटर्जी) के भी आने का इंतजार करती रहती है। प्रियांशु मुंबई से फ्लाइट पकड़ने में लेट हो रहा होता है। इसी बीच कहानी नागार्जुन (नाना पाटेकर) की किताब 'प्रतिबिम्ब' पढ़ रही होती है और अचानक से उसके सामने नागार्जुन की एंट्री हो जाती है। जो इस पूरी रात में कहानी को जीवन और उससे जुड़ी सच्चाइयों को कहानी को बताता है, गोवा की सैर कराता है, अलग अलग तरह के लोगों के साथ मिलता है। आखिरकार फिल्म के अंत में निर्भय मुंबई से गोवा पहुंच जाता है और अपनी पत्नी के साथ वेडिंग एनिवर्सरी मनाता है।

डायरेक्शन
फिल्म का डायरेक्शन ठीक ठाक है, लोकेशन भी अच्छी है और ज्यादातर इनडोर ही है लेकिन फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले काफी कमजोर है। इसका वन लाइनर बहुत बढ़िया है लेकिन जब पूरी फिल्म बाउंड स्क्रिप्ट में तब्दील हुई और शूटिंग के लिए गई होगी, तो शायद कुछ और ही बनकर सामने आई है। किरदार कभी भी, कहीं भी आ जा रहे हैं, झटके से सैर पर, तो कभी घर के भीतर ये पात्र दिखाई पड़ते हैं। फिल्म रोमांटिक है लेकिन नाना पाटेकर के संवादों के अलावा दूर दूर तक रोमांस दिखाई नहीं पड़ता है। पत्नी का केक शॉप में जाना, स्पा के लिए जाना, भिन्न भिन्न तरह के लोगों से मिलना, सब कुछ काफी बनावटी सा जान पड़ता है। फिल्म की एक ही जान है वो हैं नाना पाटेकर की मौजूदगी और उनके डायलॉग्स।

स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस
नाना पाटेकर की बहुत ही उम्दा एक्टिंग है और खास तौर पर जब वो डायलॉग्स बोलते हैं तो कोई कोई डायलॉग आपको सोचने पर विवश भी कर देता है। माही गिल कई साल के बाद परदे पर आई हैं लेकिन उनकी एक्टिंग में वो सहजता नहीं दिखाई दे रही थी, जो एक वक्त पर होती थी। उनके संवाद अभिनय के दौरान काफी पढ़े-पढ़े से सुनाई पड़ रहे थे, जिसे बेहतर किया जा सकता था। 'तुम बिन' फेम प्रियांशु चटर्जी का ज्यादातर सीन तो फोन पर हैं और इक्का दुक्का दृश्यों में वो अच्छे ही लगते हैं।

म्यूजिक
फिल्म का म्यूजिक ठीक ठाक है। खास तौर पर बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है लेकिन गाने जब भी आते हैं, वो फिल्म की रफ्तार को कमजोर ही करते हैं।

देखें या नहीं
सिर्फ नाना पाटेकर के शेर ओ शायरी और संवादों के लिए एक बार ट्राय कर सकते हैं।

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माही गिल के साथ नाना पाटेकर।माही गिल के साथ नाना पाटेकर।
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