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Movie Review: 'जेड प्लस'

'जेड प्लस' की कहानी राजस्थान के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले एक आम आदमी असलम (आदिल हुसैन) के इर्द-गिर्द घूमती कहानी है।

Dainik Bhaskar

Nov 28, 2014, 03:17 PM IST
Zed Plus Movie Review
कहानी: यह मूलत: एक सामाजिक राजनीतिक सटायर है। फिल्म एक आदमी के नजरिए से लोकतंत्र पर कटाक्ष करती है। दरअसल फिल्म में दिखाया गया है कि प्रधानमंत्री (कुलभूषण खरबंदा) अपनी सरकार की डगमगाती हालत से परेशान हैं।

सरकार के सहयोगी दल का एक नेता उन्हें सरकार बचाने के लिए राजस्थान की फतेहपुर दरगाह में जानें की सलाह देता है। संयोग से प्रधानमंत्री दरगाह में माथा टेकने पहुंचते हैं और सरकार बच जाती है।

इसी दौरान फतेहपुर कस्बे का रहने वाला असलम किसी तरह से प्रधानमंत्री से मुलाकात कर लेता है और उन्हें अपनी छोटी सी समस्या बताता है।

इस मुलाकात से असलम फेमस हो जाता है। प्रधानमंत्री, असलम को जेड प्लस सुरक्षा देने के निर्देश देते हैं और यहीं से कहानी में नया मोड़ आता है।

एक्टिंग: एक्टिंग की बात की जाए तो आदिल हुसैन ने शानदार परफॉरमेंस दी है। पंक्चर बनाने वाले आम आदमी के किरदार में वह बिलकुल फिट बैठे हैं। दीक्षित के रोल में केके रैना ने भी अच्छी एक्टिंग की है।
साथ ही छोटे से रोल में मोना सिंह ने भी सधी हुई परफॉरमेंस दी है। फिल्म की कास्टिंग बहुत सोच समझकर की गई है। यूनिक कहानी को सफल बनाने में हर एक्टर ने अपनी जी-जान लगा दी है। यही वजह है कि फिल्म देखने लायक बन जाती है।
निर्देशन: 'पिंजर' जैसी बेहतरीन फिल्म बना चुके चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने इस बार भी कुछ नया करने की कोशिश की है और अच्छी फिल्म बनाई है। फिल्म की कहानी को कसे हुए निर्देशन की जरूरत थी और द्विवेदी इसमें बिलकुल खरे उतरे। उन्होंने फिल्म को कहीं भी भटकने नहीं दिया।
क्यों देखें: मसाला एंटरटेनर फिल्मों से बोर हो गए हैं और मीनिंगफुल सिनेमा देखने के शौक़ीन हैं तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। साथ ही उम्दा एक्टिंग और बेहतरीन कहानी इसे देखने लायक बनाती है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बेसिर पैर की मसाला फिल्मों की तरह ज्यादा बिजनेस और दर्शक तो नहीं बटोर पाएगी मगर बेहतरीन सिनेमा के लिए जरूर याद की जाएगी।
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