जबलपुर

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दवा बाजार खाली कराने अल्टीमेटम

दुकान खरीदो, वर्ना खाली करो, घंटों चलता रहा हंगामा।

Dainik Bhaskar

Mar 18, 2012, 06:32 AM IST
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जबलपुर. सिविक सेंटर स्थित हितकारिणी सभा के स्वामित्व वाले दवा बाजार में कारोबार करने वाले व्यापारियों को दुकानें खाली करने के लिये 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। दवा बाजार के करीब सवा सौ दुकानदारों के सामने यह शर्त रखी गई है कि आज के बाजार मूल्य से पैसे जमा करने पर दुकानें खरीद लें, अन्यथा दुकान खाली कर दें। वहीं, नगर निगम द्वारा भी किराया वसूली के नोटिस जारी किये गये हैं। उधर, दुकानदारों को दुकानें खाली करने दिये गये अल्टीमेटम के बाद व्यापारी लामबंद हो गये हैं। उनका कहना था कि दुकान किराये पर लेते समय उनसे जो राशि जमा कराई गई थी, उस राशि का हिसाब-किताब भूल जाने कहा जा रहा है। दवा बाजार में दोपहर को दुकानें खाली कराने दिये गये अल्टीमेटम को लेकर दवा बाजार में हलचल तेज हो गई थी। दुकानदार अपना कारोबार छोड़कर हितकारिणी सभा के निर्णय पर विरोध जता रहे थे। इस संबंध में दवा बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश जैन ने बताया कि दवा बाजार में वर्ष 1993 में दुकानदारों ने दुकानें किराये से ली थीं। उस समय निर्माण चल रहा था और सभी दुकानदारों से निर्माण लागत के रूप में वेलफेयर फण्ड के रूप में करीब ढाई करोड़ की राशि जमा कराई गई थी। उस राशि का हिसाब-किताब नहीं बताया जा रहा है। इस निर्णय को लेकर व्यापारी आक्रोशित हो गये हैं और सभा के निर्णय का हर स्तर पर विरोध करने की तैयारी में जुट गये हैं। दुकानदारों ने आपत्ति जताई- दुकानदारों का कहना है कि हितकारिणी सभा द्वारा जो अल्टीमेटम दिया गया है, उसमें वर्तमान दर से दुकानें खरीदने के लिये कहा गया है। इस मामले में उनकी आपत्ति यह है कि पूर्व मंे जो राशि पगड़ी के रूप में जमा कराई गई (करीब ढाई करोड़ की राशि) को भुलाकर सभा द्वारा निर्धारित दर पर दुकानें खरीदने को कहा जा रहा है। बैठक में होगा निर्णय- दवा बाजार एसोसिएशन के सचिव आजाद जैन का कहना था कि दवा बाजार की दुकानें बेचने-खरीदने के संबंध में व्यापारियों व सभा के बीच आज दोपहर को एक बैठक होगी, जिसमें मामले के सुलझने की उम्मीद है। निगम का कर कौन देगा?- व्यापारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से हितकारिणी सभा को किराया देते आ रहे हैं, इसके बावजूद नगर निगम द्वारा उन्हें कर वसूली का नोटिस थमाया गया है। दवा बाजार जिसके स्वामित्व में है, कर भी उसी से वसूला जाना चाहिये। दवा बाजार के किरायेदारों ने एक दशक से अधिक समय से किराया नहीं बढ़ाया था, न ही कोई एग्रीमेंट कराया था। इन दुकानों के राजस्व व कर संबंधी सभी दायित्व सभा के ऊपर पड़ रहे थे। ऐसे में दुकानदारों से ऑफर मांगे गये थे, जो कि सभी ने लिखित में दिये हैं। उसके मुताबिक ही सभी को दुकानें दी जा रही हैं। -सतीश राका, प्रभारी अधिकारी, हितकारिणी सभा
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