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म्याऊं, भौभौ, गुच्चु...जानें किस किस तरह के कोड वर्ड इस्तेमाल करते हैं जासूस

70 और 80 के दशक की ज्यादातर फिल्मों में लाल गुलाब-काला गुलाब कोड वर्ड का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता था।

Danik Bhaskar | Dec 08, 2017, 12:05 AM IST

जासूसी की दुनिया में कोड वर्ड का इस्तेमाल नया नहीं है। कोड वर्ड सीआईए और केबीजी भी इस्तेमाल करती है, मोसाद और आईएसआई भी और भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ भी। स्वतंत्र जासूस भी कोड वर्ड में बातचीत करते हैं और आतंकी और तस्कर भी। किसने बनाया कोड वर्ड को मशहूर...

आज हम आपको ऐसे ही कुछ कोडवर्ड्स के बारे में बता रहे हैं। साथ ही ये भी, कि कोड वर्ड को मशहूर किसने बनाया, वो मशीन कौन-सी थी जो खासतौर पर जासूसी कोड वर्ड्स को डी-कोड करने के लिए बनाई गई थी। इसके अलावा आतंकवादी जासूसी के लिए किन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल करते हैं। कोड वर्ड ऐसे चुने जाते हैं, जिन पर आमतौर पर किसी का ध्यान न जाए या कोई सुनें तो अंदाजा न लगा पाए कि उसके पीछे क्या राज छुपा है। म्याऊं, भौभौ, गुच्चु जैसे कोड वर्ड इसी का नमूना हैं।

सबसे पहले-कोड वर्ड्स का इतिहास

कोड वर्ड को दो तरह से देखा जा सकता है। पहला, कोड वर्ड जिसमें एक पूरे शब्द के लिए एकदम अलग शब्द इस्तेमाल किया जाता है और दूसरा, साइफर जिसमें लिखने का तरीका ही अलग होता है यानि हर लैटर के लिए कोई दूसरा लैटर या साइन का इस्तेमाल करना। 18वीं सदी में अमेरिका में साइफर का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता था। जूलियस सीज़र के नाम पर आधारित जूलियस शिफ्ट का इस्तेमाल सेना करती थी। हालांकि आने वाली पीढ़ी को इन कोड वर्ड्स को समझने में 800 साल लग गए।

कोड वर्ड का यूज़ क्यों

कोड वर्ड, जासूसी दुनिया की अहम कड़ी है। इन खास शब्दों के कई मायने होते हैं और इन्हें यूज़ करने की वजह भी।

- अपनी (जासूस की) पहचान छुपाने के लिए
- खास जानकारियों (राज़) को सुरक्षित करने के लिए
- दूसरों से बातचीत या अपना संदेश पहुंचाने के लिए
- किसी खास काम या केस का सीक्रेट रखने के लिए
- किसी लेन-देन को पूरा करने के लिए

नॉवेल, फिल्म और जासूस सीरियल्स में कोड वर्ड

ये तय है कि जासूस है, तो कोई न कोई कोड वर्ड जरूर होगा। फिर वह असल जिंदगी के जासूस हों या फिक्शन कैरेक्टर। शरलक होम्स और अगाथा क्रिस्टी के जासूसी नॉवेल हों, जेम्स बॉन्ड या रॉ जासूस रविंद्र कौशिक के जीवन पर बनी ‘एक था टाइगर’ जैसी फिल्में या फिर व्योमकेश बक्शी और करमचंद जैसे मशहूर टीवी सीरियल, जासूस कोड वर्ड में ही बात करते हैं।

आगे की स्लाइड में- 70 के दशक में 'लाल गुलाब' था फेमस, कोड वर्ड के लिए बनी थी मशीन

फाइल फोटो फाइल फोटो

पिज्जा, बर्गर, कॉफी और पेप्सी

 

 

अक्टूबर 2016 में एक राज्यसभा सांसद से जुड़े ‘जासूसी कांड’ में लिप्त जो 6 पाकिस्तानी जासूस दिल्ली में पकड़ाए थे वे पिज्जा, बर्गर, कॉफी और पेप्सी जैसे कोड वर्ड्स से बातचीत करते थे।

इनके लिए पिज्जा का मतलब अंसल प्लाज़ा में मुलाकात, बर्गर का मतलब दिल्ली का पीतमपुरा इलाका और कॉफी का मतलब प्रीत विहार मॉल होता था।

लाल गुलाब-काला गुलाब
 

70 और 80 के दशक की फिल्मों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला कोड वर्ड 'लाल गुलाब' और 'काला गुलाब' तो आपको याद ही होगा। इसके अलावा '100 के बड़े नोट के दो हिस्सों को जोड़ना' भी एक तरह का कोड वर्ड ही था।

स्कॉटिश अमेरिकन जासूस एलन जे पिंकर्टन (25 August 1819 – 1 July 1884) कोड वर्ड को मशहूर बनाने के लिए जाने जाते थे। पिंकर्टन ने अमेरिकी सरकार की काफी मदद की। बाद में Pinkerton National Detective Agency भी बनाई। 1849 में पिंकर्टन शिकागो पुलिस के पहले डिटेक्टिव भी बनाए गए।

 

कोड वर्ड डी-कोड करने के लिए थी मशीन


World War 1 के दौरान जर्मन नागरिक आर्थर शरबियस ने खासतौर पर कोड वर्ड को डी-कोड करने के लिए बनाई थी। यह एक तरह की Polyalphabetic stream cipher machine थी, जिसमें की-बोर्ड, लाइट पैनल और एडजस्टेबल रोटर्स थे।

 

(फोटो में -पिंकर्टन (left) अब्राहम लिंकन के साथ। तीसरे मेजर जनरल जॉन ए. मैकक्लेयर्नड हैं।)

अगर आपको ऐसे ही कोड वर्ड की दुनिया को और करीब से जानना है और समझना है कि आखिर इन कोड वर्ड्स के क्या मायने होते हैं एक जासूस की ज़िंदगी में, तो ये नया सीरियल देखना न भूलिएगा।

 

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